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उर्दू लेखकों को करना होगा ऐलान, 'मेरा लिखा देश विरोधी नहीं'

HRD मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले नैशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू ने एक सर्कुलर जारी किया है। इसके तहत अब उर्दू लेखकों को एक फॉ़र्म भरकर ऐलान करना होगा कि उन्होंने जो लिखा है उसमें कुछ भी देश विरोधी नहीं है। NCPUL की वेबसाइट पर भी यह फॉर्म उपलब्ध कराया गया है।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 29 Apr 2016, 8:30 am
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम govertment to urdu writers refrain from anti national content
उर्दू लेखकों को करना होगा ऐलान, 'मेरा लिखा देश विरोधी नहीं'

केंद्र ने नैशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू (NCPUL) द्वारा मान्यता प्राप्त जाने-माने लेखकों के लिए एक नया सर्कुलर जारी किया है। इसमें उर्दू भाषा के लेखकों से कहा गया है कि सरकार की आलोचना करना तो ठीक है, लेकिन इसके अलावा उन्हें 'राष्ट्रहित के खिलाफ' किसी तरह की चीज लिखने से बचना चाहिए। सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि लेखकों को ऐसी कोई चीज लिखने से बचना चाहिए जिसके कारण समाज के विभिन्न समुदायों के बीच नफरत की स्थिति पैदा होने की आशंका हो। इस नए सर्कुलर को लेकर भी अच्छा-खासा विवाद खड़ा होने की आशंका है।


इस फॉर्म का लिंक NCPUL की बेवसाइट पर मौजूद है...

NCPUL की वेबसाइट पर अब एक हलफनामा भी है। लेखकों को इस पर दस्तखत करने होंगे। इस फॉर्म में लिखा है, 'किताब, सामयिक, पत्रिका और प्रॉजेक्ट में ऐसी कोई सामग्री नहीं है जो कि राष्ट्रीय हित के खिलाफ हो या फिर जो कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच किसी भी तरह की नफरत या द्वैष की भावना फैलाए।' यह शर्त उन लेखकों के लिए रखी गई है जिनकी किताबें NCPUL द्वारा स्वीकृत की गई है। मालूम हो कि NCPUL मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन एक सरकारी संगठन है। इसका काम देश में उर्दू भाषा का प्रचार-प्रसार करना है।

कुछ लेखकों का कहना है कि चूंकि NCPUL एक सरकारी संस्था है, ऐसे में यह स्वाभाविक ही है कि वह राष्ट्रीय हित के खिलाफ जाने वाली किसी किताब या सामग्री को स्वीकार नहीं करेगी। वहीं कुछ अन्य लेखकों ने कहा कि 'राष्ट्रीय हित' को ठीक-ठीक परिभाषित करना मुश्किल है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय हित की अलग-अलग लोग अलग तरीके से व्याख्या करते हैं। कुछ अन्य लेखकों ने सरकार द्वारा जारी किए गए इस सर्कुलर को 'वफादारी की घोषणा' बताया है। कई लेखकों ने इस बात पर सवाल उठाया कि आखिरकार केवल उर्दू भाषा के लेखकों से ही क्यों इस तरह के फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाया जा रहा है।


हलफनामे का लिंक NCPUL के होम पर ही दिया गया है...

अलीगढ़ में रहने वाले उर्दू भाषा के लेखक तारीक़ छातरी ने कहा कि NCPUL ने लेखकों की स्थिति 'भिखारियों' जैसी बना दी है। उन्होंने पूछा, 'एक लेखक को अपनी लिखी किताब या लेख के देश विरोधी ना होने का ऐलान क्यों करना पड़े?'

इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ें- Govertment to Urdu writers: Refrain from anti-national content

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