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UPSC को टेक्‍निकल क्‍वेस्‍चन पेपर्स के हिंदी ट्रांसलेशन मिलने में हो रही दिक्‍कत: सरकार

ऐसी समस्‍या इंजिनियरिंग और मेडिकल साइंसेस जैसे टेक्निकल पेपर्स में ज्‍यादा देखने को मिल रही है। सरकार ने बुधवार को एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए यह बात कही।

एजेंसियां 27 Nov 2019, 4:25 pm
यूनियन पब्‍लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) को लगातार क्‍वेस्‍चन पेपर्स के सटीक हिंदी ट्रांसलेशन मिलने में बाधा हो रही है। ऐसी समस्‍या इंजिनियरिंग और मेडिकल साइंसेस जैसे टेक्निकल पेपर्स में ज्‍यादा देखने को मिल रही है। सरकार ने बुधवार को एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए यह बात कही।
नवभारतटाइम्स.कॉम यूपीएससी
यूपीएससी


बता दें, कमीशन ने इसके लिए हाई लेवल स्‍टैंडिंग कमिटी का गठन किया था जो ऑफिशल लैंग्‍वेजेस पर पॉर्लियामेंट्री रेजॉलूशन को लागू करने के तौर-तरीकों की जांच करे।

राज्‍य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा, 'कमिटी ने साल 2012 में अपनी जो रिपोर्ट सौंपी थी जिसे यूपीएससी ने स्‍वीकार किया था, ने प्रश्‍न पत्रों के हिंदी ट्रांसलेशन में आ रही दिक्‍कतों को रेखांकित किया था।'

सरकार से पूछा गया कि इंडियन फॉरेस्‍ट सर्विस, इंडियन इकनॉमिक सर्विस, इंडियन स्‍टैटिस्‍टिकल सर्विस, जियोलॉजिकल और इंजिनियरिंग सर्विस जैसे कॉम्‍पिटिटिव एग्‍जाम्‍स अपने टेक्निकल नेचर के कारण हिंदी में नहीं लिखे जा सकते हैं। अगर ऐसा है तो क्‍या सरकार ने कभी ऐसे टेक्निकल एजुकेशन से जुड़े एग्‍जाम्‍स के लिए हिंदी को मीडियम के तौर पर सिलेक्‍ट किया।

जितेंद्र सिंह ने आगे कहा, 'यूपीएससी और इससे संबंधित काडर को नियंत्रित करने वाले विभागों के संचालन को इस मामले के सामने आने के बाद बंद कर दिया गया है।'

बता दें, कमीशन इंडियन फॉरेस्‍ट सर्विस कमीशन, द इंडियन इकनॉमिक सर्विस/इंडियन स्‍टैटिस्‍टिकल सर्विस एग्‍जामिनेशन (क्‍लब्‍ड एग्‍जाम), कंबाइंड जियो साइंटिस्‍ट और जियोलॉजिस्‍ट एग्‍जाम और इंजिनियरिंग सर्विसेस एग्‍जामिनेशन कंडक्‍ट कराता है।

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