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Covid Vaccination: सरकार ने कोविशील्ड की दो डोज के बीच का गैप बढ़ाकर 12 से 16 हफ्ते किया

केंद्र सरकार ने कोविशील्ड वैक्सीन की दो डोज के बीच के गैप को 6-8 हफ्ते से बढ़ाकर 12-16 हफ्ते कर दिया है। यह फैसला राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह की सिफारिश के आधार पर किया गया है। जो लोग कोरोना से ठीक हुए हैं, वे रिकवरी के 6 महीने बाद वैक्सीन लगवा सकेंगे।

Authored byपूनम पाण्डे | नवभारत टाइम्स 13 May 2021, 6:47 pm

हाइलाइट्स

  • वैक्सीनेशन पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, कोविशील्ड की दोनों डोज के बीच का गैप बढ़ाकर 12-16 हफ्ते किया गया
  • राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकर समूह की सिफारिश पर केंद्र ने किया फैसला, पहले 6-8 हफ्ते का रखा गया था गैप
  • कोरोना से उबरने वाले लोगों को ठीक होने के 6 महीने बाद लेनी होगी वैक्सीन, रिकवरी के 6 महीने तक शरीर में रह रही एंटीबॉडी
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नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने अब कहा कि है कि अगर किसी को कोरोना संक्रमण हुआ है तो ठीक होने के 6 महीने बाद वह वैक्सीन की डोज ले सकते हैं। हालांकि पहले एक्सपर्ट्स की तरफ से कहा गया था कि कोविड से रिकवर होने के 6 से 8 हफ्तों के बीच वैक्सीन ली जा सकती है। कोविशील्ड वैक्सीन की दो डोज के बीच का गैप भी 6 से 8 हफ्ते से बढ़ाकर 12 से 16 हफ्ते कर दिया गया है। राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकर समूह (एनटीएजीआई) की सिफारिश पर यह फैसला लिया गया।
कोरोना से उबरने वालों को ठीक होने के 6 महीने बाद लगेगा टीका
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल ने कहा कि एनटीएजीआई में इस पर चर्चा हुई कि कोरोना संक्रमित होने के कितने वक्त बाद वैक्सीन ली जा सकती है। साइंटिस्ट का भी यह मानना है कि एक बार अगर संक्रमण हो जाए तो शरीर में एंटीबॉडी रहती है यानी प्रोटेक्शन रहता है। यह बातें अब और क्लियर होती जा रही हैं। पहले लंबे पीरियड का फॉलोअप नहीं था लेकिन अब साफ है कि 6 महीने का प्रोटेक्शन होता है। ऐसा डेटा आया है, देश के बाहर से भी डेटा आया है और इसी आधार पर यह कहा गया कि रिकवर होने के 6 महीने बाद टीका लगाएं। यह साइंटिफिक प्रक्रिया है, जैसे-जैसे जानकारी आती जा रही है उसी हिसाब से हम आगे बढ़ रहे हैं। यह सरकार का फैसला नहीं है, यह वैज्ञानिकों का फैसला है।

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कोविशील्ड की दो डोज के बीच गैप को बढ़ाकर 12-16 हफ्ते किया गया
इसी तरह साइंटिफिक डेटा के आधार पर कोविशील्ड की दो डोज के बीच का गैप बढ़ाया गया है। डॉ. पॉल ने कहा कि पहले दो डोज के बीच 4 से 6 हफ्ते का गैप रखने को कहा गया, यह उस वक्त के डेटा के हिसाब से था। फिर देखा गया कि गैप बढ़ाते हैं तो उसका ज्यादा फायदा होगा। यूके ने गैप बढ़ाकर 12 हफ्ते कर दिए, डब्लूएचओ ने भी यही कहा। हालांकि कई देशों ने ऐसा नहीं किया। हमारे वैज्ञानिकों की तकनीकी कमिटी ने कहा कि अगर गैप बढ़ाते हैं तो इंफेक्शन तेजी से फैलने का खतरा है। इसलिए इसे ज्यादा न बढ़ाकर 6 से 8 हफ्तों का गैप किया गया। उन्होंने कहा कि लगातार इसका रिव्यू होता रहता है। अब हमारे पास यूके का रियल लाइफ एक्सपीरियंस भी है। पहले जो बात हो रही थी वह स्टडी के आधार पर थी। लेकिन अब रियल लाइफ एक्सपीरियंस के आधार पर दो वैक्सीन के बीच का गैप 12 से 16 हफ्ते करने का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि साइंटिफिक कम्युनिटी पर भरोसा रखें।

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पता था दूसरी लहर आएगी
इस सवाल पर कि क्या वैज्ञानिक इससे अंजान थे कि कोरोना की दूसरी लहर आएगी? डॉ. पॉल ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर आएगी, यह बार बार बताया गया हालांकि दूसरे शब्दों में, क्योंकि पैनिक नहीं फैलाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि 17 मार्च को प्रधानमंत्री भी देश को उभरती दूसरी लहर के बारे में बताया था, बिना पैनिक किए। डॉ. पॉल ने कहा कि पीक का साइज क्या होगा इसका कोई अनुमान नहीं लगा पाएगा। लेकिन पीक आएगा और फिर वायरस आएगा इसका पता था।
लेखक के बारे में
पूनम पाण्डे
पूनम पाण्डे नवभारत टाइम्स में असिस्टेंट एडिटर हैं। वह बीजेपी, आरएसएस और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले कवर करती हैं।... और पढ़ें

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