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चैट ग्रुप से हनी ट्रैप का 'खतरा', सेना ने जवानों, अधिकारियों के लिए जारी किए निर्देश

आर्मी ने सभी जवानों और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह किसी भी इंटरनेट बेस्ड मेसेंजर, चैट या ईमेल सर्विस ग्रुप का हिस्सा नहीं बन सकते हैं। सिर्फ वन टू वन मैसेज की इजाजत है।

पूनम पाण्डे | नवभारत टाइम्स 15 Jul 2019, 6:35 pm
नई दिल्ली
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हनी ट्रैप के खतरे को देखते हुए सेना ने जवानों और अधिकारियों के लिए इंटरनेट बेस्ड मेसेंजर, चैट या ईमेल के इस्तेमाल के संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं। इस निर्देश में कहा गया है कि जवान और अधिकारी मेसेंजर, चैट या ईमेल सर्विस ग्रुप का हिस्सा नहीं बन सकते हैं। उन्हें सिर्फ वन-टू-वन मेसेज की इजाजत है। हालांकि, क्लोज ग्रुप जिसमें आर्मी में सेवारत वे लोग हैं जो एक दूसरे को बहुत अच्छे से जानते हैं उस ग्रुप का हिस्सा बना जा सकता है सूत्रों के मुताबिक, सेना के करीब 100 लोगों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है जिन पर शक है कि वह हनीट्रैप का शिकार होकर आर्मी की जानकारी को बाहर भेज रहे हैं।

जारी किए गए आदेश के मुताबिक, कोई फौजी ऐसे चैट ग्रुप का हिस्सा नहीं बन सकता जिसके मेंबर्स में सेना से बाहर के लोग भी शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि क्लोज ग्रुप जिसमें आर्मी में सेवारत वे लोग हैं जो एक दूसरे को बहुत अच्छे से जानते हैं उस ग्रुप का हिस्सा बना जा सकता है। आर्मी के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर आर्मी ने पहले से ही गाइडलाइन जारी की हुई है लेकिन युवाओं को इसके इस्तेमाल के खतरे से सचेत करने के लिए वक्त वक्त पर उनकी काउंसिलिंग भी की जाती है।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए किसी को टारगेट किया जा सकता है और हमारे दुश्मन इस काम में लगे हैं। किसी चैट ग्रुप का हिस्सा बनकर हम खुद को दुश्मन के लिए एक्सपोज करते हैं इसलिए यह निर्देश जारी किए गए हैं कि ऐसे चैट ग्रुप का हिस्सा ना बनें। पिछले हफ्ते ही कुमांऊ रेजिमेंट के एक जवान को गिरफ्तार किया गया है जिस पर शक था कि वह खुफिया जानकारी पाकिस्तान भेज रहा था। सोशल मीडिया के जरिए ही उसकी एक 'महिला' से दोस्ती हुई और फिर वह उसे फौज की खुफिया जानकारी भेजने लगा।

सूत्रों के मुताबिक, आर्मी की इंटेलिजेंस टीम आर्मी के कई ऐसे लोगों पर नजर रखे हुए हैं जिन पर जरा सा भी शक है कि वह सोशल मीडिया के जरिए जानकारी बाहर भेज रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि करीब 100 लोग ऐसे हैं जो गहन निगरानी में हैं। आर्मी के अधिकारी जहां चैट ग्रुप का हिस्सा न बनने के निर्देश को हनीट्रैप से बचने की कवायद का ही एक कदम मान रहे हैं वहीं सोशल मीडिया में ही आर्मी के कई रिटायर्ड अधिकारी इसे दूसरी नजर से देख रहे हैं। उनका कहना है कि सैनिक विकलांगता पेंशन सहित हाल ही में कुछ ऐसे फैसले हुए हैं जिनका आर्मी से रिटायर्ड लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए विरोध किया है। ऐसे में रिटायर्ड फौजियों को सेवारत फौजियों के साथ चैट ग्रुप का हिस्सा न बनने देने के लिए यह निर्देश जारी किए गए हैं।
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पूनम पाण्डे
पूनम पाण्डे नवभारत टाइम्स में असिस्टेंट एडिटर हैं। वह बीजेपी, आरएसएस और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले कवर करती हैं।... और पढ़ें

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