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पीएमओ के दखल के बाद बदलाव करके इसी महीने कैबिनेट में पेश होगी मेट्रो पॉलिसी

प्रधानमंत्री कार्यालय के दखल के बाद अब बदलाव करके इसी महीने कैबिनेट में नई मेट्रो पॉलिसी पेश की जाएगी। महत्वपूर्ण...

गुलशन राय खत्री | नवभारत टाइम्स 1 Jun 2017, 11:25 pm
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम metro
सांकेतिक तस्वीर

प्रधानमंत्री कार्यालय के दखल के बाद अब बदलाव करके इसी महीने कैबिनेट में नई मेट्रो पॉलिसी पेश की जाएगी। महत्वपूर्ण है कि पीएमओ के सुझाव पर अब पॉलिसी में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह किया गया है कि जहां भी वायबेल हो, वहीं पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत ही मेट्रो प्रॉजेक्ट लांच किया जाए। अगर कहीं ऐसा लगे कि मेट्रो प्रॉजेक्ट से इतनी आमदनी नहीं होगी कि प्राइवेट कंपनी उसे चला सके तो उस शहर में मेट्रो प्रॉजेक्ट के लिए प्राइवेट प्लेयर्स को शामिल न किया जाए।

इसके अलावा अब मेट्रो प्रॉजेक्ट को मंजूरी के स्तर पर ही यह भी देखा जाएगा कि मेट्रो प्रॉजेक्ट से लैंड डेवलपमेंट करके कितना फायदा होगा। शहरी विकास मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार यह पहला मौका है, जबकि देश में अलग से मेट्रो पॉलिसी बनाई गई है। इससे पहले 2007 में नैशनल अर्बन ट्रांसपॉर्ट पॉलिसी बनी थी और उसमें ही मेट्रो को भी शामिल कर लिया गया था।

मंत्रालय के अफसरों का कहना है कि हालांकि पॉलिसी का ड्राफ्ट पहले ही तैयार हो गया था, लेकिन ऐन मौके पर पीएमओ ने इस पॉलिसी में बदलाव के लिए कुछ सुझाव दिए हैं। इन सुझावों को भी पॉलिसी के ड्राफ्ट में शामिल किया जा रहा है। शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू का कहना है कि अगले एक महीने के भीतर इस पॉलिसी को कैबिनेट में मंजूरी के लिए पेश कर दिया जाएगा।

मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक पीएमओ के सुझाव से पहले इस बात पर जोर दिया जा रहा था कि राज्य सरकारें अपने शहरों में पीपीपी पर मेट्रो प्रॉजेक्ट लाएं यानी मेट्रो में प्राइवेट कंपनियों से पैसा लगवाया जाए और वही बाद में मेट्रो को ऑपरेट भी करें, लेकिन पीएमओ ने सुझाव दिया है कि आंख मूंदकर पीपीपी पर मेट्रो प्रॉजेक्ट नहीं लाए जाने चाहिएं, क्योंकि शहरों के लिए यह पब्लिक ट्रांसपॉर्ट के रूप में एक बड़ा साधन है।

ऐसे में जहां ऐसा लगे कि प्राइवेट कंपनी को मेट्रो प्रॉजेक्ट बनाने और ऑपरेट करने से फायदा होगा, वहीं पीपीपी के जरिए प्रॉजेक्ट बनाया जाए। इसकी वजह संभवत: यह भी रही है कि देश का पहला पीपीपी मेट्रो प्रॉजेक्ट का प्रयोग दिल्ली की एयरपोर्ट लाइन पर किया गया था, जो नाकाम रहा और अब उसके लिए दिल्ली मेट्रो को भारी भरकम रकम चुकानी पड़ सकती है।

सूत्रों के मुताबिक पीएमओ ने यह भी कहा है कि पॉलिसी में इस बात को शामिल किया जाए कि मेट्रो प्रॉजेक्ट बनने से मेट्रो लाइन के आसपास जमीन की कीमत में कितनी बढ़ोतरी होगी और उसका किस तरह से फायदा लिया जा सकेगा। इस तरह से अप्रत्यक्ष रूप से मेट्रो से होने वाले फायदे का भी आकलन करने की व्यवस्था पॉलिसी में की जाए।

इसी तरह से आसपास की खाली जमीन का लांग टर्म में किस तरह से उपयोग होगा, इसे भी अब पॉलिसी में शामिल किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि मेट्रो प्रॉजेक्ट के लिए अब सिर्फ लागत और आमदनी के जरिए ही आकलन नहीं किया जाएगा बल्कि यह भी देखा जाएगा कि इससे प्रदूषण, सड़कों के रखरखाव, ऐक्सिडेंट से होने वाला नुकसान कितना कम होगा, इसका भी आकलन करके उसके बाद ही मेट्रो प्रॉजेक्ट को मंजूरी दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि इस वक्त शहरी विकास मंत्रालय के पास पटना, भोपाल, इंदौर समेत कई शहरों के मेट्रो प्रॉजेक्ट की डिटेल प्रोजे्क्ट रिपोर्ट मंजूरी के लिए आ चुकी हैं।

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