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BJP Candidate List: अवध में बीजेपी ने खेला सेफ गेम, पुराने चेहरों पर भरोसा पड़ेगा भारी...या सीटें बहुत सारी?

UP Election उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने 91 प्रत्याशियों की सूची (BJP Candidate List UP) जारी की है। इसमें पूर्वांचल (Purvanchal) और अवध क्षेत्र (Avadh) में उम्मीदवारों के नाम का ऐलान हुआ है। अवध इलाके में पुराने चेहरों पर ही बीजेपी (BJP Pratyashiyon ki list) ने फिर से मौका दिया है।

Written byसुधाकर सिंह | नवभारतटाइम्स.कॉम 2 Feb 2022, 2:09 pm

हाइलाइट्स

  • उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने 91 प्रत्याशियों की नई लिस्ट जारी की
  • इस सूची में अवध और पूर्वांचल की सीटों पर कैंडिडेट घोषित
  • अवध में ज्यादातर सिटिंग विधायकों पर जताया फिर भरोसा
  • अयोध्या, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा में अधिकतर चेहरे रिपीट
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लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) के लिए प्रत्याशियों की एक और लिस्ट (UP BJP Candidates) जारी कर दी है। इस लिस्ट में 91 प्रत्याशियों के नाम है। टिकटों के बंटवारे में अगर अवध क्षेत्र (Avadh Kshetra BJP Candidates) की सीटों को देखें तो पार्टी ने ज्यादातर पुराने चेहरों यानी सिटिंग एमएलए पर भरोसा जताया है। अयोध्या सीट (Ayodhya) पर वर्तमान विधायक वेद प्रकाश गुप्ता (Ved Prakash Gupta) को मौका दिया गया है। वहीं आस-पड़ोस के बाराबंकी, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती और अंबेडकरनगर जैसे जिलों में ज्यादातर प्रत्याशी रिपीट हैं। एक विश्लेषण...
बीजेपी ने इस वजह से ज्यादातर पुराने चेहरों को दिया टिकट
पुराने चेहरों पर भरोसा जताना बीजेपी को भारी पड़ सकता है या उसे पहले जैसी कामयाबी मिल सकती है? यूपी की राजनीति को गहरे से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस ने एनबीटी ऑनलाइन को बताया, 'चुनाव के ठीक पहले कद्दावर नेताओं के पार्टी छोड़ने से सकते में आई बीजेपी ने जोखिम उठाने से खुद को रोका। जिन क्षेत्रों में प्रदर्शन के आधार पर विधायकों के टिकट कटने का अंदेशा जताया जा रहा था, वहां दावेदारों के बीच में किसी तरह के विवाद से बचने के लिए आखिरकार सबको चुनाव लड़ने के लिए भेज दिया। इसकी एक वजह और भी रही है। अवध क्षेत्र में जो भी वर्तमान विधायक हैं वो बीजेपी के किसी न किसी खेमे से जुड़े रहे हैं। बीजेपी में जो शक्ति पुंज हैं, उनमें भी आपस में होड़ लगी थी कि हमारे प्रत्याशियों का टिकट क्यों कटे? इस वजह से भी खराब छवि वाले या बेहतर प्रदर्शन न करने वाले जिन विधायकों की लोकप्रयिता घटी थी, उनको भी टिकट वापस दे दिया है।'


बीजेपी को क्या फैक्टर परेशान कर सकता है?
क्या इस रणनीति की वजह से बीजेपी को नुकसान हो सकता है या पार्टी अच्छे प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त है? इस पर वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस आगे कहते हैं, 'चुनाव के इस नाजुक मौके पर बीजेपी अंतर्कलह भी मोल नहीं लेना चाहती थी। उससे बचना चाहती थी। इसका नुकसान यह है कि विधायकों के प्रति जो नाराजगी है और जो सत्ता विरोधी रुझान होता है, ये दोनों मिलकर बीजेपी को परेशानी में डालेंगे। अंतर्कलह से तो पार्टी बची लेकिन विधायकों के प्रति नाराजगी और आम तौर पर सरकार चलाने के बाद सत्ता विरोधी रुझान होता है, उसको थामने में बीजेपी को मशक्कत करनी पड़ेगी। इसकी भरपाई करने के लिए बीजेपी पश्चिम की तरह ही नेताओं की पूरी फौज उताकर लोगों को समझाने बुझाने और अपने पाले में बनाए रखने का प्रयास करेगी।'

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अवध की इन सीटों पर टिकट बदलने के थे आसार
कुछ ऐसी सीटें थीं, जिन पर प्रत्याशियों के खिलाफ असंतोष का फीडबैक बीजेपी के पास था लेकिन फिर भी टिकट नहीं बदले गए। इस पर वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस ने एनबीटी ऑनलाइन को बताया, 'जैसे रायबरेली की सरेनी सीट (Sareni) से धीरेंद्र बहादुर सिंह (Dhirendra Bahadur Singh) या बलरामपुर की गैंसड़ी सीट (Gainsari) से शैलेश कुमार सिंह शैलू (Shailesh Kumar Singh) को ले लीजिए या डुमरियागंज (Dumariyaganj) से 167 वोटों से जीतने वाले राघवेंद्र प्रताप सिंह (Raghvendra Pratap Singh) को ले लीजिए। ज्यादातर नाम ऐसे हैं जिनको लेकर माना जा रहा था कि इनके टिकट पर संकट के बादल हैं। लेकिन इन सबको ले लिया।'

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'लल्ला भैया बेटे के लिए मांग रहे थे टिकट, उन्हें ही उतारा'
वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस आगे कहते हैं, 'गोंडा की गौरा सीट (Gaura) से प्रभात वर्मा का उदाहरण ले लीजिए। उनके खिलाफ मनकापुर स्टेट से जुड़े कद्दावर नेता आनंद सिंह ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को चिट्ठी लिखी थी। करनैलगंज (Colonelganj) में अस्वस्थ अजय प्रताप सिंह लल्ला भैया (Ajay Pratap Singh Lalla Bhaiya) अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे थे। यहां से नए कैंडिडेट अजय कुमार सिंह (Ajay Kumar Singh) को उतारा गया है। आखिर में उनको ही टिकट दे दिया गया। बहराइच सदर (Bahraich) से अनुपमा जायसवाल (Anupma Jaiswal) को तमाम शिकायतों के बाद मंत्री पद से हटाया गया था लेकिन उनको भी टिकट दे दिया गया। कैसरगंज (Kaiserganj) से मुकुट बिहारी वर्मा (Mukut Bihari Verma) के बेटे गौरव वर्मा को टिकट दिया गया है। उनकी उम्र 75 साल हो चुकी थी, इसलिए पैमाने में फिट नहीं हो रहे थे लेकिन टिकट परिवार में ही रह गया।'

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गोंडा सदर पर प्रतीक भूषण और बलरामपुर में पलटू राम को टिकट
गोंडा और बलरामपुर जिले की सभी सीटों पर पुराने प्रत्याशी ही मैदान में हैं। गोंडा सदर सीट (Gonda Seat) से बीजेपी ने कैसरगंज सांसद और भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के बेटे प्रतीक भूषण (Prateek Bhushan Singh) को टिकट दिया है। उनका और सपा प्रत्याशी सूरज सिंह (Suraj Singh) का मुकाबला इस बार दिलचस्प होने की उम्मीद है। इसके अलावा कटरा बाजार (Katra Bazar) से बावन सिंह, मेहनौन से विनय कुमार द्विवेदी, मनकापुर (Mankapur) से रमापति शास्त्री (Ramapati Shastri) और तरबजंग (Tarabganj) से प्रेम नारायण पांडे को दोबारा टिकट मिला है। वहीं बलरामपुर जिले (Balrampur) में राज्यमंत्री पलटूराम (Palturam) को सदर सीट, तुलसीपुर (Tulsipur) से कैलाश नाथ शुक्ला (Kailash Nath Shukla) और उतरौला (Utraula) से राम प्रताप वर्मा (Ram Pratap Verma) को फिर मौका मिला है। बाराबंकी (Barabanki) की रामनगर सीट (Ramnagar) से शरद अवस्थी, रुदौली से रामचंद्र यादव और हैदरगढ़ से दिनेश रावत को फिर मौका मिला है। बहराइच की पयागपुर सीट (Payagpur) से सुभाष त्रिपाठी, मटेरा (Matera) से अरुणवीर सिंह, महसी से (Mahsi) सुरेश्वर सिंह और बलहा (Balha) से सरोज सोनकर को मौका मिला है।


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'कैंडिडेट की अलोकप्रियता भी मायने रखती है'
अयोध्या की मिल्कीपुर सीट (Milkipur) से एक बार फिर बाबा गोरखनाथ (Baba Gorakhnath), जबकि बीकापुर (Bikapur) से डॉक्टर अमित सिंह चौहान (Dr Amit Singh Chauhan) को टिकट मिला है। वहीं गोसाईंगंज सीट (Goshainganj) से इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी (Khabbu Tiwari) की पत्नी आरती तिवारी (Arti Tiwari) को मौका मिला है। खब्बू तिवारी फर्जी मार्कशीट के मामले में कोर्ट से दोषी करार दिए गए थे। हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए सुभाष राय (Subhash Rai) को अंबेडकरनगर (Ambedkarnagar) की जलालपुर (Jalalpur) सीट से टिकट दिया गया है। बीजेपी के इस दांव का नफा-नुकसान क्या है? इस पर वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस ने बताया, 'आम तौर पर विधानसभा में 33 प्रतिशत वोट पार्टी के नाम पर, 33 प्रतिशत वोट सीएम चेहरे के नाम पर और 33 प्रतिशत कैंडिडेट के नाम पर मिलता है। कैंडिडेट की अलोकप्रियता को टिकट काटने का आधार अगर नहीं बनाया जाता है तो आपको नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।'


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यूपी में 7 चरणों में मतदान, 10 मार्च को रिजल्ट
उत्तर प्रदेश में 403 सीटों पर कुल सात चरणों में मतदान होना है। पहले चरण का मतदान 10 फरवरी को होगा। पहले चरण की शुरुआत पश्चिमी यूपी से हो रही है। वहीं, दूसरे चरण का मतदान 14 फरवरी, तीसरे चरण का मतदान 20 फरवरी, चौथे चरण का मतदान 23 फरवरी, 5वें चरण का मतदान 27 फरवरी, छठे चरण का मतदान 3 मार्च और 7वें चरण का मतदान 7 मार्च को होगा। वोटों की गिनती 10 मार्च को होगी। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 312 सीटें जीती थीं। जबकि समाजवादी पार्टी को 47, बहुजन समाज पार्टी को 19 और कांग्रेस को 7 सीटें हासिल हुई थीं।
लेखक के बारे में
सुधाकर सिंह
साहिल के सुकूं से किसे इनकार है लेकिन तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है...लिखने-पढ़ने का शौक पत्रकारिता की दुनिया में खींच लाया। पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ज़िले से ताल्लुक़। पढ़ाई लखनऊ विश्वविद्यालय से और पत्रकारिता में ईटीवी से शुरुआत। सियासत को इतिहास और वर्तमान को अतीत के आईने में देखने की दिलोदिमाग़ में हसरत उठती रहती है। राजनैतिक-ऐतिहासिक शख़्सियतों और घटनाओं पर लिखने की ख़ास चाहत। डिजिटल दुनिया में राजस्थान पत्रिका से सफ़र का आग़ाज़ करने के बाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में मंज़िल का नया पड़ाव।... और पढ़ें

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