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चीन के साथ सैन्य संबंधों को मजबूत करने में लगा भारत

पहले एनएसजी में भारत की एंट्री रोकने और फिर मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने पर समर्थन न देने के बाद भी भारत चीन के साथ अपने सैन्य संबंधों को मजबूत बनाने से पीछे नहीं हटा है। आगामी 15 से 27 नवंबर के बीच दोनों देशों के पुणे (महाराष्ट्र) में 'हैंड इन हैंड' सैन्य अभ्यास होना है।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 11 Oct 2016, 7:26 am
रजत पंडित, नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम india continues to boost military ties with china
चीन के साथ सैन्य संबंधों को मजबूत करने में लगा भारत

पहले एनएसजी में भारत की एंट्री रोकने और फिर मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने पर समर्थन न देने के बाद भी भारत चीन के साथ अपने सैन्य संबंधों को मजबूत बनाने से पीछे नहीं हटा है। आगामी 15 से 27 नवंबर के बीच दोनों देशों के पुणे (महाराष्ट्र) में 'हैंड इन हैंड' सैन्य अभ्यास होना है।

सूत्रों के मुताबिक, यह हैंड इन हैंड का 6वां सत्र होगा, जिसमें हाल ही में अपग्रेड हुई तिब्बत मिलिटरी कमांड (पीपल्स लिबरेशन आर्मी की) की 170 टुकड़ियां हिस्सा लेंगी। इस साल ही भारत और चीन पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर अपनी पहली जॉइंट टैक्टिकल एक्सरसाइज को अंजाम दे चुके हैं।

यह अभ्यास सीमापार आतंकवाद से निपटने पर भी केंद्रित होगा। जहां एक तरफ चीन इस्लामिक स्टेट की घुसपैठ से परेशान है, वहीं भारत पाकिस्तान की तरफ से होने वाली। चीन ने कई महत्वपूर्ण मौकों पर भारत का साथ नहीं दिया, बल्कि साउथ एशिया में भारत की स्थिति को खराब करने के कई परोक्ष प्रयास भी किए, लेकिन फिर भी भारत लगातार चीन के साथ सैन्य अभ्यास, उच्च स्तरीय बैठकों आदि को बढ़ावा देता आ रहा है।

एलओसी और एलएसी के हालात में काफी अंतर है। जहां एक तरफ पाक के साथ साझा होने वाली एलओसी पर तनाव और फायरिंग का माहौल बना ही रहता है वहीं दूसरी ओर एलएसी पर कई दशकों से एक भी गोली नहीं चली। हालांकि, इस इलाके से चीनी सेना की घुसपैठ के मामले सामने आते रहते हैं। इस साल ऐसी 200 घटनाएं दर्ज की गई हैं। 'हैंड इन हैंड' के पहले दो सत्र 2007 और 2008 में हुए थे। इसके बाद कुछ विवादों के चलते इसे 2009-10 में बंद कर दिया गया। 2013 से फिर से इसकी शुरुआत हुई।

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