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फेल हुआ कांग्रेस का दांव, लिंगायतों के गढ़ में बीजेपी ने मारी बाजी, मुस्लिम इलाकों में भी बनाई पैठ

कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने का प्रस्ताव पारित कर बड़ा दांव चला था। तब कहा भी जा रहा था कि अब तक बीजेपी के समर्थन कहे जाने वाले लिंगायतों का वोट यदि कांग्रेस की ओर शिफ्ट होता है तो वह दोबारा सत्ता में वापसी कर सकती है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 15 May 2018, 10:11 am
बेंगलुरु/नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम yediyurappa
बीएस येदियुरप्पा

कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने का प्रस्ताव पारित कर बड़ा दांव चला था। तब कहा भी जा रहा था कि अब तक बीजेपी के समर्थन कहे जाने वाले लिंगायतों का वोट यदि कांग्रेस की ओर शिफ्ट होता है तो वह दोबारा सत्ता में वापसी कर सकती है। लेकिन अब तक जो नतीजे आए हैं, वह इन सभी भविष्यवाणियों को खारिज करते हैं। खासतौर पर लिंगायतों के प्रभाव वाले क्षेत्र में बीजेपी बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 37 सीटों पर जीत दर्ज करती नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 18 और जेडीएस को 8 सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है। 2 सीटें अन्य के खाते में जा सकती हैं।

कर्नाटक LIVE: BJP ने बनाई बड़ी बढ़त, बहुमत से कुछ दूर

एक दिलचस्प आंकड़ा यह है कि परंपरागत रूप से कांग्रेस के समर्थक कहे जाने वाले मुस्लिम समुदाय के प्रभाव वाले इलाकों में भी बीजेपी मारती दिख रही है। मुस्लिम बहुल 10 सीटों पर बीजेपी आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 8 और जेडीएस 7 सीटों पर आगे है। किसी भी समुदाय की 15 फीसदी से अधिक आबादी वाले इलाके को बहुलता वाला क्षेत्र मानते हुए यह आंकड़े तैयार किए गए हैं।

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वोक्कालिगा समुदाय का एचडी देवगौड़ा और उनकी पार्टी पर भरोसा बरकरार नजर आ रहा है। वोक्कालिगा समुदाय की बहुलता वाली 20 सीटों पर जेडीएस आगे है, जबकि कांग्रेस ने 9 सीटों पर बढ़त कायम कर रखी है। बीजेपी के खाते में यहां 7 सीटें जा रही हैं। इसके अलावा दलित आबादी के प्रभाव वाली 19 सीटों पर बीजेपी ने बढ़त कायम कर रखी है। यहां कांग्रेस को 16 और जेडीएस को 12 सीटें मिलती दिख रही हैं।

2013 में येदियुरप्पा के अलग होने से लगा था BJP को झटका

लिंगायत बहुल इलाकों में बीजेपी इस बार बड़ी बढ़त हासिल करती दिख रही है तो इसका सबसे बड़ा श्रेय उसके सीएम कैंडिडेट बीएस येदियुरप्पा को ही जाता है। 2013 के आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं, तब वह बीजेपी से अलग होकर लड़े थे और ऐसे इलाकों में बीजेपी महज 5 सीटों पर ही सिमट गई थी। जबकि कांग्रेस को 47, जेडीएस को 11 और 7 सीटें अन्य के खाते में गई थीं।

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