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स्मार्टफोन और तंग अंग्रेजी से वैक्सीन बुकिंग में गांववालों को दिक्कत, CoWIN रजिस्ट्रेशन के लिए इनकी ले रहे मदद

CoWin Registration For Vaccine: सरकार ने कोविड-19 टीकाकरण के लिए जो ऐप बनाया है, वह सिर्फ अंग्रेजी में हैं। रजिस्‍ट्रेशन और स्‍लॉट बुक करने के लिए स्‍मार्टफोन और डिजिटल साक्षरता जरूरी है जिसका गांवों में खासा अभाव है।

Reported byKetaki Desai | टाइम्स न्यूज नेटवर्क 16 May 2021, 1:51 pm

हाइलाइट्स

  • कोरोना वैक्‍सीन पाने के लिए CoWin पर रजिस्‍ट्रेशन है जरूरी
  • ग्रामीण इलाकों में लोगों को रजिस्‍टर करने में आ रही परेशानी
  • अंग्रेजी बहुतों को समझ नहीं आती, स्‍मार्टफोन भी नहीं चला पाते
  • स्‍टूडेंट्स से लेकर किराना स्‍टोर चलाने वाले लोग कर रहे मदद
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नवभारतटाइम्स.कॉम cowin-k
CoWin पोर्टल।
नई दिल्‍ली
CoWin से जुड़ी शहरी लोगों की शिकायतें तो हमने खूब देखी-सुनी हैं। टेक-सेवी लोग कई ऐप्‍स और टेलिग्राम अलर्ट्स के लिए किसी तरह वैक्‍सीन अपॉइंटमेंट पा जा रहे हैं। इसके उलट, ग्रामीण इलाकों में वैक्‍सीनेशन के लिए CoWin के इस्‍तेमाल में खासी अड़चनें आ रही हैं। ड‍िजिटल साक्षरता नाम मात्र की है और भाषाई बंदिशों के चलते गांववालों को CoWin पर रजिस्‍टर करने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे में कुछ वांलटियर्स इन लोगों की मदद करने में जुटे हैं। गांवों में अधिकतर लोग स्‍मार्टफोन चलाना नहीं जानते, अंग्रेजी ऐप्‍स के बीच में काम की चीज खोजना उनके लिए टेढ़ी खीर है। केरल के पूर्वी मारदी में स्थिति सरकारी वोकेशनल हायर सेकेंडरी स्‍कूल के बच्‍चों का एक ग्रुप ऐसे ही लोगों की मदद कर रहा है। वे आसपास के ग्रामीणों, खासतौर से बुजुर्गों को वैक्‍सीनेशन की खातिर रजिस्‍ट्रेशन में मदद कर रहे हैं।

स्‍टूडेंट्स, किराने की दुकाने चलाने वाले कर रहे हैं मदद
मरादी में रहने वाली के. आनंदवल्‍ली सीनियर सिटीजंस कैटिगरी में आती हैं। जब उन्‍होंने इन वालंटियर्स की मदद से ऐप में अपना नाम रजिस्‍टर्ड पाया तो खुशी से फूली नहीं समाई। वो कहती हैं, "मुझे स्‍मार्टफोन चलाना नहीं आता। मैं फोन केवल कॉल करने के लिए रखती हूं। फिर ऐप भी तो अंग्रेजी में है। एक स्‍टूडेंट ने रजिस्‍टर करने में मदद की और मुझे अगले महीने का स्‍लॉट म‍िल गया है।"

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ठीक इसी तरह, ग्रामीण फिनटेक कंपनी स्‍पाइसमनी ने भी हफ्ता भर पहले देशभर में अपने 6 लाख मर्चेंट्स के नेटवर्क के जरिए लोगों को रजिस्‍टर करना शुरू किया है। ये मर्चेंट्स जिनमें अधिकतर किराना स्‍टोर चलाने वाले लोग हैं, वे पहले से ही वित्‍तीय सेवाओं के लिए ह्यूमन पॉइंट की तरह काम करते हैं। कोविड के समय में उन्‍हें कहा गया है कि वे अपने पड़ोसियों का रजिस्‍ट्रेशन कराएं। कंपनी के संस्‍थापक दिलीप मोदी कहते हैं, 'अभी इसे शुरू किए हफ्ता भर ही हुआ है लेकिन हमने 40,000 लोगों का CoWin पर रजिस्‍ट्रेशन करा दिया है।'

क्‍या दिक्‍कते हैं?
  • ऐप केवल अंग्रेजी में है।
  • स्‍मार्टफोन, ड‍िजिटल साक्षरता जरूरी है।
  • एक नंबर पर 4 लोग ही रजिस्‍टर कर सकते हैं जबकि ग्रामीण इलाकों में परिवार बड़ा होता है।
कौन मदद कर रहा है?
  • केरल में स्‍टूडेंट्स लोगों की मदद कर रहे हैं।
  • आजीविका ब्‍यूरो और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया जैसे NGOs कई राज्‍यों में काम कर रहे हैं।
  • छत्‍तीसगढ़ और झारखंड में बूथ और हेल्‍पडेस्‍क बनाए गए हैं।
  • महाराष्‍ट्र के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में रजिस्‍ट्रेशंस ऑफलाइन हो रहे हैं और फिर उन्‍हें एडमिन ऑफिशियल्‍स अपलोड करते हैं।

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रजिस्‍टर हो गए, मगर वैक्‍सीन ही नहीं
ये वालंटियर्स CoWin पर रजिस्‍टर करने में तो लोगों की मदद कर पा रहे हैं मगर वैक्‍सीन सप्‍लाई के मसले नहीं सुलझा सकते। उदाहरण के लिए ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन के करीब 100 वालंटियर्स मध्‍य प्रदेश, उत्‍तर प्रदेश और झारखंड के ग्रामीण इलाकों में लोगों को CoWin पर रजिस्‍टर कर रहे हैं। लेकिन फाउंडेशन के सीनियर मैनेजर नीरज आहूजा के अनुसार, 'हमारे युवा वालंटियर्स लोगों को रजिस्‍टर तो करा दे रहे हैं मगर समस्‍या अभी स्‍लॉट्स मिलने की है।'
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Ketaki Desai

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