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Exclusive: शेखर सुमन बोले- इंडस्ट्री में कुछ लोगों का गैंग है, सुशांत जैसे टैलेंट को खोखला बनाते हैं यह लोग

Shekhar Suman on nepotism gang and sushant singh rajput death: शेखर सुमन फिल्म इंडस्ट्री में एक ग्रुप ऐसा है, जो नए टैलंट में हीन भावना भरने का काम करता है, दिमागी रूप से उसे तोड़-मरोड़ देता है, यह मानसिकता से खेल की प्रक्रिया मौत से भी बत्तर होती है।

Authored byसंजय मिश्रा | नवभारतटाइम्स.कॉम 25 Jun 2020, 11:57 pm
बॉलिवुड स्टार सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद अभिनेता शेखर सुमन ने कई हैरान कर देने वाले खुलासे किए हैं। शेखर ने नवभारतटाइम्स ऑनलाइन के साथ लाइव चैट पर कहा कि वह सुशांत की मौत को खुद से जोड़कर अच्छी तरह देख सकते हैं। क्योंकि बेटे अध्ययन सुमन के जीवन में भी एक मोड़ ऐसा आया था जब वह सुशांत सिंह राजपूत की तरह ही डिप्रेशन में चले गए थे।
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Exclusive: शेखर सुमन बोले- इंडस्ट्री में कुछ लोगों का गैंग है, सुशांत जैसे टैलेंट को खोखला बनाते हैं यह लोग



जो सुशांत के साथ हुआ मेरे बेटे अध्धयन के साथ हो चुका है
शेखर कहते हैं, 'आज सुशांत सिंह राजपूत हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके जानें के बाद जिस तरह की बातें सामने आ रही हैं, उन्हें मैं बहुत अच्छी तरह समझ पा रहा हूं क्योंकि यह सब कुछ मेरे बेटे अध्धयन के साथ आज तक हो चुका है और आज भी हो रहा है। जिस तरह सुशांत को पहले मानसिक रूप से तोड़कर कमजोर किया गया और बाद में साइन की गई फिल्मों से एक के बाद एक करके आउट कर दिया गया... ठीक वैसे ही अध्धयन के साथ हुआ।'

सोशल-प्रफेशनल बॉयकॉट से आदमी 360 डिग्री टूट जाता है
'फिल्म इंडस्ट्री के एक खास ग्रुप द्वारा जो सोशल और प्रफेशनल बॉयकॉट होता है, वह न चाहते हुए भी एक यंग टैलंट को दिमागी रूप से बुरी तरह तोड़-मरोड़ देता है। यह बहुत ही बुरा प्रॉसेस है, एक जवान बच्चा जो आत्मविश्वास से भरा होता है, उसे हीन भावना से इस तरह भर दिया जाता है कि वह अंदर से खुद को खोखला और कमजोर समझने लगता है, वह 360 डिग्री टूट जाता है। यह प्रक्रिया मौत से भी बत्तर होती है।'

सुशांत की मौत की सीबीआई जांच हो
मुझे लगता है, सुशांत जैसा इतना दृढ़ निश्चयी और इंटेलिजेंट इंसान बिना सूइसाइड नोट छोड़े अपनी जिंदगी नहीं खत्म कर सकता है। जो हमें दिख रहा है बात इससे ज्यादा गहरी है। मैं #JusticeforSushantforum नाम से एक फोरम बना रहा हूं, जहां मैं सबसे प्रार्थना करता हूं कि सरकार पर दवाब बनाएं कि सुशांत की मौत की सीबीआई जांच हो। इस तरह का उत्पीड़न और गैंगबाजी बंद हो और माफिया का खात्मा हो। मैं आप सबका सपोर्ट मांगता हूं।'

पावरफुल लोग फिल्म इंडस्ट्री में गैंग चलाते हैं


मुझे बिल्कुल भी डर नहीं लगता जुल्म के खिलाफ आवाज उठानी ही पड़ेगी
शेखरजी बॉलिवुड के आप एकमात्र ऐक्टर हैं, जो खुलकर सुशांत की मौत की CBI जांच की मांग कर रहे हैं, आपको डर नहीं लगता कि आपके इस तरह खुलकर बोलने से आपका और आपके बेटे का करियर भी बर्बाद हो सकता है? जवाब में शेखर कहते हैं, 'मुझे बिल्कुल भी डर नहीं लगता, अगर मुझे डर लगता तो मैं इस मुहीम की शुरुआत ही नहीं करता। आदमी डर-डर कर कितना जिये। आदमी को साहस का परिचय देना ही होगा, जुल्म के खिलाफ आवाज उठानी ही पड़ेगी।

अब उनकी रंगबाजी, गुंडई और माफियागिरी चलने वाली नहीं है
'उस माफिया ( ग्रुप - नेक्सस ) ने मुझे तबाह की बहुत कोशिश की है, मेरी फिल्में, मेरा स्टेज, मेरा काम बहुत छीना गया और इसका असर मेरे बेटे पर भी हुआ, लेकिन हमें लड़ते रहना है। इस फिल्म माफिया ग्रुप को तोड़ना बहुत जरूरी है, इन लोगों को यह समझाना बहुत जरूरी है कि उनकी रंगदारी, रंगबाजी, गुंडई और माफियागिरी अब चलने वाली नहीं है क्योंकि अब जनता ने बीड़ा उठा लिया है, गलत लोगों को पहचान लिया है, अब जनता उनके खिलाफ है। इस समय जनता ने तय कर लिया है कि वह छोटे शहर से आने वाले होनहार-बिरवान कलाकार को बढ़ावा देंगे। अब यह नेक्सस किसी काम का नहीं रहेगा।'

इस मुहीम को कतई धूमिल नहीं होने दूंगा
'मैं इस मुहीम को कतई धूमिल नहीं होने दूंगा, इस मुहीम को चलते रहना होगा, अभी तो यह शुरुआत है। आज जनता को इस बाद का पश्चाताप हो रहा है कि कई सितारों की बड़ी-बड़ी गलतियों को उन्होंने माफ कर दिया था। जो भी व्यक्ति गुनहगार है, उसको सजा मिलनी चाहिए, वह सजा काटे फिर इंडस्ट्री की सजा भी मिले।'

हिन्दू-मुस्लमान भेदभाव भी जमकर होता है बॉलिवुड में
'हमारी फिल्म इंडस्ट्री बेहरहम नहीं है, यहां के कुछ लोग हैं, जो ढकोसला करते हैं, नकाब पहनकर रहते हैं, एक-दूसरे के साथ भाई-भाई होने का ढोंग करते हैं। वह कहते हैं बॉलिवुड में धर्म को लेकर, हिन्दू-मुस्लिम को लेकर किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं है। यह सब ढकोसला है, यह सब बदमाश लोग हैं, जो बनावटी-दिखावटी बातें करते हैं।'

आपकी लाश पर खड़े होकर अपनी मंजिल पर पहुंच जाएंगे
'बॉलिवुड में जो फिल्म माफिया के ग्रुप वाले हैं, यह वक्त पड़ने पर आपकी लाश पर खड़े होकर अपनी मंजिल पर पहुंच जाएंगे। एक समय की बड़ी-बड़ी हस्तियां जब ऊंचाई पर नहीं थी, तब उनकी मौत पर सन्नाटा पसरा था, कोई पहुंचा ही नहीं। बेदर्द और संगदिल है हमारी फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग। आप जब तक चल रहे हैं और जब तक उस नेक्सस ( ग्रुप ) का हिस्सा हैं, तब तक ठीक है, जैसे ही आप ढलान पर उतरे यह लोग आपको लात मारकर नीचे गिरा देंगे।'

बॉलिवुड, महाभारत जैसा परिवार, आपस में लड़ रहे हैं लोग
'बॉलिवुड में कोई परिवार वाली बात नहीं है, अगर आप इसे परिवार कहेंगे तो मैं कहूंगा, यह महाभारत का परिवार है, जहां कौरव और पांडव आपस में ही लड़ रहे हैं। यहां पैसा और नाम कमाने के लिए साम, दाम, दंड और भेद सभी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। यह बेदर्द लोगों का ग्रुप है। मुझे खुशी है कि आज जनता में आक्रोश है, इस आग को जलते रहने देना है, इसे धूमिल नहीं करना है, इस बार गुनहगारों को माफ नहीं करना है।'
लेखक के बारे में
संजय मिश्रा
"संजय मिश्रा (Sanjay Mishra Katyani) पिछले 17 सालों से फिल्म जर्नलिस्ट हैं। साल 2006 में दूरदर्शन से एक रिपोर्टर के तौर पर अपनी शुरुआत करने के बाद, लाइव इंडिया, मी मराठी, नेटवर्क 18 हिंदी, इंडिया टीवी और न्यूज़ एक्सप्रेस जैसे न्यूज़ चैनल के साथ 10 साल सक्रिय फिल्म रिपोर्टिंग की। साल 2015 में बुक माय शो के साथ जुड़कर डिजिटल/ऑनलाइन न्यूज़ की दुनिया में कदम रखा और बीबीसी हिंदी और जागरण डॉट कॉम के साथ कार्य किया। साल 2016 से टाइम्स ऑफ इंडिया परिवार, नवभारत टाइम्स डॉट कॉम का हिस्सा बन गए। एनबीटी में 2016 से प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रड्यूसर के रूप में कार्यरत। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले संजय मिश्रा का जन्म और पढ़ाई-लिखाई मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में हुई।... और पढ़ें

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