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पत्नी से जबरन सेक्स रेप है या नहीं? कई बार कोर्ट पहुंची बेडरूम की बात, जानिए अदालतों ने कब-कब क्या कहा

रिश्ते के आधार पर गरिमा के सवाल को कमतर नहीं किया जा सकता क्योंकि महिला तो महिला है चाहे वह अविवाहित हो या शादीशुदा। शादी के बाद पत्नी से जबरन संबंध, मैरिटल रेप अपराध की श्रेणी आएगा या नहीं इसको लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का अहम फैसला सुनाने वाला है।

Curated byपंकज सिंह | नवभारतटाइम्स.कॉम 11 May 2022, 12:29 pm
नई दिल्ली: शादी के बाद पत्नी से जबरन संबंध, मैरिटल रेप अपराध की श्रेणी (Criminalisation Of Marital Rape) में आएगा या नहीं इसको लेकर दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) आज अहम फैसला सुनाएगा। मैरिटल रेप (Marital Rape) को अपराध नहीं माना जाता है। इसको लेकर केंद्र से लेकर देश के दूसरे हाई कोर्ट की ओर से समय-समय पर टिप्पणी की जा चुकी है। इस तरह के जब भी मामले सामने आए हैं उसको लेकर राज्यों के हाई कोर्ट की ओर से टिप्पणी सामने आई है। हालांकि अलग- अलग हाई कोर्ट की ओर से अलग- अलग टिप्पणी है। ऐसे मामलों दिल्ली, कर्नाटक, केरल, छत्तीसगढ़, इलाहाबाद और अन्य हाई कोर्ट की ओर से क्या कहा गया है।
नवभारतटाइम्स.कॉम Criminalisation Of Marital Rape


विवाहित या अविवाहित होने का यह कैसा तर्क

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान कहा यह सवाल वाजिब है कि आखिर किसी महिला के विवाहित या अविवाहित होने से उसकी गरिमा कैसे प्रभावित हो सकती है। ऐसा कैसे हो सकता है कि किसी पुरुष द्वारा महिला की इच्छा के विरुद्ध उस पर खुद को लादे जाने से किसी अविवाहित महिला की गरिमा तो भंग हो, लेकिन विवाहित महिला की गरिमा अप्रभावित रहे। हाईकोर्ट ने यह सवाल मैरिटल रेप के अपराधीकरण से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान किया।

विवाहित और अविवाहित महिलाओं के सम्मान में अंतर नहीं किया जा सकता और कोई महिला विवाहित हो या न हो, उसे असहमति से बनाए जाने वाले यौन संबंध को ‘ना’ कहने का अधिकार है। महत्वपूर्ण बात यह है कि एक महिला, महिला ही होती है और उसे किसी संबंध में अलग तरीके से नहीं तौला जा सकता।
दिल्ली हाई कोर्ट


तलाक का आधार तो बनता ही है

केरल हाई कोर्ट की ओर से पिछले साल एक मामले की सुनवाई के कहा कि मैरिटल रेप (पत्नी की मर्जी के खिलाफ जाकर संबंध बनाना) तलाक का दावा करने के लिए एक मजबूत आधार है। हाई कोर्ट ने कहा कि हालांकि भारत में मैरिटल रेप के लिए सजा का प्रावधान नहीं किया गया है। लेकिन बावजूद इसके ये तलाक का आधार हो सकता है। हाई कोर्ट ने पति की अर्जी को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। पति की ओर से फैमिली के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर की गई थी, जिसमें क्रूरता के आधार पर तलाक की अनुमति दी गई थी।

पत्नी की मर्जी के खिलाफ जाकर संबंध बनाना मैरिटल रेप है। इस तरह के आचरण को दंडित नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसे शारीरिक और मानसिक क्रूरता के दायरे में मना जाएगा। ये मामला एक महिला के साथ ज्यादती को दिखाता है।
केरल हाई कोर्ट


'एक क्रूर जानवर को छुड़ाने' के लिए लाइसेंस नहीं
कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान मैरिटल रेप के बढ़ते मामलों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पति की ओर से अपनी पत्नी पर यौन हमले के गंभीर परिणाम होते हैं। इसका उस पर मनोवैज्ञानिक और शारीरिक दोनों पर प्रभाव पड़ता है। पतियों के इस तरह के कृत्य पत्नियों की आत्मा को डराते हैं। अदालत ने कहा कि विवाह को किसी विशेष पुरुष विशेषाधिकार या 'एक क्रूर जानवर को छुड़ाने' के लिए लाइसेंस प्रदान करने के लिए नहीं माना जाना चाहिए। कर्नाटक हाई कोर्ट में एक व्यक्ति की ओर से दायर याचिका में उसकी पत्नी द्वारा उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करने के बाद भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत उसके खिलाफ लंबित बलात्कार के आरोपों को छोड़ने की मांग की गई थी। कर्नाटक हाई कोर्ट ने बलात्कार के आरोप को खारिज करने से इनकार कर दिया।

पत्नी पर यौन उत्पीड़न का क्रूर कृत्य बलात्कार है। यह सदियों पुरानी सोच और परंपरा है कि पति उनके शासक हैं। विवाह किसी भी तरह से महिला को पुरुष के अधीनस्थ होने का चित्रण नहीं करता है।
कर्नाटक हाई कोर्ट


दिल्ली हाई कोर्ट की बेंच ने मैरिटल रेप याचिकाओं की सुनवाई के दौरान एक अहम टिप्पणी की। बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि क्या एक पत्नी को निचले पायदान पर रखा जा सकता है जो एक सेक्स वर्कर की तुलना में कम सशक्त हो सकता है। कोर्ट ने पूछा है कि कैसे एक विवाहित महिला को सेक्स से इनकार करने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है। जबकि, दूसरों को सहमति के बिना संबंध होने पर बलात्कार का मामला दर्ज करने का अधिकार है।

सेक्स वर्कर्स को भी अपने ग्राहकों को ना कहने का अधिकार है। जब पति की बात आती है तो एक महिला को, जो एक पत्नी भी है, इस अधिकार से कैसे दूर रखा जा सकता है?
दिल्ली हाई कोर्ट


पत्नी के साथ इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बलात्कार नहीं
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कानूनी तौर पर पत्नी के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध को बलात्कार मानने से इनकार कर दिया है। एक मामले में कोर्ट ने कानूनी तौर पर पत्नी के साथ बलपूर्वक अथवा उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाने या यौन क्रिया को बलात्कार नहीं माना। राज्य के बेमेतरा जिले के एक प्रकरण में शिकायतकर्ता पत्नी ने अपने पति पर बलात्कार और अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने का आरोप लगाया था। पति ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। पत्नी ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका विवाह जून 2017 में हुआ था। शादी के कुछ दिनों बाद उसके पति और ससुराल पक्ष ने दहेज़ की मांग करते हुए उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। उसके पति उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट भी किया करते थे। पत्नी ने यह आरोप भी लगाया कि उसके पति ने कई बार उसके साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध औरअप्राकृतिक शारीरिक संबंध बनाया था।

पति ने मैरिटल रेप केस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया... शीर्ष अदालत ने जारी किया नोट‍िस
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने कल ही मंगलवार उस याचिका पर नोटिस जारी किया है जिसमें मैरिटल रेप मामले में पति के खिलाफ चल रही कार्रवाई को खारिज करने की मांग की गई है। मैरिटल रेप मामले में पति की ओर से उसके खिलाफ दर्ज रेप केस की कार्रवाई खारिज करने की हाई कोर्ट से गुहार लगाई थी। कर्नाटक हाई कोर्ट ने महिला के पति की अर्जी खारिज कर दी जिसके बाद हाई कोर्ट के फैसले को पति ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार नोटिस जारी कर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 3 जुलाई को होगी।

15 साल से अधिक आयु की पत्नी के साथ यौन संबंध बनाना रेप नहीं
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि आईपीसी की धारा 315 में संशोधन के बाद 15 साल से अधिक आयु की पत्नी के साथ यौन संबंध बनाना रेप की श्रेणी में नहीं आता है। एक मामले की सुनवाई करते इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह बात कही।
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पंकज सिंह
नवभारत टाइम्स डिजिटल में असिस्टेंट न्यूज एडिटर। पत्रकारिता में आज समाज, ईटीवी भारत, आज तक के बाद अब टाइम्स इंटरनेट के साथ सफर जारी है। पत्रकारिता में 16 साल का अनुभव। राजनीति की खबरों के साथ ही खेल की खबरों में रुचि। लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ सीखने की कोशिश जारी है।... और पढ़ें

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