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5 साल में 1600% तक की तेजी, मल्टीबैगर क्वॉलिटी दिखा रहे 10 स्टॉक्स

प्रॉफिट मार्जिन का आंकड़ा किसी भी कंपनी की असल पिक्चर दिखा देता है। मार्केट के जानकार लोगों का कहना है कि मल्टीबैगर शेयरों की बुनियादी विशेषताओं में अच्छे मार्जिन का पहलू शामिल रहता है।

इकनॉमिक टाइम्स 11 May 2018, 3:41 pm
अमित मुद्गिल, नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम 69BE5876-5AED-4AE6-A879-E71

प्रॉफिट मार्जिन का आंकड़ा किसी भी कंपनी की असल पिक्चर दिखा देता है। मार्केट के जानकार लोगों का कहना है कि मल्टीबैगर शेयरों की बुनियादी विशेषताओं में अच्छे मार्जिन का पहलू शामिल रहता है। फिलिप्स कार्बन, आयशर मोटर्स, फिनोलेक्स केबल्स और बालकृष्णा इंडस्ट्रीज में कम-से-कम दो बातें कॉमन हैं। एक तो यह कि इनके मल्टीबैगर होने की बात सबको पता है। दूसरी बात यह है कि इन्होंने पिछले कुछ वर्षों में अपने ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस में लगातार सुधार किया है।

बीएसई 500 और बीएसई मिड ऐंड स्मॉल कैप सिलेक्ट इंडेक्स की कम-से-कम 10 कंपनियों ने पीबीआईडीटी यानी ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन में पिछले चार वित्त वर्षों के दौरान इजाफा दर्ज किया है।

दलाल स्ट्रीट ने भी इन शेयरों को हाथोंहाथ लिया है। देश में कार्बन ब्लैक बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी फिलिप्स कार्बन का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन फाइनैंशल इयर 2014 में 2.05 पर्सेंट था। यह आंकड़ा पिछले चार वर्षों में लगातार बढ़कर 15.92 पर्सेंट पर पहुंच गया। ओपीएम एक फाइनैंशल रेशियो है। यह किसी कंपनी की ऑपरेशनल एफिशंसी का पैमाना है।

आईसीआईसीआई सिक्यॉरिटीज का कहना है कि इस शेयर में चढ़ने की काफी गुंजाइश है क्योंकि इसके प्रॉडक्ट्स की मांग दमदार है, वित्तीय स्थिति अच्छी है और मैनेजमेंट भी बुद्धिमानी दिखा रहा है। ब्रोकरेज ने इस शेयर के 35 रुपये पर ट्रेड करने के जमाने से इसके लिए बाय रेटिंग बनाए रखी है। गुरुवार को यह 239.75 रुपये पर बंद हुआ।

आईसीआईसीआई ने एक नोट में कहा, 'पीसीबीएल ने खुद पर लगा कमोडिटी टैग हटा लिया है। इसने दमदार मैन्युफैक्चरिंग सेटअप बनाया है। यह टायर, पेंट, प्लास्टिक और इंक इंडस्ट्रीज के लिए अहम मटेरियल बना रही है। यह शेयर पिछले पांच वर्षों में 1632 पर्सेंट चढ़ा है। कंपनी 90 पर्सेंट से ज्यादा के कपैसिटी यूटिलाइजेशन लेवल पर काम कर रही है। यह तमिलनाडु में एक कारखाना लगा रही है। साथ ही, पहले के दो कारखानों का विस्तार कर रही है, जिससे कपैसिटी 50 पर्सेंट बढ़कर 7 लाख टन हो जाएगी।

रबड़ केमिकल्स के बिजनस से जुड़ी एनओसीआईएल के शेयर पिछले पांच वर्षों में 1272 पर्सेंट चढ़े हैं। आशीष कचोलिया और डॉली खन्ना जैसे धुरंधर निवेशकों ने इसमें पैसा लगाया है। इस कंपनी का ऑपरेटिंग एबिट्डा फाइनैंशल इयर 2015 से 2018 के बीच 32.9 पर्सेंट की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा, वहीं प्रॉफिट में 43.8 पर्सेंट का इजाफा हुआ।

पिछले पांच वर्षों में इस कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन बढ़ा। 2014 में यह 11.99 पर्सेंट था, जो फाइनैंशल इयर 2018 में 28.93 पर्सेंट हो गया। कुल कर्ज फाइनैंशल इयर 2015 में 147 करोड़़ रुपये पर था, जो फाइनैंशल इयर 2018 में 5 करोड़ पर आ गया।

केबल मैन्युफैक्चरर फिनोलेक्स केबल्स का मार्जिन कॉपर के दाम में बढ़ोतरी के बाद बढ़ता रहा। यह शेयर पिछले पांच वर्षों में 1200 पर्सेंट चढ़ा है। कंपनी प्रॉडक्ट्स बेचते वक्त कैश अडवांस लेने का तरीका अपनाती है। इस रणनीति ने फाइनैंशल इयर 2012 से 2017 के बीच 0.5 गुने से ज्यादा का एफसीएफ/ओसीएफ रेशियो बनाने में मदद की। इडलवाइज ने हाल में एक नोट में लिखा कि कंपनी के मैनेजमेंट के इसी रणनीति पर चलते रहने की उम्मीद है ताकि ज्यादा फ्री कैश (फाइनैंशल इयर 2017 में 1.5 अरब रुपये) जेनरेट हो सके।

इडलवाइज सिक्योरिटीज ने कहा कि कंपनी ने वर्किंग कैपिटल और ऐडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट में कमी लाने की योजना बनाई है। इसके लिए वह जीएसटी लागू होने के बाद डिपो के कामकाज में बदलाव कर रही है। ब्रोकरेज शेयरखान ने इस शेयर को 755 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है, वहीं इडलवाइज सिक्योरिटीज ने 800 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है।

बालकृष्णा इंडस्ट्रीज का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन फाइनैंशल इयर 2012 में 17.26 पर्सेंट था, जो 2017 में 36.59 पर्सेंट हो गया। ऐनालिस्ट्स को उम्मीद है कि 60000 टन क्षमता वाला कार्बन ब्लैक प्लांट फाइनैंशल इयर 2019 में चालू हो जाएगा। इस प्लांट को इसकी पूरी क्षमता से चलाने पर कंपनी को मार्जिन एक से डेढ़ पर्सेंट बढ़ाने में मदद मिल सकती है। कंपनी का फोकस रेडियलाइजेशन पर है। उसका कारोबार ऑफ रोड टायरों पर है। कंपनी पावर और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट्स में बचत पर ध्यान दे रही है। मुंद्रा पोर्ट इसके प्लांट से महज 60 किमी़ दूर है। इन बातों से इसका मार्जिन बढ़ने में मदद मिलनी चाहिए।

आयशर मोटर्स, गैब्रिएल इंडिया और जेके टायर तीन अन्य कंपनियां हैं, जिन्होंने पिछले दो वर्षों में अपना मार्जिन लगातार बढ़ाया है। रॉयल एनफिल्ड की बाइक्स के लिए दमदार डिमांड और मार्जिन में सुधार से पिछले पांच वर्षों के दौरान आयशर मोटर्स के शेयर में 880 पर्सेंट की तेजी आई है।

गैब्रिएल इंडिया ने लागत घटाने के उपायों के जरिए मार्जिन बढ़ाया है। अच्छी वॉल्युम ग्रोथ और प्रॉडक्ट मिक्स में सुधार से आने वाले वर्षों में कंपनी का मार्जिन और बढ़ना चाहिए। ऐनालिस्ट्स का कहना है कि जेके टायर का वॉल्युम बढ़ सकता है, वहीं मैनपावर कॉस्ट घटने और इनपुट प्राइसेज में स्थिरता रहने से इसका प्रदर्शन सुधरना चाहिए। भारत फोर्ज, गुडइयर इंडिया और कार्बोरंडम यूनिवर्सल के मार्जिन में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके चलते इनके शेयरों के दाम चढ़े हैं।

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