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यूपी में जीती सीटों के भी 'कांटे' दूर करने में जुटी भाजपा, लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बारे को जान लीजिए

UP BJP for Loksabha Election 2024: भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए यूपी में 80 सीटों को जीतने का लक्ष्य तय किया है। मतलब, प्रदेश की सभी सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए पार्टी को हारी सीटों के साथ-साथ जीती सीटों पर भी काम करना होगा। इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

Written byप्रेमशंकर मिश्र | नवभारत टाइम्स 2 Jun 2023, 9:04 am
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लिए भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के चुनाव में 'मिशन-80' के लक्ष्य को हासिल करना तय किया है। लक्ष्य को पाने के लिए कोशिश भी शुरू कर दी गई है। भाजपा हारी सीटों पर हालात बदलने के साथ ही जीती सीटों पर भी 'कांटें' साफ करने में जुटी हुई है। इसमें उन सीटों को खास तौर पर शामिल किया गया है जो भाजपा 2014 या 2019 में भले जीत गई, लेकिन वहां के सियासी समीकरण पार्टी के लिए कठिन हैं। 'रेड जोन' की इन सीटों को 'ग्रीन' में बदलने के लिए वहां मेहनत और रणनीति की अतिरिक्त 'खाद' डाली जा रही है। जीत की राह को आसान बनाने की कोशिश शुरू की गई है।
नवभारतटाइम्स.कॉम UP BJP Meeting


2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन ने 73 सीटें जीती थीं। 2019 में सपा-बसपा गठबंधन हुआ तो लगा कि भाजपा को कड़ी चुनौती मिलेगी। लेकिन जातीय अंकगणित 'केमिस्ट्री' में फेल हो गया। भाजपा 64 सीटें जीतने में सफल रही। वहीं दो और सीटें उसने पिछले साल हुए उपचुनाव में हासिल कर लीं। इसलिए, ऐसी सीटों पर पार्टी ने ध्यान केंद्रित किया है जहां के जमीनी समीकरणों को और सुधारना जरूरी है।

वेस्ट से लेकर 'सपा बेल्ट' तक में काम


2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बदायूं, कन्नौज व फिरोजाबाद जैसी सपा के गढ़ वाली सीटों को जीतने में सफलता हासिल की थी, जिसे वह 2014 की लहर में भी नहीं जीत पाई थी। हालांकि, सपा-बसपा गठबंधन के चलते पार्टी 2014 में वेस्ट यूपी में जीती रामपुर, मुरादाबाद, संभल, बिजनौर और नगीना की सीट हार गई थी। इसी तरह पूर्वांचल में पार्टी के हाथ से 2014 में झोली में आईं गाजीपुर, जौनपुर, लालगंज, घोसी, श्रावस्ती और आंबेडकरनगर की सीटें हाथ से निकल गई थीं।

हालांकि, पिछले साल हुए उपचुनाव में भाजपा ने न केवल रामपुर सीट दोबारा हासिल कर ली बल्कि आजमगढ़ भी अपने खाते में डाल ली। कभी फिसलने तो कभी हाथ में आने वाली इन सीटों को कमल का गढ़ बनाने पर पार्टी की विशेष नजर है। इसलिए यहां बूथवार आंकड़ों का विश्लेषण कर प्रतिकूल समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए काम हो रहा है।

मन बदलने के लिए विशेष प्रयास


यूपी भाजपा के एक शीर्ष नेता का कहना है कि 2019 में सपा-बसपा गठबंधन होने के चलते कुछ सीटों पर समीकरण हमारे खिलाफ हो गए। वहीं, कुछ सीटों पर स्थानीय गणित हमारे पक्ष में नहीं रहे। पिछले दो लोकसभा चुनाव की ऐसी सीटों को हमने 'रेड जोन' में डाला है। यहां, पार्टी ने उन कारणों की पड़ताल की है जो हमारे पांव जमाने में बाधा बन रही हैं। उनको दूर करने पर काम हो रहा है। विपक्ष के पाले में गए वोटरों से हम विशेष तौर पर संवाद कर उनकी अपेक्षाओं को समझ रहे हैं। लाभार्थी परक योजनाओं का विस्तार इन क्षेत्रों में भी खूब हुआ है और लोग इससे सहमत भी हैं।

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