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Farooq Abdullah: पीएजीडी में शामिल दलों के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं फारूक अब्दुल्ला

अब्दुल्ला ने कश्मीर में हालात पर बात करते हुए दावा किया कि स्थिति 90 के दशक से भी अधिक बदतर है, जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद ने सिर उठाना शुरू किया था। अब्दुल्ला ने इसका कारण बताते हुए कहा कि युवाओं को लगता है कि आधुनिक भारत में उनके लिए कोई स्थान नहीं है और वे दिल्ली में बैठी सरकार पर विश्वास खो चुके हैं।

Edited byविवेक मिश्रा | भाषा 26 Dec 2021, 9:04 pm

हाइलाइट्स

  • अब्दुल्ला ने कश्मीर में 90 दशक से भी बदतर हालात होने का दावा किया
  • कहा- कश्मीर के युवाओं को लगता है कि आधुनिक भारत में उनके लिए कोई स्थान नहीं है
  • हर मुसलमान को बार-बार यह साबित करना पड़ता है कि वह एक राष्ट्रवादी है: अब्दुल्ला
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नई दिल्ली
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी 'सांप्रदायिक शक्तियों' को हराने के लिए जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) का अगला विधानसभा चुनाव गुपकर घोषणापत्र गठबंधन (पीएजीडी) में शामिल दलों के साथ मिलकर लड़ सकती है।
अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के पांच प्रमुख राजनीतिक दलों के गठबंधन पीएजीडी के अध्यक्ष हैं। इस गठबंधन में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अलावा पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), माकपा, अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स मूवमेंट शाामिल हैं। पीएजीडी पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल करने की मांग करता है, जिसे अगस्त 2019 में समाप्त कर दिया गया था।

अब्दुल्ला ने कश्मीर में हालात पर बात करते हुए दावा किया कि स्थिति 90 के दशक से भी अधिक बदतर है, जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद ने सिर उठाना शुरू किया था। अब्दुल्ला ने इसका कारण बताते हुए कहा कि युवाओं को लगता है कि आधुनिक भारत में उनके लिए कोई स्थान नहीं है और वे दिल्ली में बैठी सरकार पर विश्वास खो चुके हैं।

हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा, 'मुझे यकीन है कि जब चुनाव आएंगे तो हम विभाजनकारी और सांप्रदायिक शक्तियों को पराजित करने के लिए एक बार फिर साथ आएंगे।'

अब्दुल्ला ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह त्रासदी है कि हर मुसलमान को, चाहे वह कश्मीर का हो या शेष भारत का, उसे बार-बार यह साबित करना पड़ता है कि वह एक राष्ट्रवादी है, वह एक भारतीय है। दूसरों के साथ ऐसा क्यों नहीं है? वे हिंदुओं से क्यों नहीं पूछते, 'क्या आप भारतीय हैं?' केवल मुसलमान ही क्यों, जिन्होंने इस देश के लिए खून दिया है और लगातार इस देश के लिए खून दे रहे हैं, हर जगह इस देश की रक्षा कर रहे हैं।'
लेखक के बारे में
विवेक मिश्रा
जन्मस्थली बाराबंकी है और कर्मस्थली तीन राज्य के कई शहर रहे हैं। 2013 में प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत की। मप्र जनसंदेश, पत्रिका, हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक जागरण होते हुए नवभारत टाइम्स के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा।... और पढ़ें

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