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हथियारों से लैस शिकारियों का लाठी के सहारे सामना कर रहे हैं वन अधिकारी: सुप्रीम कोर्ट

फॉरेस्ट ऑफिसर्स की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि हथियारों से लैस शिकारियों का मुकाबला फॉरेस्ट ऑफिसर्स केवल लाठी के सकर रहे हैं।

Authored byराजेश चौधरी | नवभारत टाइम्स 8 Jan 2021, 10:02 pm

हाइलाइट्स

  • सुप्रीम कोर्ट बोला- हथियार के कैसे वन अधिकारी शिकारियों का सामना करेंगे
  • वन अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर राज्य और केंद्र को रुख साफ करने को कहा
  • सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से 4 हफ्ते में मांग जवाब
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सांकेतिक तस्वीर
नई दिल्ली
वन अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। अदालत ने कहा है कि बिना हथियार के ये फॉरेस्ट रेंजर कैसे हथियारों से लैस शिकारियों का सामना करेंगे। वन अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों को अपना रुख स्पष्ट करने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि हमने देखा है कि कैसे कर्नाटक के जंगल में फॉरेस्ट रेंजर चप्पल पहनकर पैदल लाठी के सहारे ड्यूटी कर रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली बेंच के सामने मामले की सुनवाई के अदालत ने केंद्र और राज्यों से कहा है कि वह हथियारों से लैस शिकारियों से फॉरेस्ट रेंजर की सुरक्षा सुनिश्चित करें। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आखिर ये हथियारों से लैस शिकारियों का सामना बिना हथियार के कैसे हो सकता है। वन कर्मी कैसे बिना हथियार के शिकारियों का सामना कर पाएंगे।

अदालत ने कहा कि शहर में पुलिसकर्मियों की स्थिति अलग होती है जबकि फॉरेस्ट अधिकारियों की स्थिति बेहद अलग होती है जंगल में उनकी मदद करने वाला कई नहीं होता। विपरीत परिस्थितियों में वह किसी को बुला भी नहीं पाते। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारों को चाहिए कि वह असम मॉडल अख्तियार करे जिसके तहत वन कर्मियों को हथियार के साथ-साथ सुरक्षा कवच भी दिया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वन अधिकारियों की जान को खतरा होता है क्योंकि उन्हें असामाजिक तत्वों से जूझना होता है। ये चिंता और दुख का विषय है कि जंगल में वन अधिकारियों के पास अपनी रक्षा के लिए लाठी होती है और उसी के सहारे उसे हथियारों से लैस शिकारियों से निपटना होता है।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा है कि वह चार हफ्ते में वन अधिकारियों की सुरक्षा के मामले में रुख बताएं।

अदालत ने केंद्र और राज्यों से सुरक्षा मामले में रुख स्पष्ट करने को कहा है। अदालत ने चार हफ्ते में जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर वन अधिकारियों की सुरक्षा की गुहार लगाई गई है।
लेखक के बारे में
राजेश चौधरी
राजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें

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