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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या से पेरारिवलन की रिहाई तक... कब क्या हुआ, जानें तारीख दर तारीख पूरी बात

AG Perarivalan News : 21 मई 1991 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी जब तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बदूर में एक चुनावी रैली को संबोधित करने मंच की तरफ से बढ़ रहे थे तभी एक महिला ने उनके गले में माला डाला और थोड़ी ही देर में वहां बम विस्फोट हो गया। घटना में महिला के साथ-साथ उस महिला के साथ पीएम गांधी भी मारे गए।

Edited byनवीन कुमार पाण्डेय | भाषा 18 May 2022, 10:43 pm
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे ए. जी. पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश जारी कर दिया। पेरारिवलन पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के केस में अपने तीन अन्य साथियों के साथ दोषी ठहराया गया था और पिछले 30 वर्षों से जेल की सजा काट रहा था। मई 1991 में एक चुनावी रैली के दौरान एक महिला ने खुद को बम से उड़ा लिया था जिसकी चपेट में आकर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांंधी की जान चली गई थी। बाद में पेरारिवलन के साथ-साथ मुरुगन, संथन और नलिनी को उम्रकैद की सजा दी गई। आइए जानते हैं 1991 में हुए हत्याकांड से लेकर 18 मई 2022 को पेरारिवलन की रिहाई तक पूरे घटनाक्रम समझें...
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राजीव गांधी के हत्यारे पेरारिवलन को सुप्रीम कोर्ट ने दी रिहाई।


21 मई, 1991 : तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी रैली में महिला आत्मघाती हमलावर के विस्फोट में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का निधन। महिला की पहचान धनु के रूप में हुई।

24 मई, 1991: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को जांच सौंपी गई।

11 जून, 1991: सीबीआई ने 19 वर्षीय ए जी पेरारिवलन को गिरफ्तार किया। उस पर आतंकवाद और विध्वंसकारी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (टाडा) के तहत मामला दर्ज किया गया।

28 जनवरी, 1998: टाडा अदालत ने पेरारिवलन समेत 26 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई।

11 मई, 1999: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने पेरारिवलन की दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखी।

8 अक्टूबर, 1999: सुप्रीम कोर्ट ने पेरारिवलन की पुनर्विचार याचिका खारिज की।

राजीव गांधी के कातिल की रिहाई, क्या है अनुच्छेद 142 जिसका सुप्रीम कोर्ट ने किया इस्तेमाल
अप्रैल, 2000:
तमिलनाडु के राज्यपाल ने राज्य सरकार की सिफारिश और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी की अपील के आधार पर नलिनी की मौत की सजा को माफ किया।

12 अगस्त, 2011: पेरारिवलन ने संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद मद्रास उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की गई।

1 मई, 2012: उच्च न्यायालय ने मामले को उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरित किया।

18 फरवरी, 2014: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र द्वारा दया याचिका पर फैसला करने में 11 साल की देरी के आधार पर पेरारिवलन की मौत की सजा को दो अन्य कैदियों -संथन और मुरुगन के साथ उम्रकैद में बदल दिया।

30 दिसंबर, 2015: पेरारिवलन ने संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत अपनी सजा माफ करने के लिए याचिका दायर की।

9 सितंबर, 2018: तमिलनाडु मंत्रिमंडल ने पेरारिवलन की रिहाई की सिफारिश करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया, जिसे राज्यपाल को भेजा गया।

25 जनवरी, 2021: तमिलनाडु के राज्यपाल ने अनुच्छेद 161 के तहत पेरारिवलन द्वारा दायर याचिका को तमिलनाडु मंत्रिमंडल द्वारा की गई सिफारिश के साथ भारत के राष्ट्रपति के पास भेजा।

9 मार्च, 2022: उच्चतम न्यायालय ने पेरारिवलन को इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जमानत पर रिहा किया कि उसने 31 साल से अधिक समय जेल में बिताया।

18 मई, 2022: उच्चतम न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्ति का इस्तेमाल करते हुए ए जी पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया।
लेखक के बारे में
नवीन कुमार पाण्डेय
नवीन कुमार पाण्डेय सितंबर 2014 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े हैं। इनकी पत्रकारीय जीवन की शुरुआत तो दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर में नामांकन के साथ ही शुरू हो गई थी, लेकिन पेशेवर पत्रकार का तमगा M3M मीडिया ग्रुप ने दिया। वहां हमार टीवी में नौकरी करने के बाद पटना चले गए और आर्यन टीवी की शुरुआती टीम में शामिल रहे। पटना से रांची का रुख हुआ। वहां झारखंड के सबसे प्रभावी न्यूज चैनल न्यूज 11 में काम किया। फिर रांची से प्रकाशित एक नए अखबार खबर मंत्र का हिस्सा रहे। वहां से दोबारा न्यूज 11 और फिर दिल्ली आगमन हुआ। अभी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन के साथ इनकी यात्रा जारी है।... और पढ़ें

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