14 फेरे

विक्रांत मैसी,कृति खरबंदा,गौहर खान,यामिनी दास,विनीत कुमार
Hindi, Comedy, Drama1 Hrs 52 Min
क्रिटिक रेटिंग2.5/5पाठको की रेटिंग3/5
नीरज वर्मा | नवभारतटाइम्स.कॉम 24 Jul 2021, 4:06 pm
बॉलिवुड में कॉमिडी-ड्रामा फिल्में सफलता की गारंटी मानी जाती हैं। ऐसी फिल्मों को हर ऐज ग्रुप के दर्शक पसंद करते हैं। ऐसे में अगर साथ में कॉलेज लव स्टोरी भी देखने को मिले तो फिल्म और भी इंट्रेस्टिंग हो जाती है। कॉलेज लव स्टोरी, फैमिली ड्रामा और कॉमिडी से सजी फिल्म '14 फेरे' की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। फिल्म में पहली बार विक्रांत मैसी और कृति खरबंदा की जोड़ी नजर आ रही है।

कहानी: दिल्ली के एक कॉलेज में साथ पढ़ने वाले संजय लाल सिंह (विक्रांत मैसी) और अदिति कड़वासरा (कृति खरबंदा) एक-दूसरे से प्यार करते हैं। दोनों की अच्छी नौकरी भी लग जाती है मगर दोनों के परिवार बहुत रूढ़िवादी और जातिवादी विचारों के हैं। जब संजय और अदिति शादी करने के बारे में सोचते हैं तो परेशानी यह है कि संजय तो बिहार का राजपूत है और अदिति राजस्थान के जयपुर के एक जाट परिवार की लड़की। दोनों के परिवार शादी के लिए राजी नहीं होते। अब एक-दूसरे से शादी करने के लिए दोनों दो शादियों का एक प्लान बनाते हैं। इस प्लान में खूब ट्विस्ट आते हैं। इसीलिए फिल्म का नाम '14 फेरे' रखा गया है।

रिव्यू: फिल्म की कहानी बहुत बढ़िया है और ऐसा लगता है कि यह प्रियदर्शन की कोई फिल्म का प्लॉट है। शुरू होते ही फिल्म अपना ट्रैक पकड़ लेती है मगर जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती जाती है वैसे-वैसे कहानी कमजोर होती जाती है। आपको पहले ही पता चलने लगता है कि आगे क्या होने वाला है। डायरेक्टर देवांशु सिंह ने समाज की कई समस्याओं जैसे जातिवाद, ऑनर किलिंग और दहेज को एक ही कहानी में सोशल कॉमिडी के रूप में दिखाने की कोशिश की है। उनकी कोशिश अच्छी है और फिल्म का प्लॉट भी मजबूत है। ऐसे मुद्दों पर दर्शक एक मजबूत स्क्रीनप्ले वाली फिल्म देखना चाहेंगे मगर डायरेक्टर इसमें पूरी तरह सफल नहीं हो पाते हैं। फिल्म की शुरूआत तो अच्छी होती है मगर फिल्म का अंत बेहद ढीला हो गया है। फिल्म के डायलॉग्स में भी कोई पंचलाइन नहीं है जिसकी उम्मीद की जाती है। डायलॉग्स बेदह कमजोर नजर आते हैं जो फिल्म के बाद आपको याद नहीं रहेंगे। सही मायने में कहें तो खराब स्क्रीनप्ले के कारण एक अच्छी शादी, फैमिली और कॉमिडी ड्रामा वाली फिल्म, जिसे पूरी फैमिली इंजॉय करती है, बनते-बनते रह गई।

ऐक्टिंग: विक्रांत मैसी को एक अच्छे ऐक्टर के तौर पर जाना जाता है और इस फिल्म को भी उन्होंने अपने किरदार को बखूबी निभाया है। वह अपने बिहारी लड़के के किरदार में काफी सहज दिखाई दे रहे हैं। कृति खरबंदा का स्क्रीन प्रेजेंस गजब का है और वह फिल्म में बेहद खूबसूरत लगी हैं। हालांकि ऐक्टिंग के मामले में वह विक्रांत के सामने थोड़ी कमजोर पड़ जाती हैं। फिल्म में गौहर खान का किरदार छोटा है मगर वह इसमें जंची हैं। बाकी किरदार काफी छोटे हैं और उन्होंने अपनी भूमिकाएं ठीक ठाक निभाई हैं।

क्यों देखें: फैमिली ड्रामा और शादी की फिल्में पसंद हैं तो पूरे परिवार के साथ इस साफ-सुथरी कॉमिडी फिल्म को देख सकते हैं।
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नीरज वर्मा

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