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दहेज के लिये हत्या के मामले में उच्च न्यायालय ने पति, ससुर को तिहाड़ जेल भेजा

नयी दिल्ली, तीन सितंबर भाषा दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक विवाहिता के कीटनाशक पी कर आत्महत्या करने के मामले में उसके पति को उम्रकैद और ससुर को 10 साल कैद की सजा सुनायी है।

भाषा 3 Sep 2017, 1:25 pm
नयी दिल्ली, तीन सितंबर भाषा दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक विवाहिता के कीटनाशक पी कर आत्महत्या करने के मामले में उसके पति को उम्रकैद और ससुर को 10 साल कैद की सजा सुनायी है। उच्च न्यायालय ने दहेज हत्या के मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए पिता-पुत्र की दोषसिद्धि और सजा को सही ठहराया। दोनों को दहेज के लिये महिला को प्रताड़ित एवं उसके साथ क््रुूर बर्ताव करने का दोषी ठहराया गया था। मई 1998 में महिला ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। न्यायमूर्त िजी एस सिस्तानी और न्यायमूर्त िसंगीता ढिंगरा सहगल की पीठ ने कहा, अभियोजन पक्ष के गवाह एक पीड़ित के भाई की गवाही के सूक्ष्म विश्लेषण से हमारा मानना है कि निचली अदालत ने दहेज हत्या के मामले में दोनों याचिकाकर्ताओं को उचित सजा सुनायी। हमारा मानना है कि गवाह एक की गवाही सही और भरोसे के लायक है और यह उस तथ्य की पुष्टि करता है कि इससे पहले भी इस तरह की मांगें दहेज संबंधी की जा चुकी हैं, यहां तक कि तीन किस्तों में 50,000 रुपये की राशि का भुगतान भी किया गया। अदालत ने पीड़ित को प्रताड़ित करने के लिये उसकी सास, देवर और ननद की दोषसिद्धि को बरकरार रखा, जबकि उन्हें दहेज के लिये हत्या के आरोप से यह कहकर मुक्त कर दिया कि गवाहों ने ऐसी किसी विशिष्ट घटना का उल्लेख नहीं किया, जिससे यह पता चलता हो कि पीड़ित की मौत से तुरंत पहले आरोपियों ने मृतक और उसके माता पिता को प्रताड़ित किया हो या उनसे दहेज की मांग की थी। निचली अदालत में सुनवाई के दौरान उन्हें पहले ही जेल की सजा सुनायी गयी थी। महिला के सुसराल पक्ष ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था। महिला के पति एवं ससुर के संबंध में उच्च न्यायालय ने कहा कि साक्ष्य से पता चलता है कि उन्होंने कारोबार के उद्देश्य से दो लाख रुपये की मांग की थी। उन्होंने जमानत पर चल रहे दोनों व्यक्तियों को तिहाड़ जेल में समर्पण करने और अपनी अपनी सजाएं पूरी करने के लिये कहा। व्यक्ति और उसके परिवार के सदस्यों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया था कि महिला को प्रताड़ित नहीं किया गया। भाषा

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