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भारत-रूस के बीच होगी न्यूक्लियर सबमरीन डील, लीज पर ली जाएगी अकुला क्लास अटैक सबमरीन चक्र III

सूत्रों ने ईटी को बताया कि इस सबमरीन लीज के लिए इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट पर 7 मार्च को दस्तखत किए जा सकते हैं और इस पनडुब्बी को साल 2025 तक तैयार कर लिया जाएगा। इसे रूस के शिपयार्ड में बनाया जाएगा, जहां पुरानी पनडुब्बियों को नई साज-सज्जा दी जाती है।

इकनॉमिक टाइम्स 4 Mar 2019, 9:58 am

हाइलाइट्स

  • भारत और रूस के बीच इस हफ्ते न्यूक्लियर सबमरीन डील पर समझौता होगा
  • तीन अरब डॉलर की इस डील में सबमरीन को भारत की जरूरतों के मुताबिक बदला जाएगा
  • इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट पर 7 मार्च को दस्तखत किए जा सकते हैं और इस पनडुब्बी को साल 2025 तक तैयार कर लिया जाएगा
  • चक्र III नाम के इस सबमरीन में न्यूक्लियर रिएक्टर होगा, चक्र III कम से कम 10 साल तक सेवा में रहेगी
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नवभारतटाइम्स.कॉम फाइल फोटो
फाइल फोटो
मनु पब्बी, नई दिल्ली
भारत एक और न्यूक्लियर अटैक सबमरीन रूस से लीज पर लेगा। तीन अरब डॉलर की इस डील पर इसी हफ्ते दस्तखत किए जा सकते हैं। इस सबमरीन को भारत की जरूरतों के मुताबिक बदला जाएगा। इसमें भारत में बनाई गई संचार प्रणाली और सेंसर लगाए जाएंगे। इन अकुला क्लास सबमरीन को चक्र III नाम दिया गया है। इससे पहले इसी तरह की दो सबमरीन भारत को रूस से मिली थीं। पिछले साल एस 400 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए रूस से 5.5 अरब के कॉन्ट्रैक्ट के बाद यह रूस के साथ सबसे बड़ी डील होगी। दुश्मन की नजरों से छिपने और प्रहार करने की क्षमता के मामले में अकुला क्लास सबमरीन से आगे केवल अमेरिकी परमाणु पनडुब्बियां ही हैं।
सूत्रों ने ईटी को बताया कि इस सबमरीन लीज के लिए इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट पर 7 मार्च को दस्तखत किए जा सकते हैं और इस पनडुब्बी को साल 2025 तक तैयार कर लिया जाएगा। इसे रूस के शिपयार्ड में बनाया जाएगा, जहां पुरानी पनडुब्बियों को नई साज-सज्जा दी जाती है।

चक्र III कम से कम 10 साल तक सेवा में रहेगी और यह चक्र II की जगह लेगी, जिसे इन्हीं शर्तों के साथ 2012 में हासिल किया गया था। माना जा रहा है कि चक्र II की 2022 में खत्म होने वाली लीज की अवधि पांच साल बढ़ाई जा सकती है। तब तक नई पनडुब्बी तैयार हो जाएगी और उसका परीक्षण कर लिया जाएगा।

चक्र III में न्यूक्लियर रिएक्टर होगा, लेकिन यह परंपरागत हथियारों से लैस होगी। इससे इस इलाके में भारत की हमला करने की क्षमता बढ़ जाएगी। ये पनडुब्बियां महीनों तक पानी के भीतर रह सकती हैं। इसके चलते इनका पता लगाना दुश्मन के लिए लगभग असंभव होता है।

निष्क्रिय कर दी गई न्यूक्लियर सबमरीन को रूस के बंदरगाह शहर सेवेरोदविंस्क में 2014 में पहुंचा दिया गया था। सूत्रों ने बताया कि तैयार होने पर यह सबमरीन नई जैसी होगी। इसे नए सिरे से बनाया जाएगा और इसके न्यूक्लियर रिएक्टर को एक्टिवेट किया जाएगा। कम्युनिकेशन से जुड़ी भारतीय प्रणालियां इस पर लगाई जाएंगी। साथ ही भारतीय इलाके को ध्यान में रखते हुए इसमें नए उपकरण लगाए जाएंगे।

इस प्रोजेक्ट से जुड़े भारतीय लोगों को ऐसी पनडुब्बियों पर काम करने की अच्छी जानकारी हो जाएगी। इससे देश में न्यूक्लियर अटैक सबमरीन प्रोग्राम पर काम करने में मदद मिलेगी, जिसे मंजूरी दी जा चुकी है। परमाणु क्षमता से लैस भारतीय पनडुब्बियों की नई श्रेणी के डिजाइन पर काम शुरू हो चुका है, लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि देश में एक शिपयार्ड में शुरू हुआ यह काम कब पूरा होगा। 1988 में आईएनएस चक्र को भारत ने रूस से तीन साल की लीज पर लिया था। दूसरी ऐसी पनडुब्बी को 2012 में लिया गया।

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