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BJP Nishad Party Alliance: अखिलेश हाथ मलते रहे गए, बीजेपी ने निषाद पार्टी से मिला लिया हाथ... यूपी चुनाव में कितनी बदलेगी तस्वीर?

यूपी चुनाव को लेकर बीजेपी और निषाद पार्टी का गठजोड़ बेहद अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में करीब 160 से अधिक सीटों पर निषाद, केवट और मल्लाह जातियों का मजबूत दखल है। ऐसे में सियासी तस्वीर बदल सकती है।

Authored byसूर्य प्रकाश शुक्ला | Edited byराम शंकर | नवभारत टाइम्स 25 Sep 2021, 9:28 am

हाइलाइट्स

  • यूपी चुनाव में बीजेपी और डॉक्टर संजय निषाद की निषाद पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया
  • यूपी विधानसभा की करीब 160 से अधिक सीटों पर निषाद, केवट और मल्लाह जातियों का मजबूत दखल है
  • इन सीटों के जरिए निषाद वोट बैंक किसी भी दल की हार और जीत में निर्णायक भूमिका निभा सकता है
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लखनऊ
यूपी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और डॉक्टर संजय निषाद की निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद) ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि इससे यूपी की सियासी तस्वीर बदल सकती है।
यूपी विधानसभा की करीब 160 से अधिक सीटों पर निषाद, केवट और मल्लाह जातियों का मजबूत दखल है। इन सीटों के जरिए निषाद वोट बैंक किसी भी राजनैतिक दल की हार और जीत में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। यही वजह है कि भाजपा, सपा सहित यूपी के सभी दल निषादों की राजनीति करने वाले छोटे दलों को रिझाने में जुटे हैं। भाजपा ने इन सबमें बाजी मारते हुए शुक्रवार को डॉ. संजय निषाद के साथ गठबंधन भी कर लिया।

18 से ज्यादा जिलों में निर्णायक भूमिका
यूपी में निषाद, मल्लाह, बिंद, कश्यप और केवट की 153 उपजातियां रहती हैं। गोरखपुर, संतकबीरनगर, महराजगंज, कुशीनगर, बलिया, गाजीपुर, जौनपुर, भदोही, कौशांबी, चित्रकूट, मीरजापुर, सीतापुर, बहराइच और खीरी सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य और बुंदेलखंड के 18 से ज्यादा जिलों में इनकी बड़ी आबादी है। इन जिलों की 160 से अधिक ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां निषाद समाज का साठ हजार से लेकर एक लाख तक वोट बैंक है।


इनकी ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2016 में निषादों की लड़ाई के लिए मैदान में उतरी निषाद पार्टी ने एक साल बाद ही यानी 2017 में विधानसभा की दो सीटें जीती थी और पार्टी को विधानसभा चुनावों में तकरीबन साढ़े पांच लाख वोट मिला था।

ये दल भी ठोक रहे ताल
2016 में निषादों के लिए आरक्षण की मांग को लेकर डॉ. संजय निषाद ने निर्बल इंडियन शोषिक हमारा आम दल (निषाद पार्टी) का गठन किया। निषाद पार्टी कुछ दिनों तक यूपी में केवटों की सर्वमान्य पार्टी रही। लेकिन आज ऐसा नहीं है। वर्तमान में राष्ट्रीय महान गणतंत्र पार्टी, फूलन सेना, नवलोक पार्टी, निषाद सेना, राष्ट्रीय एकलब्य सेना, भारतीय मानव सेना पार्टी और सर्वदलीय निषाद-केवल संघ जैसे संगठन निषादों के बीच अच्छी पैठ बना चुके हैं।

निषादों में अहम भूमिका रखने वाली फूलन देवी के पति उपेंद्र कश्यप की देखरेख में गठित जलवंशी मोर्चा भी यूपी में आ चुका है। इन सब के साथ बिहार में राजनीति करने वाली पार्टियां वीआईपी पार्टी और हम भी यूपी में अपना आमद दर्ज करवा चुके हैं। निषाद जातियों की राजनीति करने वाले सभी दल वर्तमान में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलित हैं। उनकी मांग है कि निषाद समुदाय की जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए।

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