ऐपशहर

अयोध्या केस: देश में माहौल बनाकर मस्जिद गिराई गई ताकि हकीकत को मिटाया जा सके- मुस्लिम पक्षकार

अयोध्या केस पर आज सुप्रीम कोर्ट में 28वें दिन भी सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि माहौल बनाकर बाबरी मस्जिद को गिराया गया ताकि हकीकत को मिटाया जा सके।

राजेश चौधरी | नवभारत टाइम्स 20 Sep 2019, 11:19 pm

हाइलाइट्स

  • सुप्रीम कोर्ट में आज अयोध्या केस मामले की 28वें दिन सुनवाई हुई
  • बहस के दौरान मुस्लिम पक्षकार के वकील राजीव धवन ने कहा कि माहौल बनाकर बाबरी मस्जिद गिराई गई
  • सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबडे ने कहा कि मस्जिद में संस्कृत में लिखे शिलालेख मिले हैं
  • धवन ने कहा कि हो सकता है यह संस्मरण के तौर पर किया गया हो
सारी खबरें हाइलाइट्स में पढ़ने के लिए ऐप डाउनलोड करें
नई दिल्ली
अयोध्या के राम मंदिर बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकार के वकील ने कहा कि 1985 में न्यास बनाया गया और देश भर में कार सेवकों द्वारा आंदोलन चलाया गया और विश्व हिंदू परिषद ने आंदोलन को संगठित कर गति दी और फिर देश भर में माहौल बनाया गया और 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराया गया ताकि हकीकत को मिटाया जा सके और मंदिर बनाया जा सके। सुप्रीम कोर्ट में 28 वें दिन संवैधानिक बेंच के सामने मामले की सुनवाई हुई। अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

मुस्लिम पक्षकार के वकील राजीव धवन: बाबरनामा में इस बात का जिक्र है कि बाबरी मस्जिद बाबर ने बनवाई थी। अभिलेखों से साफ है कि मस्जिद बाबर ने बनवाई थी। हिंदू पक्षकारों ने सिर्फ गजेटियर्स का हवाला दिया था और अभिलेखों को छोड़ दिया था। अभिलेखों में साफ है कि बाबर ने ही मस्जिद बनवाई थी। जफरयाब जिलानी ने पहले ही दलील दी है कि 1855 से पहले वहां कुछ नहीं था। ( इनकी दलील का मतलब था कि राम चबूतरा उसके बाद बना है और तब से पूजा शुरू हुई है।)
पढ़ें, अयोध्या: केस में हिंदू पक्ष की पूरी दलीलें, यहां पढ़ें

राजीव धवन: जब मामले में गोपाल सिंह विशारद ने केस दाखिल की थी उस मामले में कमिश्नर की ओर से रिपोर्ट पेश की गई थी जिसमें कई शिलालेख का उल्लेख किया गया था और उसमें कहा गया था कि बाबर के कहने पर ही उसके कमांडर मीर बकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई थी। इन शिलालेखों का जिक्र विदेशी टूरिस्टों ने अपने वृतांत में किया था। इन शिलालेखों को हिंदू पक्षकार कैसे मना कर सकते हैं। खुद हिंदू पक्षकारों ने विदेशी यात्रियों के यात्रा वृतांत का जिक्र किया है ऐसे में शिलालेख को वह नहीं मना कर सकते। तमाम शिलालेख में इसका जिक्र है कि बाबर ने बाबरी मस्जिद बनवाई थी।

जस्टिस एसए बोबडे: लेकिन मस्जिद में संस्कृत में लिखे शिलालेख और अभिलेख मिले हैं।

अयोध्या: मुस्लिम पक्षकारों की अब तक की दलीलें, यहां पढ़ें

राजीव धवन:
मस्जिद हिंदुओं और मुस्लिम दोनों ही श्रमिक ने बनाए थे। ऐसे में ऐसा हो सकता है काम खत्म होने के बाद वह खुद संस्मरण के तौर पर संस्कृत में लिखकर जाते हों। लेकिन पारसी और अरबी में वहां ढांचे में अल्लाह भी लिखा हुआ था। बाबरनामा के तमाम संस्करण में कहा गया है कि कि मस्जिद बाबर ने ही बनवाया था और ढांचा में कई जगहों पर अल्लाह लिखा था।

राजीव धवन: 1985 में राम जन्मभूमि न्यास बनाया गया। फिर 1989 में केस दाखिल किया गया। फिर एक सोची समझी नीति के तहत कार सेवकों कार सेवकों का आंदोलन चलाया गया। विश्व हिंदू परिषद ने माहौल बनाया और आंदोलन को मोबाइलज किया और नतीजा ये हुआ कि 1992 में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया। बाबरी मस्जिद को गिराने के पीछे मंशा ये थी कि जो वास्तविकता है उसे खत्म किया जाए और वहां मंदिर बनाया जाए। मस्जिद गिराने का मकसद साफ है कि कोर्ट में दावे को सही साबित किया जाए और मंदिर निर्माण केलिए हकीकत को मिटाया जाए।

राजीव धवन: शूट नंबर पांच के वादी यानी रामलला की ओर से दलील दी जा रही है कि राम जन्मभूमि न्यासिक व्यक्ति हैं इसका मकसद ये है कि वहां से उन्हें न हटाया जाए। जन्मभूमि को कानूनी व्यक्ति बनाने के संदर्भ में मकसद ये है कि जन्मभूमि को कहीं और शिफ्ट नहीं किया जा सकता। भगवान विष्णु स्वयंभू हैं। वहीं यहां पर भगवान राम के स्वयंभू होने की दलील पेश की जा रही है और कहा जा रहा है कि भगवान राम सपने में आए थे और बताया कि उनका जन्मस्थान कौन सा है। ये विश्वास के लायक बातें हैं क्या?

चीफ जस्टिस:
हम अगली सुनवाई सोमवार को करेंगे और उस दिन हम एक घंटे ज्यादा यानी शाम पांच बजे तक मामले की सुनवाई करेंगे।
लेखक के बारे में
राजेश चौधरी
राजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें

अगला लेख

Indiaकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर