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Coronavirus news: स्टडी में दावा- ऐंटीबॉडी दवाएं नहीं होने देती कोरोना, संक्रमित व्यक्ति की हालत गंभीर होने से भी बचाती हैं

दवा बनाने वाली कंपनी रेजेनेरन ने 1500 से ज्यादा लोगों पर ऐंटीबॉडी ड्रग्स के कॉकटेल का क्लीनिकल ट्रायल किया है। ये लोग उसी घर में रहे जहां 4 दिनों के भीतर कोई कोरोना का मरीज पाया गया। जिन लोगों को ऐंटीबॉडी कॉकटेल का इंजेक्शन दिया गया उनके कोरोना की चपेट में आने की आशंका 81 प्रतिशत कम पाई गई।

नवभारतटाइम्स.कॉम 13 Apr 2021, 5:34 pm

हाइलाइट्स

  • अमेरिका में हुई एक स्टडी में दावा- ऐंटीबॉडी दवाएं कोरोना से दे सकती हैं सुरक्षा
  • दवा कंपनी रेजनेनॉर ने ऐंटीबॉडी दवाओं के कॉकटेल का किया है क्लीनिकल ट्रायल
  • क्लीनिकल ट्रायल में 1500 से ज्यादा लोगों ने लिया हिस्सा, दवा लेने वालों में कोरोना की आशंका 81 प्रतिशत हो गई कम
  • सोमवार को इस स्टडी के नतीजों का किया गया ऐलान, डॉक्टर मॉयरन कोहेन के नेतृत्व में हुई रिसर्च
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नई दिल्ली
पिछले करीब डेढ़ साल से कोरोना वायरस ने दुनियाभर में जैसे हाहाकार मचा रखा है। अब तक इसका कोई पुख्ता इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। अच्छी बात यह है कि कई वैक्सीनें बन चुकी हैं जो इससे सुरक्षा देती हैं लेकिन तमाम देशों में अभी वैक्सीनेशन अभियान शुरुआती दौर में है। इस बीच अमेरिका में हुई एक स्टडी उम्मीद की किरणें जगाने वाली है। दवा कंपनी रेजनेनॉर ने लैब में बनाए गए ऐंडीबॉडीज का एक ऐसा कॉकटेल तैयार किया है जो कोरोना संक्रमण से सुरक्षा देता है। इतना ही नहीं, यह कॉकटेल कोरोना के चपेट में आ गए लोगों की भी हालत गंभीर होने से बचाता है। क्लीनिकल ट्रायल के नतीजे बहुत ही उत्साह पैदा करने वाले हैं इसलिए कंपनी ने यूएस फूड ऐंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन से एहतियाती कदम के तौर पर इसके इमर्जेंसी इस्तेमाल की इजाजत मांगी है।
स्टडी के नतीजे उम्मीद जगाने वाले
इस मोनोक्लोनल ऐंटीबॉडी कॉकटेल के क्लिनिकल ट्रायल के नतीजों का ऐलान सोमवार को हुआ। मोनोक्लोनल ऐंटीबॉडी लैब में बनी वे प्रोटीन होती हैं जो हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को वायरसों से लड़ने में मदद करती हैं। स्टडी के नतीजों के मुताबिक, ऐंटीबॉडी ड्रग्स ने कोरोना मरीज के साथ रहने वाले लोगों को इस वायरस से सुरक्षा दी।

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यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना के रिसर्चर और मोनोक्लोनल ऐंटीबॉडी से जुड़े इस रिसर्च की अगुआई करने वाले डॉक्टर मॉयरन कोहेन के मुताबिक, बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें यह दवा दी जा सकती है।


क्लीनिकल ट्रायल: कोरोना मरीज के साथ घर में रहने वालों को नहीं हुआ संक्रमण
रेजनेरॉन ने 1500 से ज्यादा लोगों पर क्लीनिकल ट्रायल किया है। ये लोग उसी घर में रहे जहां 4 दिनों के भीतर कोई कोरोना का मरीज पाया गया। जिन लोगों को ऐंटीबॉडी कॉकटेल का इंजेक्शन दिया गया, उन लोगों में वैसे लोगों के मुकाबले कोरोना की चपेट में आने की आशंका 81 प्रतिशत कम हो गई जिन्हें यह इंजेक्शन नहीं दिया गया था।


वैक्सीन की तरह यह दवा भी साबित हो सकती है वरदान
मेसाचुएट्स जनरल हॉस्पिटल में संक्रामक बीमारियों के डॉक्टर राजेश गांधी ने इस स्टडी के डेटा को उम्मीद जगाने वाला बताया है। गांधी के मुताबिक, अभी तक जिन लोगों को वैक्सीन नहीं लग पाई है, उनके लिए यह इंजेक्शन बहुत काम का है।

ट्रंप जब कोरोना से बीमार हुए थे तब उन्हें भी लगा था यह इंजेक्शन
रेजनेरॉन की यह कॉकटेल दो दवाओं का मिश्रण है जो शरीर में ऐंटीबॉडीज पैदा करती हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब कोरोना से बीमार हुए थे तब उन्हें यह इंजेक्शन लगाया गया था। अमेरिका में पिछले साल नवंबर में इस दवा को कोरोना के इलाज के लिए इमर्जेंसी यूज की इजाजत मिली थी लेकिन इसे तैयार करने में लंबा वक्त लगने और इस्तेमाल में कठिनाई की वजह से तमाम हॉस्पिटल प्राथमिकता के आधार पर इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। यह एक इंट्रावेनस इंजेक्शन है यानी इसे सीधे नसों में लगाया जाता है।

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