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गोवा और दमन के आर्कबिशप ने कहा, खतरे में है संविधान, एक संस्कृति हो रही हावी

गोवा के आर्कबिशप फिलिप नेरी फरारो ने कैथोलिक ईसाइयों को सलाह देते हुए कहा है कि उन्हें राजनीति में 'ऐक्टिव रोल' अदा करना चाहिए। यही नहीं फरारो ने एक तरह से इशारों में मौजूदा सरकार पर अटैक करते हुए कहा कि भारतीय संविधान खतरे में है और देश पर ही एक ही संस्कृति को हावी करने का प्रयास किया जा रहा है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 5 Jun 2018, 12:42 pm
पणजी
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आर्कबिशप फिलिप नेरी फरारो

दिल्ली के आर्कबिशप की ओर से हाल ही में एक पत्र जारी किए जाने को लेकर विवाद हुआ था, अब गोवा और दमन के आर्कबिशप के बयान पर राजनीति तेज हो सकती है। गोवा के आर्कबिशप फिलिप नेरी फरारो ने कैथोलिक ईसाइयों को सलाह देते हुए कहा है कि उन्हें राजनीति में 'ऐक्टिव रोल' अदा करना चाहिए। यही नहीं फरारो ने एक तरह से इशारों में मौजूदा सरकार पर अटैक करते हुए कहा कि भारतीय संविधान खतरे में है और देश पर ही एक ही संस्कृति को हावी करने का प्रयास किया जा रहा है।

हालांकि इस बयान के सामने आने के बाद गोवा के आर्कबिशप के सेक्रटरी ने सफाई दी है। सेक्रटरी ने कहा, 'हम इस तरह का लेटर हर साल जारी करते हैं। लेकिन, इस साल 1-2 बयानों को परिप्रेक्ष्य से अलग देखते हुए मुद्दा बना दिया गया। यह पत्र हमारी वेबसाइट पर है और आप लोगों को पूरा मसला समझने के लिए इसे पढ़ना चाहिए।' गौरतलब है कि 2014 के आम चुनाव से पहले गुजरात के आर्कबिशप ने भी बीजेपी को चुनाव में हराने को लेकर अपील जारी की थी।

रविवार को जारी अपने 2018-19 के लिए सालाना संदेश में फरारो ने लिखा, 'यह कहना जरूरी हो गया है कि आस्थावान लोग सक्रिय राजनीति में हिस्सा लें। हालांकि उन्हें अपनी अंतरात्मा की आवाज के अनुसार ही काम करना चाहिए और चापलूसी की राजनीति को खत्म करना चाहिए। उन्हें लोकतंत्र को मजबूत करना चाहिए और दूसरी तरफ राज्य के प्रशासन को बेहतर करना चाहिए। सामाजिक न्याय के आदर्शों और भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग को प्राथमिकता में रखना चाहिए।'

यही नहीं बयान में विकास परियोजनाओं को लेकर लोगों के विस्थापित होने को लेकर पत्र में कहा गया, 'विकास के नाम पर लोगों को उनकी जमीन और घरों से उजाड़ा जा रहा है।' आर्कबिशप ने कहा कि मानवाधिकारों का हनन किया जा रहा है। हाल के दिनों में एक नया ट्रेंड देखा गया है कि देश में एकरूपता थोपने का प्रयास किया जा रहा है। यहां तक कि लोगों के खाने, पहनने, रहने और पूजा करने के तरीकों पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

बता दें कि इससे पहले दिल्ली के आर्कबिशप अनिल कूटो ने दिल्ली के पादरियों एवं ईसाई धार्मिक संस्थानों को लिखे पत्र में कहा था कि मौजूदा अशांत राजनीतिक मौहाल संविधान में निहित हमारे लोकतांत्रिक सिद्धांतों और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के लिए खतरा बन गया है। उन्होंने 12 मई को हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले लिखे पत्र में ईसाई धर्म के अनुयायियों से ‘प्रार्थना अभियान’ चलाने की अपील की थी। वहीं इससे पहले 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले भी गांधीनगर के आर्कबिशप थॉमस मैकवान ने एक पत्र लिखकर ईसाई समुदाय के लोगों के बेश को 'राष्ट्रवादी ताकतों' से बचाने का अनुरोध किया है। ऐसा कहते हुए उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा। उन्होंने भेदभाव न करने वाले नेताओं को विधानसभा के लिए चुने जाने की अपील की।

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