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मुर्दाघरों में लावारिस शवों के जमा होने पर अदालत ने जताई नाराजगी

नयी दिल्ली, 30 नवंबर :भाषा: राष्ट्रीय राजधानी के मुर्दाघरों में लावारिस शवों के जमा होने से नाराज दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज कठोर शब्दों में पुलिस और अन्य हिस्सेदारों से समस्या के समाधान के साथ आने को कहा। इसमें से कुछ शव चार महीने से मुर्दाघरों में लावारिस पड़े हुए हैं।

नवभारतटाइम्स.कॉम 30 Nov 2016, 8:54 pm
नयी दिल्ली, 30 नवंबर :: राष्ट्रीय राजधानी के मुर्दाघरों में लावारिस शवों के जमा होने से नाराज दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज कठोर शब्दों में पुलिस और अन्य हिस्सेदारों से समस्या के समाधान के साथ आने को कहा। इसमें से कुछ शव चार महीने से मुर्दाघरों में लावारिस पड़े हुए हैं। न्यायमूर्ति बदर दुर्रेज अहमद और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की पीठ ने कहा, यह क्या बेतुकी बात है। क्यों नहीं आप :पुलिस: इस बारे में कुछ करते हैं। यह हैरान करने वाली बात है कि जांच अधिकारी को इसके लिए :अंतिम संस्कार के लिए: भुगतान करना पड़ता है। यह टिप्पणी तब आई है जब पीठ से कहा गया कि जांच अधिकारियों को इन लावारिस शवों का दाह संस्कार करने के लिए अपनी जेब से खर्च करना पड़ा। अदालत ने दशकों पुरानी इस प्रथा पर चिंता जताई कि इस तरह के दाह संस्कार के लिए पुलिसकर्मियों को भुगतान करना पड़ता है। पीठ ने कहा कि किसी कानून के अभाव में एकबार सभी हिस्सेदारों के प्रस्ताव के साथ आने पर अदालत इसमें हस्तक्षेप करेगी और मुर्दाघरों में पड़े शवों के निस्तारण की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए निर्देश जारी करेगी। अदालत ने यह भी कहा कि समस्या उचित व्यवस्था के अभाव की वजह से है और चूंकि केंद्र ने अलग कोरोनर्स :मृत्यु समीक्षक: अधिनियम पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया है इसलिए कानून के बनने तक वह निर्देश जारी करेगी। अदालत उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें हत्या के एक आरोपी की हिरासत में ही मौत हो गई और उसके शव के मुर्दाघर में पड़े रहने के दौरान उसकी एक आंख गायब पाई गई।

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