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चंद्रास्वामी का अंतिम संस्कार :नदारद रहे वीआईपी

नयी दिल्ली, 24 मई :भाषा: विवादास्पद तांत्रिक चंद्रास्वामी के पार्थिव शरीर का आज यहां निगमबोध घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया । एक समय में काफी ताकतवर रहे तांत्रिक को शांतिपूर्ण तरीके से

भाषा 24 May 2017, 3:20 pm
नयी दिल्ली, 24 मई :भाषा: विवादास्पद तांत्रिक चंद्रास्वामी के पार्थिव शरीर का आज यहां निगमबोध घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया । एक समय में काफी ताकतवर रहे तांत्रिक को शांतिपूर्ण तरीके से अंतिम विदाईर् दी गयी। चंद्रास्वामी के साथ करीबी रूप से जुड़े रहे दिवंगत प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर ,उनके भतीजे और प्रशंसकों के साथ अंतिम संस्कार में शामिल हुये। चंद्रास्वामी का कल 66 वर्ष की उम्र में दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया था। एक समय जिस ताकतवर तांत्रिक के दोस्तों में प्रधानमंत्री ,कई राज्यों के मुख्यमंत्री और कई देशों के राजा-महराजा, प्रमुख राजनेता और हॉलीवुड के कलाकारों का शुमार होता था उनके अंतिम संस्कार में आज कोई प्रमुख व्यक्ति मौजूद नहीं था । चंद्रास्वामी को दिवंगत प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव का करीबी माना जाता था और जैन आयोग ने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रचने और इसके लिए आर्थिक सहायता मुहैया कराने में उनकी कथित भूमिका की जांच की थी। चंद्रास्वामी का विवादों से चोली दामन का साथ रहा। वह इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकार में मंत्री रहे नरसिम्हा राव के करीबी थे और उनका सितारा उस वक्त बुलंदी पर जा पहुंचा जब राव प्रधानमंत्री बने। इसके तुरंत बाद चंद्रास्वामी ने दिल्ली के कुतुब इंस्टीट्यूशनल इलाके में विश्व धर्मायतन संस्थान नामक आश्रम बनाया। बताया जाता है कि आश्रम के लिए यह जमीन इंदिरा गांधी ने आवंटित की थी। चंद्रास्वामी का असली नाम नेमी चंद जैन था और उनका दावा था कि उन्होंने ब्रूनेई के सुल्तान , बहरीन के शेख ईसा बिन सलमान अल खलीफा , अभिनेत्री एलिजाबेथ टेलर ,ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गे्रट थैचर और हथियार कारोबारी अदनान खशोगी समेत कई नामचीन हस्तियों को आध्यात्मिक सलाह दी थी । उनके आश्रम पर पड़े छापे में कथित तौर पर खशोगी को लाखों डालर की अदायगी करने वाले मूल दस्तावेज बरामद हुए थे । खशोगी एक बड़े हथियार घोटाले का मुख्य दलाल था । इसके अलावा रिपोर्टो के अनुसार अपने नो नानसेंस रूख के लिए जानी जाने वाली थैचर भी उनके आध्यात्मिक प्रवचन से इतना प्रभावित हुई थीं कि उन्होंने चंद्रास्वामी के साथ 1975 में एक बैठक की थी ।

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