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UP Chunav: बीजेपी के फॉर्म्युले पर अखिलेश की नई सोशल इंजीनियरिंग! गैर यादवों पर जता रहे भरोसा

SP Candidate List: समाजवादी पार्टी ने उम्‍मीदवारों की दूसरी लिस्‍ट जारी कर दी है। 159 प्रत्‍याशियों की सूची में 64 ओबीसी और 15 यादव हैं। वहीं गैर यादव ओबीसी उम्‍मीदवारों की संख्‍या 49 है।

Edited byवैभव पांडे | नवभारत टाइम्स 25 Jan 2022, 9:42 am

हाइलाइट्स

  • सपा ने 159 उम्‍मीदवारों की सूची जारी की, गैर यादव उम्‍मीदवारों को वरीयता
  • यूपी की ओबीसी आबादी में यादवों के बाद सबसे ज्‍यादा संख्‍या कुर्मियों की है
  • अखिलेश ने यादवों के बाद सबसे ज्‍यादा टिकट कुर्मी उम्‍मीदवारों को दिया है
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लखनऊ: बीजेपी ने गैर यादव ओबीसी वोटरों को अपने पाले में लाकर एक अलग वोटबैंक तैयार किया। यही उसकी सत्ता की चाबी बना। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अब इसी फॉर्म्युले पर अपनी नई 'सोशल इंजिनियरिंग' तैयार की है। परंपरागत तौर पर एमवाई फैक्टर से इतर अखिलेश ने गैर यादव ओबीसी उम्मीदवारों को बड़ी संख्या में टिकट देकर अपने ओबीसी वोटबैंक का दायरा और बड़ा करने की कोशिश की है।
सपा की दूसरी सूची में 159 प्रत्याशियों की सूची में 64 ओबीसी उम्मीदवारों को टिकट दिया है। इनमे 15 यादव उम्मीदवार हैं, जबकि गैर यादव ओबीसी प्रत्याशियों की संख्या 49 है। जाहिर है कि अखिलेश ने गैर यादव ओबीसी जातियों पर एक बड़ा दांव चला है। यूपी की ओबीसी आबादी में यादवों के बाद सबसे ज्यादा कुर्मियों की आबादी मानी जाती है। यह तकरीबन 8 प्रतिशत हैं। अखिलेश ने भी यादवों के बाद सबसे ज्यादा ओबीसी टिकट कुर्मियों को ही दिया है। इनकी संख्या 12 है। इसके अलावा पांच मौर्य, चार गड़रिया और एक लोधी को टिकट दिया गया है।

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जातिगत जनगणना की मांग करते रहे हैं
अखिलेश यादव कई बार जातिगत जनगणना करवाए जाने की मांग करते रहे हैं। वह दोहराते रहे हैं- जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी। इस लिस्ट में गैर यादव ओबीसी प्रत्याशियों को जिस तरह से तरजीह दी गई है, उसे इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। जातियों को आबादी के अनुपात में टिकट बांटने की कोशिश की गई है।

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बड़ी तादाद में शामिल करवाए थे गैर यादव ओबीसी
अधिसूचना जारी होने के बाद प्रदेश सरकार में मंत्री और विधायक रहे तमाम नेताओं ने इस्तीफा देकर सपा जॉइन की थी। इस्तीफा देने वालों में ज्यादातर गैर यादव ओबीसी थे। यही नहीं, बीते साल लालजी वर्मा और आरएस कुशवाहा बसपा छोड़कर सपा में शामिल हो गए थे। इसके अलावा राम अचल राजभर इस साल की शुरुआत में ही साइकल पर सवार हुए थे। यह साफ तौर पर इशारा है कि अखिलेश काफी समय से इस फॉर्म्युले पर काम कर रहे थे, जिसका असर इस लिस्ट पर साफ देखा जा सकता है।

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वैश्यों पर बड़ा दांव
आम तौर पर वैश्य जाति का झुकाव भाजपा की तरफ माना जाता है, लेकिन अखिलेश ने इस समाज के लोगों को भी अपने पक्ष में लाने की कोशिश की है। कई मर्तबा यह कहा जाता रहा है कि जीएसटी समेत अन्य वजहों से व्यापारी वर्ग, खासकर छोटा और मझोला व्यापार करने वाले नाराज हैं। इसी को देखते हुए अखिलेश ने वैश्यों को खुले दिल से टिकट देकर एक बड़ा दांव चला है। 9 वैश्यों को टिकट दिए गए हैं। अब यह तो नतीजे ही बताएंगे कि अखिलेश का यह दांव कितना फिट बैठता है।
लेखक के बारे में
वैभव पांडे
नवभारत टाइम्‍स डिजिटल में असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर। ग्रेजुएशन तक साइंस स्‍टूडेंट। इसके बाद मीडिया में पोस्‍ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई। लखनऊ से पत्रकारिता का सफर शुरू हुआ जो वाया आगरा, दिल्‍ली-NCR फिर नवाबों के शहर आ पहुंचा है। लंबे समय तक दैनिक जागरण प्रिंट में काम किया। अब 'न्‍यू मीडिया' की बारीकियों को समझने का सिलसिला जारी है।... और पढ़ें

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