ऐपशहर

Rajkummar Rao-Patralekha Wedding: हर राजकुमारी के लिए जरूरी है ऐसा 'राजकुमार'!

राजकुमार राव और पत्रलेखा पॉल ने अपने एक दशक पुराने प्यार के रिश्ते को हाल ही में शादी के रिश्ते में तब्दील कर लिया। शादी में सिर्फ राजकुमार राव ने ही पत्रलेखा की मांग नहीं भरी, बल्कि पत्रलेखा से खुद अपने माथे पर भी सुहाग की निशानी माना जाने वाला सिंदूर लगवाया।

Authored byउपमा सिंह | Edited byशशिकांत मिश्रा | नवभारत टाइम्स 26 Nov 2021, 9:15 pm
ऐक्टर राजकुमार राव और पत्रलेखा की हाल ही में हुई शादी कई मायनों में खास रही। इसमें सबसे खास रहा, दोनों का एक दूसरे की मांग में सिंदूर भरना। आम तौर पर शादी में सिर्फ लड़की की मांग भरी जाती है, पर राज ने पति-पत्नी के रिश्ते में बराबरी की नई मिसाल कायम करते हुए भी पत्रलेखा से अपनी मांग भी भरवाई। स्त्री-पुरुष बराबरी के लिए क्यों अहम है राज का ये कदम? पढ़ें:
नवभारतटाइम्स.कॉम राजकुमार राव और पत्रलेखा
राजकुमार राव और पत्रलेखा


ऐक्टर राजकुमार राव और पत्रलेखा पॉल ने अपने एक दशक पुराने प्यार के रिश्ते को हाल ही में शादी के रिश्ते में तब्दील कर लिया। इन दोनों की शादी में बहुत सी चीजें खास रहीं और उसमें सबसे खास थे, मांग भराई के वक्त राजकुमार राव के वे चार शब्द 'तुम भी लगा दो'। दरअसल, इस शादी में सिर्फ राजकुमार ने ही पत्रलेखा की मांग नहीं भरी, बल्कि पत्रलेखा से खुद अपने माथे पर भी सुहाग की निशानी माना जाने वाला सिंदूर लगवाया। अपने भारतीय समाज में ये शायद पहली बार होगा, जहां सिर्फ पति ने पत्नी की मांग भरकर उसे जीवनसाथी नहीं चुना, बल्कि दोनों ने एक-दूसरे की मांग भरकर एक-दूजे को पति-पत्नी चुना। इसीलिए, हर कोई राज के इस कदम पर दिल हार रहा है। राज की वाहवाही होनी भी चाहिए, क्योंकि देखा जाए तो अपने यहां पारंपरिक शादियों की कई रस्में गैरबराबरी और लड़की को कमतर दिखाने वाली होती हैं। फिर वह चाहे कन्यादान और विदाई हो, जिसके मुताबिक लड़की को अपना घर-परिवार छोड़कर लड़के के घर जाना होता है या फिर सिंदूर और मंगलसूत्र पहनाना, जिसके बाद लड़की ये सुहाग की निशानी पहनकर अपने शादीशुदा होने का सर्टिफिकेट साथ लिए घूमती है, जबकि लड़कों के लिए ऐसा कोई प्रतीक नहीं गढ़ा गया। ऐसे में राज का ये छोटा सा कदम जिंदगी रूपी गाड़ी के दो पहिए माने जाने वाले पति-पत्नी की बराबरी की ओर एक बड़े और सुखद बदलाव की झलक है।


आपका पति कहलाने से बड़ी कोई खुशी नहीं
सिर्फ एक-दूसरे को सिंदूर लगाना ही नहीं, राज और पत्रलेखा ने अपनी शादी में कदम-कदम पर ये साबित किया कि इस रिश्ते में दोनों बराबर हैं। मसलन, जब राज ने पत्रलेखा को अपने घुटनों पर बैठकर प्रपोज किया, तो पत्रलेखा ने खुद भी ऐसा ही करके बराबरी का संदेश दिया। फिर, शादी की तस्वीरें शेयर करते हुए भी जहां पत्रलेखा ने राज की पत्नी होने पर खुशी जताई, तो राज ने भी लिखा कि आज मेरे लिए आपका पति कहे जाने से बड़ी कोई खुशी नहीं है पत्रलेखा। अपने समाज में कितने मर्द खुलकर अपनी पत्नी का पति कहलाने में गर्व महसूस करते हैं! पर राज हर बार अपने पार्टनर का मान बढ़ाकर ऐसे हमसफर की नजीर बन जाते हैं, जिसकी ख्वाहिश हर लड़की करेगी। कुछ साल पहले की बात लें, जब एक मीडिया पोर्टल ने राज और पत्रलेखा की तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा कि राजकुमार अपनी गर्लफ्रेंड पत्रलेखा के साथ। तब भी राज ने इसे सुधारते हुए ट्विटर पर लिखा- पत्रलेखा अपने बॉयफ्रेंड राजकुमार के साथ। इस प्रतिरोध के जरिए तब भी उन्होंने कड़ा संदेश दिया था कि पत्रलेखा की पहचान सिर्फ उनकी गर्लफ्रेंड होना नहीं है। ये एक तरह से उन्हें कमतर दिखाना है, जो कि सही नहीं है।

कब तक आंकेंगे बीवियों को कमतर
अपने पुरुष सत्तात्मक समाज में शादी के रिश्ते में पति को ऊपर रखा गया, क्योंकि उसकी भूमिका कमाने की थी। जबकि, पत्नी को दायित्व मिला, सबकी सेवा करने का। इस वजह से कहीं न कहीं ये दोनों मालिक और सेवक की भूमिका में आ गए, जबकि उन्होंने होना एक पहिए की दो बराबर धुरी था। चूंकि, बदलते वक्त के साथ अब औरतें भी काफी तादाद में नौकरीपेशा हो चुकी हैं, आत्मनिर्भर हैं, तो थोड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, फिर भी पुरानी रूढ़ियों में जकड़े लोग अब भी उन्हें कमतर ही आंकते हैं। कोई हाउसवाइफ हो, तो छूटते ही कह देंगे, तुम दिन भर करती ही क्या हो? दोनों कामकाजी हों, तो ऑफिस से भले साथ लौटकर घर आएं, पर घर आते ही चाय बनाने की जिम्मेदारी औरत की होगी। दोनों राइटर या फिल्ममेकर हों, तो झट से कह देंगे, अरे, वो तो पति लिखता है या बनाता है, बीवी का सिर्फ नाम है। अब दीपिका पादुकोण और अनुष्का शर्मा को ही लीजिए। दीपिका ने जब फिल्म छपाक प्रड्यूस की, तो एक रिपोर्टर ने उनके पति रणवीर के पैसे लगे होने की बात कर दी। तब दीपिका ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा था- 'माफ करना, लेकिन ये मेरे खुद के पैसे हैं। ये किसने बोला, ये मेरे खुद के पैसे हैं। मेरी मेहनत है ये।' इसी तरह अनुष्का शर्मा के बैनर की फिल्म फिल्लौरी में विराट कोहली के पैसे लगने की खबरें उड़ी, तब अनुष्का ने भी नाराजगी जताते हुए एक लंबा पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था- 'ऐसा करके आप ना सिर्फ मेरी मेहनत का बल्कि उन लोगों का भी अनादर कर रहे हैं जिन्होंने इस फिल्म में काम किया है। मैं अपनी फिल्मों को प्रोड्यूस करने और प्रमोट करने लिए खुद समर्थ हूं।'


निक, अभिषेक, करण, इन पतियों को सलाम

फिल्म जगत की बात करें, तो अभिषेक बच्चन, निक जोनस, रणवीर सिंह, करण सिंह ग्रोवर जैसे कई ऐसे पति हैं, जो खुलकर न सिर्फ अपनी पत्नियों की तारीफ करते हैं, बल्कि उनकी सफलताओं का जश्न भी मनाते हैं। अभिषेक कई अवॉर्ड शोज और इवेंट में पत्नी ऐश्वर्या राय को सपोर्ट करते दिखते हैं। जबकि दूसरे कई मर्द अपनी मेल ईगो के चलते ऐसा करने से हिचकिचाते हैं। इस पर अभिषेक कहते हैं, 'वह मेरी पत्नी हैं। मैं उनकी परवाह करता हूं। वह जब भी कुछ अच्छा करती हैं, मुझे खुशी होती है। यह मेरे लिए गर्व की बात होती है। मैं ऐसे मेल ईगो जैसी बातें नहीं सोचता। मैं वह करता हूं, जो मुझे लगता है कि करना चाहिए। वह अच्छा काम करती हैं, उनकी तारीफ होती है, तो मुझे अच्छा लगता है।' वहीं, करण सिंह ग्रोवर अपने हर इंटरव्यू में बिपाशा बसु की तारीफ में कसीदे पढ़ते हैं और अपनी जिंदगी में आए हर सकारात्मक बदलाव का श्रेय बिपाशा को देते हैं। रणवीर भी मौका मिलते ही दीपिका की तारीफ करने से नहीं चूकते। जबकि, निक जोनस हाल ही में एक शो में पत्नी प्रियंका चोपड़ा द्वारा रोस्ट यानी बेइज्जती किए जाने पर भी ताली बजाकर हंसते नजर आए। जबकि, शो में प्रियंका ने निक के कम सफल ऐक्टिंग करियर से लेकर उनसे कम सोशल मीडिया फॉलोअर्स होने तक पर चुटकी ली। ऐसे में, अपने मेल ईगो को किनारे रखकर अपनी पत्नी को सही मायने में हमकदम, हमसफर मानने वाले ये पति निश्चित तौर पर तारीफ के काबिल हैं।
लेखक के बारे में
उपमा सिंह
पत्रकारिता में 17 साल का अनुभव। अमर उजाला लखनऊ और दैनिक भास्कर लुधियाना से अनुभव बटोरते-बांटते नवभारत टाइम्स पहुंचीं। फिलहाल एनबीटी मुंबई में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। सिनेमा प्यार, पैशन और प्रफेशन तीनों है, तो सिनेमा और सिनेमाई हस्तियों से जुड़े विषयों पर गहरी पकड़ रखती हैं। वहीं, जेंडर इक्वॉलिटी और महिला मुद्दों पर भी धारदार कलम चलाती हैं। इसके लिए उन्हें लाडली मीडिया अवॉर्ड फॉर जेंडर सेंसिबिलिटी से भी सम्मानित किया गया है।... और पढ़ें

अगला लेख

Entertainmentकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग