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Javed Akhtar Birthday: दिल पर मरहम की तरह हैं जावेद अख्‍तर साहब के लिखे ये 10 शेर

ग्‍वालियर में 17 जनवरी 1945 को पैदा हुए जावेद अख्‍तर साहब (Javed Akhtar Birthday) सोमवार को अपना जन्‍मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर पेश हैं, उनके लिखे 10 बेहतरीन शेर, जो आपके दिल पर भी मरहम की तरह (Javed Akhtar Shayari in Hindi) असर छोड़ जाएंगे।

Edited byएंटरटेनमेंट डेस्क | नवभारतटाइम्स.कॉम 17 Jan 2022, 11:27 am
जावेद अख्‍तर। हिंदी सिनेमा की दुनिया में यह नाम ही काफी है। दिग्गज गीतकार, बेहतरीन स्‍क्रीनप्‍ले राइटर। एक बेहद संजीदा इंसान। सुलझा हुआ व्‍यक्‍त‍ित्‍व। खरी बात बोलने वाले। बेबाक। मध्‍य प्रदेश के ग्‍वालियर में 17 जनवरी 1945 को पैदा (Javed Akhtar Birthday) हुए जावेद साहब शब्‍दों के जादूगर हैं। उनके पिता जान निसार अख्तर भी हिंदी सिनेमा के मशूर गीतकार और उर्दू कवि थे। मां सैफिया अख्तर गायिका और लेखिका थीं। जाहिर है, ऐसे परिवार में पैदा हुए जावेद अख्‍तर को कम उम्र से ही लिखने और पढ़ने का चस्‍का लगा। फिल्मों में करियर बनाने मुंबई आए तो स्‍ट्रगल किया। कभी पेड़ के नीचे सोने वाले जावेद साहब ने जिंदगी में हर धूप-छांव को जीया है। जीवन का यही अनुभव उनकी लेखनी में भी झलकता है।
नवभारतटाइम्स.कॉम Javed Akhtar Shayari
Javed Akhtar Birthday Special: 10 Best Javed Akhtar Shayari


जावेद अख्‍तर कभी फिल्‍मों में क्लैपर ब्वॉय थे। 'सरहदी लुटेरा' की शूटिंग के दौरान इंदौर के सलीम खान से मुलाकात हुई। राजेश खन्‍ना ने 'हाथी मेरे साथी' में सलीम-जावेद (Salim-Javed) को बड़ा मौका दिया। इसके आद इस जोड़ी ने स्‍क्रीनप्‍ल राइटिंग में न सिर्फ ब्‍लॉकबस्‍टर फिल्‍में दीं, बल्‍क‍ि स्‍क्रीनप्‍ले राइटर्स के नाम को फिल्‍म के पोस्‍टर पर भी जगह दिलवाई। 1982 में सलीम-जावेद की जोड़ी टूटी। जावेद साहब इसके बाद फिल्‍मों के लिए गीत लिखने लगे। 'सिलसिला' फिल्‍म से उनके रूमानी शब्‍द कानों में ऐसे घुले कि आज भी मिठास कायम है। जावेद साहब के जन्‍मदिन पर उन्‍हीं के लिखे इन 10 शायरी (Javed Akhtar Shayari) को पढ़‍िए, ये जिंदगी की नब्‍ज को पकड़ने वाली लाइनें हैं, वो जो दिल पर मरहम की तरह असर छोड़ जाएंगी-


ग़लत बातों को ख़ामोशी से सुनना, हामी भर लेना
बहुत हैं फ़ायदे इसमें मगर अच्छा नहीं लगता


बंध गई थी दिल में कुछ उम्मीद सी
ख़ैर तुम ने जो किया अच्छा किया


बहुत पहचान है आसान इसकी
अगर दुखता नहीं तो दिल नहीं है


जब आईना कोई देखो इक अजनबी देखो
कहां पे लाई है तुमको ये ज़िंदगी देखो


अब अपना कोई दोस्त कोई यार नहीं है
हैं जिसकी तरफ़, वो भी तरफ़दार नहीं है


दिल को घेरे हैं रोज़गार के ग़म
रद्दी में खो गई किताब कोई


कभी ये लगता है अब ख़त्म हो गया सब कुछ
कभी ये लगता है अब तक तो कुछ हुआ भी नहीं


तुम फ़ुज़ूल बातों का दिल पे बोझ मत लेना
हम तो ख़ैर कर लेंगे ज़िंदगी बसर तन्हा


दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं
ज़ख़्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं


तू तो मत कह हमें बुरा दुनिया
तू ने ढाला है और ढले हैं हम

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