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राहत अच्छा कदम, पर नए झटकों के लिए तैयार नहीं बाजार और इकॉनमी

मार्केट पंटर्स को काबू करना शुक्रवार के सरकारी एलानों का हिस्सा शायद न हो लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने जो किया वह इसी रणनीति की याद दिलाता है। निफ्टी और सेंसेक्स में 5-5% की उछाल पिछले 10 साल में एक दिन की सबसे बड़ी उछाल थी।

इकनॉमिक टाइम्स 24 Sep 2019, 9:29 am
निशांत वासुदेवन
नवभारतटाइम्स.कॉम tax

एक हुनरमंद गेंदबाज के होशियारी से बुने इस जाल में बल्लेबाज का फंसना लगभग तय होता है। वह जानबूझकर कुछ हल्की गेंदें फेंककर बल्लेबाज को ज्यादा से ज्यादा रन बनाने का मौका देता है। कुछ गेंदों को तबीयत से पीटने के बाद बल्लेबाज को लगता है कि उसने गेंदबाज को दबा दिया है। गेंदबाज के लिए योजना के अंतिम और अहम चरण पर अमल करने का वक्त आता है। खुद को दबाव में दिखा रहा गेंदबाज मारक गेंद फेंकता है।

जोश में भरा बल्लेबाज झन्नाटेदार शॉट लगाने को बढ़ता है, लेकिन गेंद क्षेत्ररक्षक के हाथों में थमा बैठता है। गेंद में बल्ला नहीं पाने की सूरत में उसके पगबाधा होने की पूरी संभावना होती है। ऑस्ट्रेलिया के फिरकी गेंदबाज शेन वॉर्न को इस रणनीति में महारत हासिल थी। शुक्रवार को आई तेज उछाल में दलाल स्ट्रीट के शॉर्ट सेलर्स जिस स्थिति फंसे, उसकी तुलना इस रणनीति से कर सकते हैं। हालांकि मार्केट पंटर्स को काबू करना शुक्रवार के सरकारी एलानों का हिस्सा शायद न हो लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने जो किया वह इसी रणनीति की याद दिलाता है।

शॉर्ट सेलर्स सेंटीमेंट बेहतर बनाने के लिए वित्त मंत्री की तरफ से हो रहे प्रेस कॉन्फ्रेंस में हो रहे ऐलान को बेअसर मानकर पिछले कुछ हफ्तों से मंदी के सौदे बढ़ा रहे थे। उन्हें इसका अंदाजा कतई नहीं होगा कि सीतारमण के पास एक मारक चाल है लेकिन कुछ ट्रेडर्स ने हवा का रुख भांपने की कोशिश में अपनी पोजिशंस जरूर काटी थीं। चूंकि सभी अनाउंसमेंट मार्केट बंद होने के बाद किए जा रहे थे इसलिए शॉर्ट सेलर्स निश्चिंत हो गए थे। कॉर्पोरेट टैक्स रेट में कटौती का कदम सेंटीमेंट मजबूत बनाने वाला साबित हुआ। इसे मोदी सरकार का सबसे अहम कदम माना जा रहा है जो अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों की कायापलट कर सकता है।

शुक्रवार को निफ्टी और सेंसेक्स में 5-5% की उछाल पिछले 10 साल में एक दिन की सबसे बड़ी उछाल थी। खूब मीनमेख निकालने वाले भी मानेंगे कि बाजार की प्रतिक्रिया गैरवाजिब नहीं थी। रेट कट का फायदा आने वाले वर्षों में कंपनियों को मिलेगा, जो सबको दिखेगा। कई एनालिस्टों ने निफ्टी का प्रॉफिट एस्टिमेट बढ़ा दिया है। इसलिए अगर कंपनियों का प्रॉफिट एस्टिमेट भी 10-12% बढ़ जाए तो बाजार खुद को इसके हिसाब से फटाफट ढाल लेगा। मतलब शुक्रवार को बाजार में आई 5% की तेज उछाल के बाद और 7% की गुंजाइश बची है।

निवेशकों का मानना है कि कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती का असर बाजार के नियर टर्म प्रॉस्पेक्ट्स पर कुछ समय के लिए दिख सकता है, लेकिन अर्थव्यवस्था पर इसके असर को लेकर वे थोड़े सशंकित नजर आ रहे हैं। कई स्टडीज के मुताबिक राहत का सबसे बड़ा फायदा बुनियादी रूप से ठोस कंपनियों को मिलेगा। इनमें से ज्यादातर कंपनियां पहले से ही कैश रिच हैं और हाल के बरसों में निवेश से परहेज करती रही हैं। अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के मुताबिक कंपनियां अपने फंड का इस्तेमाल तब करती हैं जब उन्हें आनेवाले समय में ठोस मांग नजर आती है। आने वाले समय में डिमांड कैसी रहेगी इसके बारे में अभी पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कंपनियां अतिरिक्त खर्च करेंगी। बेहतर तो यही होता कि सरकार यह सुनिश्चित करती कि राहत का एक हिस्सा मुसीबत की मारी कंपनियों को मिले जिन्हें कर्ज का बोझ घटाने की जरूरत है। 2003-04 में कंपनियों के बही-खातों की सफाई से देश में बड़ा बुल रन शुरू हुआ था।

बाजार से जब राहत का खुमार उतरेगा या ग्लोबल इकॉनमी लड़खड़ाएगी तो निवेशक देश की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाने लगेंगे। राहत पैकेज के चलते अब जरूरत के वक्त इकॉनमी को सपोर्ट देने के लिए सरकार के पास ज्यादा गुंजाइश नहीं रह गई है। क्रूड प्राइस ताश के पत्तों में जोकर साबित हो सकता है। सरकार तो बस यही मनाएगी कि उसे क्रूड के दाम में तेज उछाल का सामना न करना पड़े क्योंकि ऐसा होने पर उसका पूरा हिसाब बिगड़ जाएगा, अर्थव्यवस्था और बाजार की बुनियाद फिर से कमजोर नजर आने लगेगी।

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