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प्रभावशाली होना जमानत खारिज होने का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्वोत्तर दिल्ली हिंसा मामले में में पिंजरा तोड़ अभियान की एक एक्टिविस्ट को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली जमानत को रद्द करने की दिल्ली पुलिस की मांग ठुकरा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या प्रभावशाली होना जमानत खारिज होने का आधार हो सकता है। दरअसल, दिल्ली पुलिस ने कहा था कि आरोपी प्रभावशाली है और गवाहों व साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है।

Authored byराजेश चौधरी | नवभारत टाइम्स 28 Oct 2020, 4:04 pm

हाइलाइट्स

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रभावशाली होना जमानत खारिज होने का आधार नहीं है
  • कोर्ट ने दिल्ली हिंसा की एक आरोपी को हाई कोर्ट से मिली जमानत को रद्द करने से मना किया
  • दिल्ली पुलिस की दलील थी कि आरोपी प्रभावशाली है और सबूतों व गवाहों को प्रभावित कर सकती है
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नई दिल्ली
नॉर्थ ईस्ट दिल्ली हिंसा मामले में पिंजरा तोड़ अभियान की एक्टिविस्ट देवांगना कलिता को दी गई जमानत के खिलाफ दिल्ली पुलिस की अपील सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार (पुलिस) की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति प्रभावशाली हो वह जमानत खारिज करने का आधार नहीं हो सकता।

सुप्रीम कोर्ट में अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि देवांगना प्रभावशाली हैं और गवाहों पर दबाव बना सकती हैं और साक्ष्यों को प्रभावित कर सकती हैं तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ जमानत दी गई है। कोर्ट ने सवाल किया कि कैसे साक्ष्यों को प्रभावित करेंगी। अदालत ने अर्जी खारिज कर दी।

सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार की ओर से पेश अडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि देवांगना कलिता प्रभावशाली हैं और वह गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं और साक्ष्य प्रभावित हो सकता है। ऐसे में जमानत कैंसल किया जाना चाहिए। तब सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या कोई व्यक्ति अगर प्रभावशाली है तो वह जमानत खारिज करने का आधार हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि वह (देवांगना) कैसे साक्ष्यों को प्रभावित कर सकती हैं। तब अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वह प्रभावशाली व्यक्ति हैं इसलिए साक्ष्य प्रभावित कर सकते हैं। तब कोर्ट ने कहा कि कैसे किसी का प्रभावशाली व्यक्ति होना जमानत न देने का आधार कैसे हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत ऑर्डर में दखल से मना कर दिया।

देवांगना के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कई एफआईआर दर्ज किए थे। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक सितंबर को देवांगना को जमानत दी थी जिसके खिलफ दिल्ली सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के जमानत के आदेश में दखल से इनकार कर दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक सितंबर को देवांगना को 20 हजार रुपये के मुचलने और इतनी ही राशि के जमानती पेश करने की शर्त पर जमानत दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि आरोपी सीधे और परोक्ष तौर पर किसी भी तरह से गवाहों को प्रभावित न करें। साक्ष्यों को प्रभावित न करें और कोर्ट की इजाजत के बगैर देश से बाहर न जाएं।
लेखक के बारे में
राजेश चौधरी
राजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें

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