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सेना दिखाएगी स्वदेशी एडवांस हथियारों का दम, अस्त्र, रुद्रम मिसाइल से लेकर ग्लाइड बम का होगा परीक्षण

सेना की तरफ से अस्त्र-1, रुद्रम 1 और रुद्रम-2 के साथ ही स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियारों (SAAW) का भी टेस्ट किया जाएगा। यह सटीक-निर्देशित बम हैं। यह दुश्मन के रनवे, बंकर, एयरक्राफ्ट हैंगर, रडार और अन्य प्रबलित संरचनाओं को 100-किमी की दूरी पर नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Edited byअनिल कुमार | टाइम्स न्यूज नेटवर्क 7 May 2022, 9:38 pm

हाइलाइट्स

  • अस्त्र-1 और अस्त्र-2 के साथ रूद्रम-1 मिसाइल का इस महीने किया जाएगा टेस्ट
  • सुखोई, जागुआर से जैसे फाइटर प्लेन से ले जाने वाले ग्लाइड बम का भी परीक्षण
  • IAF ने पहले ही 250 अस्त्र -1 मिसाइलों के लिए एक प्रारंभिक ऑर्डर दिया है

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नई दिल्ली : भारतीय सेना में जल्द ही स्वदेशी हथियारों के ताकत देखने को मिलेगी। भारतीय सेना इस महीने स्वदेशी हथियारों का टेस्ट करने वाली है। देश से विकसित एडवांस वेपन, जिनमें हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल और एंटी रेडिएशन मिसाइल से लेकर स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार और लंबी दूरी के ग्लाइड बम शामिल हैं। डिफेंस सोर्सेज ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया है कि इस महीने में कम से कम तीन हथियारों का टेस्ट किया जाएगा।
एंटी-रेडिएशन मिसाइल रुद्रम-1 का टेस्ट
इस महीने जिन हथियारों का टेस्ट किा जाएगा उसमें अस्त्र -1 (100-किमी रेंज) ) और अस्त्र -2 (160-किमी) शामिला है। ये दोनों मिसाइल विजुअल रेंज से परे परे हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल (BVRAAMs) हैं। इसके साथ-साथ नई पीढ़ी की एंटी-रेडिएशन मिसाइल (NGARM) रुद्रम -1 का भी टेस्ट किया जाएगा। इसकी स्ट्राइक रेंज 150-किमी है।


सुखोई -30 एमकेआई फाइटर से लाइव लॉन्च
अस्त्र -2 अपने कैरिज और हैंडलिंग ट्रायल के साथ-साथ 'डमी ड्रॉप्स' को पूरा करने के बाद सुखोई -30 एमकेआई फाइटर से अपना पहला लाइव लॉन्च करेगा। अस्त्र -1, पहले से ही अपने यूज टेस्ट के सफल समापन के बाद रक्षा पीएसयू भारत डायनेमिक्स द्वारा उत्पादन किया जा रहा है। इसका पहली बार एक सुखोई जेट से मौजूदा रूसी एजीएटी के बजाय एक स्वदेशी सीकर के साथ टेस्ट किया जाएगा।

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एयरफोर्स ने दिया है 250 अस्त्र-1 का ऑर्डर
भारतीय वायुसेना ने पहले ही 250 अस्त्र -1 मिसाइलों के लिए एक शुरुआती ऑर्डर दिया है। इसे सुखोई के साथ लगाया जाएगा। अस्त्र-1 ध्वनि की गति से चार गुना अधिक उड़ान भरती है। तेजस और मिग-29 लड़ाकू विमानों के साथ अस्त्र-1 इंटीग्रेट करने का काम चल रहा है। डीआरडीओ अपनी सीमा बढ़ाने के लिए ठोस ईंधन आधारित डक्टेड रैमजेट (एसएफडीआर) प्रोपल्सन पर आधारित अस्त्र -3 का पहला टेस्ट करने की भी योजना बना रहा है। सूत्रों ने कहा कि इस साल के अंत तक इसकी क्षमता को बढ़ाकर 350 किमी तक कर दिया जाएगा।

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सुपरसोनिक फाइटर प्लेन को नष्ट करने में सक्षम
सभी मौसम में दिन और रात में प्रभावी अस्त्र सिरीज की मिसाइल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह अत्यधिक फुर्तीले सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों का पता लगाने, ट्रैक करने और नष्ट करने में सक्षम है। यह मिसाइल महंगे रूसी, फ्रेंच और इज़राइली BVRAAMs की जगह लेगी। वर्तमान में एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों के लिए इन्हें आयात किया जाता है। इस महीने एक और परीक्षण रुद्रम -1 NGARM का होगा। इसे लड़ाकू जेट से दागा जाएगा। इसे 150 किलोमीटर की दूरी पर दुश्मन की निगरानी, संचार और रडार के विभिन्न लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

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रुद्रम-2 को डेवलप कर रहा है डीआरडीओ
डीआरडीओ रुद्रम -2 (350 किमी रेंज) और रुद्रम -3 (550 किमी) हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल भी विकसित कर रहा है। इसमें अंतिम हमले के लिए निष्क्रिय होमिंग हेड के साथ INS-GPS नेविगेशन भी है। रक्षा सोर्सेज ने बताया कि रुद्रम-2 का परीक्षण भी जल्द शुरू होना चाहिए। रुद्रम मिसाइलों को दुश्मन की वायु रक्षा (एसईएडी) को लंबी दूरी की रेंज से कमजोर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है ताकि भारतीय वायुसेना के हमलावर विमान बिना किसी बाधा के अपने बमबारी मिशन को अंजाम दे सकें।


स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियारों का टेस्ट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियारों (SAAW) के टेस्ट भी होगा। यह प्रिसीजन गाइडेड बम है। यह दुश्मन के रनवे, बंकर, एयरक्राफ्ट हैंगर, रडार और अन्य प्रबलित संरचनाओं को 100-किमी की दूरी पर नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ये 125 किलोग्राम के ग्लाइड बम हैं। ये सैटेलाइन नेविगेशन या इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इमेजिंग इन्फ्रा-रेड सीकर (ईओआईआईआर) के दो कन्फिगरेशन पर बेस्ड हैं। इन्हें सुखोई या जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों में रैक पर रखा जाता है। एक सुखोई 32 ऐसे बम ले जा सकता है। वहीं, 80 किलोमीटर की मारक क्षमता वाले 1000 किलो भारी क्षमता वाले ग्लाइड बम भी विकसित किए जा रहे हैं।
लेखक के बारे में
अनिल कुमार
अनिल पिछले एक दशक से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। दैनिक जागरण चंडीगढ़ से 2009 में रिपोर्टिंग से शुरू हुआ सफर, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला, जनसत्ता.कॉम होते हुए नवभारतटाइम्स.कॉम तक पहुंच चुका है। मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं लेकिन पढ़ाई-लिखाई दिल्ली से हुई है। स्पोर्ट्स और एजुकेशन रिपोर्टिंग के साथ ही सेंट्रल डेस्क पर भी काम करने का अनुभव है। राजनीति, खेल के साथ ही विदेश की खबरों में खास रुचि है।... और पढ़ें

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