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चीनी सेना अपनी हरकतें छुपाने के लिए अब BeiDou का कर रही है कम इस्तेमाल, ये क्‍या है, कहां होता है यूज?

चीन के बाइडो टर्मिनल की सक्रियता में अचानक कमी देखने को मिली है। भारत को गुमराह करने के लिए शायद ऐसा किया गया है। यह अलग बात है कि भारतीय सेना ने एलएसी पर निगरानी बढ़ा दी है।

Authored byपूनम पाण्डे | Edited byअमित शुक्‍ला | नवभारतटाइम्स.कॉम 27 Oct 2021, 4:10 pm

हाइलाइट्स

  • चीन के बाइडो टर्मिनल की सक्रियता में अचानक आई कमी
  • एलएसी पर भारतीय सेना ने बढ़ा दी है निगरानी
  • सेटेलाइट, रडार, ड्रोन और ग्राउंड सेंसर से मिल रही फीड
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नवभारतटाइम्स.कॉम chna
एलएसी (अरुणाचल प्रदेश) से लौटकर
लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर चीन अपनी हरकतें छुपाने की कोशिश कर रहा है। चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अचानक से बाइडो (BeiDou) का इस्तेमाल कम कर दिया है। इंटेलिजेंस एजेंसी सूत्रों के मुताबिक, सितंबर के आखिरी हफ्ते से चीनी सेना के बाइडो टर्मिनल की सक्रियता में अचानक भारी कमी आई है।
क्‍या है BeiDou?
बाइडो चीन का नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम है। चीन का नेविगेशन सिस्‍टम सेटेलाइट्स के एक नेटवर्क का इस्‍तेमाल करता है। यह दस मीटर से कम की पोजिशनल एक्‍यूरेसी दे सकता है। चीन ने 1994 में फिशरी, कृषि, विशेष देखभाल, बड़े पैमाने पर मार्केट एप्‍लीकेशन, फॉरेस्‍ट्री और पब्लिक सिक्‍योरिटी सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपने एप्‍लीकेशन को इंटीग्रेट करने के मकसद से BeiDou की शुरुआत की थी।

चीनी सेना अपनी गतिविधियां छुपाने की भले ही कोशिश कर रही है, लेकिन भारतीय सेना ने चौतरफा निगरानी बढ़ाई है। एलएसी पर चीन की हर हरकत पर नजर रखने के लिए भारतीय सेना को लगातार सेटेलाइट, रडार, ड्रोन और ग्राउंड सेंसर से फीड मिल रहा है।

चीन की क्‍या है मंशा
ईस्टर्न सेक्टर में एलएसी पर चीनी सेना ने अपनी पेट्रोलिंग तो बढ़ाई ही है। साथ ही चीनी सेना इस कोशिश में भी है कि उसकी मूवमेंट सीक्रेट रहे। इंटेलिजेंस एजेंसी रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने पूरे एलएसी पर अपने बाइडो नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम की सक्रियता अचानक से कम की है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि चीनी सेना बाइडो सिस्टम को अब बहुत कम मौके पर इस्तेमाल कर रहा है, जैसे यह जानकारी देने के लिए कि उनके सैनिक तय लोकेशन पर पहुंच गए हैं।

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चीनी सेना ऐसा इसलिए कर रही है ताकि वह अपनी गतिविधियों को छुपा सके और एलएसी पर कैसी तैयारी कर रहा है इसे छुपाना भी चीन का मकसद है। हालांकि, भारतीय सेना लगातार चीन की हरकतों पर नजर रखे हुए है।

मुस्‍तैद है भारतीय सेना
अरुणाचल प्रदेश में हम भारतीय सेना के एक सर्विलांस सेंटर पर गए। जो एलएसी से दूर इनडेप्थ एरिया में है। इस सर्विलांस सेंटर का जिम्मा है कि जानकारी एकत्र कर और उसे इंटरप्रेट कर इसकी सूचना फील्ड पर तैनात कमांडर से लेकर हायर अथॉरिटी तक दे।

भारतीय सेना के एक अधिकारी ने बताया कि यह सर्विलांस सेंटर एक तरह से लड़ाई के मैदान का कंट्रोल हब है। इसके जरिये कमांडर को हर स्तर पर बैटल फील्ड को लेकर ट्रांसपेरेंसी मिलती है, जिससे तुरंत फैसले लेने में मदद मिलती है।

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यहां मिल रही फीड के जरिये दुश्मन के हर कदम को मॉनिटर कर सकते हैं और एक पूरी इंटेलिजेंस पिक्चर तैयार कर सकते हैं। इसके आधार पर दुश्मन का पैटर्न भी पता चलता है और फिर दुश्मन को मात देने के लिए हम उसी तरह अपना प्लान बना सकते हैं।

आ रही है हर लाइव फीड
सर्विलांस सेंटर पर एक बड़ी स्क्रीन लगी है। इसमें लगातार लाइव फीड आ रही है और यह एलएसी के दूसरी तरफ के इलाके में हरकतों को दिखा रही है। यहां सेटेलाइट इमेजरी का भी पूरा एनालिसिस हो रहा है।

दुश्मन के एक इलाके की सेटेलाइन इमेजरी देखने पर पता चल रहा है कि जिस जगह पर अभी कोई वीइकल नहीं हैं वहां कुछ दिनों पहले काफी संख्या में वीइकल थे। इससे माना जा रहा है कि उनके सैनिक ट्रेनिंग के लिए आए होंगे और अब वापस चले गए।

सेंटर में लगी दो स्क्रीन पर लगातार रडार से फीड मिल रहा है। इसके अलावा ड्रोन के जरिये भी लाइव फीड यहां पर आ रही हैं। ग्राउंड पर लगे सेंसर्स की फीड भी यहां पर मिल रही है। एलएसी पर सैनिकों की मदद के लिए भारतीय सेना तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ा रही है।
लेखक के बारे में
पूनम पाण्डे
पूनम पाण्डे नवभारत टाइम्स में असिस्टेंट एडिटर हैं। वह बीजेपी, आरएसएस और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले कवर करती हैं।... और पढ़ें

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