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चीन की 'चालबाजी' पर भारत का जवाब, कहा-अरुणाचल देश का अभिन्न हिस्सा

अरुणाचल प्रदेश के छह जगहों के नाम चीन की ओर से बदले जाने पर भारत ने कहा है कि नाम बदलने से असलियत नहीं बदल जाती है, अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग रहा है और रहेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने गुरुवार को यहां बताया कि नाम के बारे में चीन की सरकार से अभी तक कोई बातचीत नहीं हुई है।

रमेश तिवारी | नवभारत टाइम्स 20 Apr 2017, 7:10 pm
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम chinas renaming name india says arunachal pradesh is an integral part of india
चीन की 'चालबाजी' पर भारत का जवाब, कहा-अरुणाचल देश का अभिन्न हिस्सा

अरुणाचल प्रदेश के छह जगहों के नाम चीन की ओर से बदले जाने पर भारत ने कहा है कि नाम बदलने से असलियत नहीं बदल जाती है, अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग रहा है और रहेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने गुरुवार को यहां बताया कि नाम के बारे में चीन की सरकार से अभी तक कोई बातचीत नहीं हुई है। जहां तक सीमा विवाद पर इसके असर का सवाल है तो सीमा विवाद के निपटारे के लिए दोनों देशों के बीच अलग व्यवस्था बनी हुई है, जिससे उम्मीद है कि दोनों देशों के लिए स्वीकार्य हल निकलेगा। गौरतलब है कि भारत द्वारा बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा को अरुणाचल प्रदेश की यात्रा की इजाजत से भड़के चीन ने बुधवार को अपने नक्शे में अरुणाचल के 6 जगहों के नाम बदल दिए हैं।

पढ़ें: चीन की चालबाजी, अपने नक्शे में अरुणाचल के 6 नाम बदले

चीन की ओर से प्रस्तावित महत्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड प्रॉजेक्ट पर होने वाली मीटिंग के बारे में प्रवक्ता ने कहा, 'हमें मीटिंग के लिए निमंत्रण मिला है और हम इसे देख रहे हैं।' गौरतलब है कि बैठक 14 मई को पेइचिंग में होने वाली है। वन बेल्ट वन रोड के एक हिस्से चीन पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर को पाक अधिकृत कश्मीर से होकर ले जाने के प्रस्ताव के कारण भारत ने प्रॉजेक्ट का हिस्सा बनने में कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई। चीन ने कहा है कि बैठक में भारत का प्रतिनिधि होगा।
Renaming or inventing a name does not make illegally held territory legal. Arunachal Pradesh is an integral part of India: MEA on China pic.twitter.com/lWLQZr5l9q — ANI (@ANI_news) April 20, 2017 गौरतलब है कि भारत को उकसाने वाले इस कदम को चीन ने 'वैध' ठहराया है। चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘दक्षिणी तिब्बत’ बताता है। हालांकि भारत इसका विरोध करता रहा है। चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में कहा था, ‘चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने घोषणा की कि उसने केंद्रीय सरकार के नियमों के अनुरूप 14 अप्रैल को ‘दक्षिण तिब्बत’ की 6 जगहों के नाम चीनी, तिब्बती और रोमन वर्णों में मानकीकृत कर दिए हैं, जिन्हें भारत ‘अरुणाचल प्रदेश’ कहता है।’ चीन ने 6 जगहों का आधिकारिक नाम वोग्यैनलिंग, मिला री, क्वाइदेनगार्बो री, मेनक्यूका, बूमो ला और नामाकापुब री रखा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कंग ने मीडिया को जानकारी देते हुये कहा कि अरुणाचल प्रदेश में छह स्थानों के चीनी नामों का मानकीकरण ‘वैध’ कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि दलाई लामा की गतिविधियां भारत सरकार की चीन को लेकर की प्रतिबद्धता के खिलाफ है।

बता दें कि दलाई लामा की यात्रा को लेकर चीन ने पिछले एक महीने में भारत को कई बार चेतावनी दी थी। भारत ने पेइचिंग के बयान को दरकिनार करते हुए दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा का प्रबंध किया था। नई दिल्ली ने इसे धार्मिक मामला बताते हुए कहा चीन से कहा था कि इसे राजनीतिक रंग न दिया जाए। भारत और चीन की सीमा पर 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा विवाद का विषय है। चीन जहां अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत बताता है वहीं भारत का कहना है कि विवादित क्षेत्र अक्साई चिन इलाके तक है जिस पर 1962 के युद्ध के दौरान चीन ने कब्जा कर लिया था। दोनों पक्षों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिये विशेष प्रतिनिधियों की 19 दौर की वार्ता हो चुकी है।
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रमेश तिवारी

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