मूवी रिव्‍यू: डार्लिंग्‍स

आलिया भट्ट,विजय वर्मा,शेफाली शाह,रोशन मैथ्‍यू
Hindi, Comedy, Drama, Thriller2 Hrs 13 Min
क्रिटिक रेटिंग3.5/5पाठको की रेटिंग3.5/5
Authored byRenuka Vyavahare | नवभारतटाइम्स.कॉम 5 Aug 2022, 12:34 pm
'डार्लिंग्‍स' की कहानी
बदरू को अपने पति हमजा से बेइंतहा मोहब्‍बत है। बदरू के किरदार में आलिया भट्ट हैं और हमजा के रोल में विजय वर्मा। बदरू का प्‍यार इस कदर अंधा है कि वह रिश्‍ते में कई चीजों को अनदेखा कर रही है। उसकी मां उसे कई मौकों पर लगातार यह बताती है कि उसके साथ गलत हो रहा है और उसे इन बातों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। बदरू को लगता है की चीजें समय के साथ ठीक हो जाएंगी। लेकिन ऐसा होता नहीं है। समय के साथ उस पर ज्‍यादती बढ़ती जाती है। फिर एक वक्‍त ऐसा आता है जब हालात उसके हाथ से बाहर हो जाते हैं। फिल्‍म में Alia Bhatt की मां का किरदार Shefali Shah निभा रही हैं।

'डार्लिंग्‍स' का रिव्‍यू
'यदि आप किसी रेस्‍टोरेंट या सिनेमाघर में अकेले जा सकते हैं, तो आप जिंदगी में कुछ भी कर सकते हैं।' हालांकि, महिलाओं के साथ कई मायनों में ऐसा नहीं है। वह समाज की चुभती आंखों के बीच एक अस्थिर और जहरीले रिश्ते को भी ढोती रहती हैं। यह आश्‍चर्य से ज्‍यादा समाज की घटिया सोच का नतीजा है कि महिलाएं अपमानजनक और हिंसक वैवाहिक रिश्‍ते को अकेले रहने से ज्‍यादा सम्‍मानजनक मानती हैं। या फिर यह कि हमारा समाज उसे यह करने पर मजबूर कर देता है।

डायरेक्‍टर जसमीत के. रीन की यह पहली फिल्‍म है। राइटर परवेज शेख के साथ मिलकर उन्‍होंने इस फिल्‍म की कहानी लिखी है। वह इसके जरिए निम्न मध्यम वर्ग के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्‍थ‍िति के बीच पितृसत्ता और घरेलू हिंसा की समस्‍या को करीब से देखने की कोश‍िश करती हैं। फिल्‍म की कहानी में मुंबई का प्‍लॉट है। जहां एक तरफ अमीर लोग हैं, जिन्‍हें विशेषाधिकार मिले हुए हैं। दूसरी तरफ दो महिलाएं हैं, एक मां और दूसरी बेटी, जो नरक में भी अपना स्वर्ग ढूंढ रही है। उनके चारों ओर काले बादल मंडरा रहे हैं, लेकिन वह अपनी धूप खुद लाने के तरीके खोज लेती हैं। ये दो विपरीत परिस्थितियों में भी हंसती हैं। जो कुछ भी उनके पास है, जो भी उनके साथ होता है, उसी में खुशी ढूंढ़ लेती हैं।

डार्लिंग्‍स का ट्रेलर

बदरू के पति हमजा (Vijay Varma) को शराब पीने की लत है। वह नशे की हालत में बदरू को बुरी तरह पीटता है। बेवजह गुस्सा करता है। लेकिन फिर अगली ही सुबह बदरू एक अच्‍छी पत्‍नी की तरह उसके लिए एक आमलेट बनाती है। हमजा अपनी बीवी पर प्‍यार उड़ेलता है, उससे माफी मांगता है। बदरू भी उसे खुशी-खुशी माफ कर देती है। यह दोनों के लिए हर दिन का रूटीन बन गया है। बदरू खुद को याद दिलाती है कि आखिर उसने लव मैरेज किया है। उसका तर्क यह है कि वैवाहिक रिश्‍ते में इस तरह का दुर्व्यवहार आम है। वह खुद को यही भरोसा दिलाती रहती है। लेकिन फिर एक दिन एक दुखद घटना घटती है और उसे अपनी जिंदगी के बारे में, अपने पति के बारे में, सोचने और नए सिरे से निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

हिंसा से हिंसा होती है। लेकिन क्या बदला लेने से आप आजाद हो जाते हैं? पीड़‍ित कौन है - क्‍या वह जो लड़ता है या वह जो प्यार के नाम पर अपमान और बुरे बर्ताव के बाद भी सबकुछ को सामान्य बनाने की कोश‍िश करता है? आलिया भट्ट की डार्लिंग्‍स अपने ट्रेलर से उलट डार्क कॉमेडी या ट्विस्ट वाली सस्पेंसफुल थ्रिलर फिल्‍म नहीं है। यह एक सामान्‍य अंदाज में सीधी बात कहती है। यह फिल्म पुरुष बनाम महिला की लड़ाई पर है, जहां इनमें से एक अपने पार्टनर का शोषण करता है। उसके साथ बुरा बर्ताव करता है। कहानी का विषय और इसको लेकर राइटर-डायरेक्‍टर जो दिखाना चाहते हैं, वह दोनों ही बेहद प्रभावशाली हैं, लेकिन कहानी कहने के अंदाज और इसकी एडिटिंग में थोड़ी और मेहनत होनी चाहिए थी।

फिल्‍म का अध‍िकतर हिस्‍सा एक बड़े से चॉल के कमरे में फिल्‍माया गया है। कहानी एक सर्किल में घूमती रहती है। लिहाजा एक समय पर यह नीरस बन जाती है। क्‍लाइमेक्‍स भी विरोधाभासी है। 'डार्लिंग्स' घरेलू हिंसा के मुद्दे पर एक ऐसी केस स्टडी है, जो आपको बांधती है। हालांकि, यदि इसमें शेफाली शाह और आलिया भट्ट नहीं होतीं तो ऐसा नहीं होता। दोनों एक्‍ट्रेसेस की आंखें भी आपसे बात करती हैं। दोनों ने बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है। साथ ही उनकी आपस में केमिस्ट्री भी इतनी जबरदस्‍त है कि वो नीरस सीन्‍स में भी दम भर देती हैं। मां और बेटी के बीच का रिश्‍ता इस फिल्म को गति भी देता है और एक मूड भी सेट करता है। दिल को छू लेने वाले इमोशनल सीन्‍स हों या मुश्‍क‍िल लगने वाले दृश्य, कॉमेडी के तड़के के साथ उसे पेश क‍िया गया है।

अपने जीवन में पुरुषों से निराश होने के बावजूद, ये दोनों ही किरदार खुद को पीड़ित के रूप में देखना पसंद नहीं करते हैं। यही इस डोमेस्‍ट‍िक ड्रामा का सबसे आकर्षक पहलू है। पुरुषों के विशेषाधिकार, शारीरिक-भावनात्मक शोषण और डराने-धमकाने पर यह फिल्‍म आपका ध्‍यान खींचती है।

क्‍यों देखें- इस फिल्म को देखने के कई कारण हैं। लेकिन शेफाली शाह और आलिया भट्ट की शानदार एक्‍ट‍िंग के लिए यह फिल्‍म जरूर देखी जानी चाहिए।
लेखक के बारे में
Renuka Vyavahare
A lipstick obsessed compulsive shopper, Renuka is not spaced out when watching a good film or a good game. A film critic for The Times of India and entertainment/sports writer for Bombay Times, she likes everything British, especially Tom Hiddleston.... और पढ़ें

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