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लगा होगा कोविड में फंसा भारत एलएसी पर जवाब नहीं दे पाएगा, हमारा जवाब दुनिया ने देखा... जयशंकर ने चीन को फिर लगाई लताड़

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एलएसी को बदलने की हिमाकत करने पर चीन की फिर से खिंचाई की। उन्होंने कहा कि गलवान से लेकर तवांग तक भारत ने चीन के दुस्साहसों का भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया जिसे दुनिया ने देखा। उन्होंने कहा कि भारत ने वैश्विक मंचों पर अपना रुख बदल दिया है।

Edited byनवीन कुमार पाण्डेय | एएनआई 16 Jan 2023, 12:00 pm

हाइलाइट्स

  • चीन को दुस्साहस पर भारत की कड़ी और ठोस प्रतिक्रिया को दुनिया ने देखा: जयशंकर
  • विदेश मंत्री बोले- गलवान गतिरोध के दौरान भारत की प्रतिक्रिया मजबूत और दृढ़ थी
  • एस. जयशंकर ने कहा कि भारत के बिना एशियाई देशों को जोड़ने की कल्पना बेमानी है
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नवभारतटाइम्स.कॉम Jaishankar on china
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन को फिर सुनाया।
नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वास्विक नियंत्रण रेखा (LAC) की स्थिति एकतरफा बदलने की कोशिशों के लिए चीन को फिर से लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा कि चीन को लगा था कि जब दुनिया कोविड के कोहराम में उलझी होगी, तब भारत भी उसकी हिमाकत का उचित जवाब नहीं दे पाएगा, लेकिन दुनिया ने हमारी प्रतिक्रिया देख ली। जयशंकर ने कहा, 'मई 2020 में गलवान गतिरोध के दौरान एलएसी पर यथास्थिति बदलने की चीन की कोशिश पर भारत की जवाबी प्रतिक्रिया काफी मजबूत और दृढ़ थी।' उन्होंने याद दिलाया कि उस समय कोरोना वायरस से फैली महामारी की भी चुनौती थी, बावजूद इसके भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। यहां तक कि पिछले महीने अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में सीमा पर संघर्ष के दौरान भारत की जवाबी प्रतिक्रिया मजबूत रही।

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को चेन्नई में तमिल साप्ताहिक समाचार पत्रिका तुगलक के 53वें वार्षिक दिवस समारोह के संबोधन में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि चीन भारत की उत्तरी सीमाओं पर बड़ी ताकतों को जुटाकर यथास्थिति को बदलने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय सेना बेहद कठोर मौसमी हालात में भी सीमाओं की रक्षा करता रहता है। जयशंकर ने कहा कि दुनिया ने चीन के दुस्साहस पर भारत का मुंहतोड़ जवाब देखा है और समझ गई है कि भारत को मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अब सबको पता चल गया है कि भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जो किया जाना चाहिए वह करेगा।

हिंद महासागर की तुलना में भारत की भू-रणनीतिक स्थिति (Geo-Strategic Situation) पर प्रकाश डालते हुए जयशंकर ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में महासागर और भी अधिक भू-राजनीतिक महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं। इसके महत्व का स्तर इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत अपने पोजिशन का कितना अच्छा उपयोग करता है।

जयशंकर ने कहा, 'जहां तक भारत की बात है तो हमारे भूगोल ने इतिहास की प्रासंगिकता और भी बढ़ा दी है। भारतीय प्रायद्वीप का हिंद महासागर में काफी केंद्रीय भूमिका है और इसका महाद्विपीय आयाम भी है। हमारी सक्रिय भागीदारी के बिना पूरे एशिया को जोड़ने की कोई भी पहल धरातल पर उतर नहीं सकती है। आज हिंद महासागर का भू-राजनीतिक महत्व (Geo-political Significance) और भी बढ़ा है। भारत अपनी स्थिति का कितना बेहतर उपयोग कर पाता है, इस पर दुनिया में उसकी प्रासंगिकता तय होगी। भारत जितना ज्यादा अपना प्रभाव छोड़ेगा और विभिन्न मचों पर अपनी भागीदारी बढ़ाएगा, विश्व में इसका कद उतना ही ऊंचा होगा।'

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जयशंकर ने एलएसी पर एकतरफा स्थिति बदलने की हिमाकत पर चीन की पहले भी कई बार खिंचाई कर चुके हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, 'भारत और चीन के बीच समझौता है कि कोई भी पक्ष एलएसकी से एकतरफा छेड़छाड़ नहीं करेगा। लेकिन चीन ने ऐसा किया। इसलिए मुझे लगता है कि अपने अनुभवों से हमारी एक धारणा तो जरूर बनी है।'

एलएसी के पश्चिम में गलवान घाटी और पैंगोंग झील भारत और चीन के सैनिकों के बीच हालिया झड़पों का केंद्र रहा है। पिछले वर्ष अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भी दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। पिछले महीने की 20 तारीख को भारत और चीन के कॉर्प्स कमांडरों स्तर की 17वें दौर की बातचीत हुई थी। इस मीटिंग में भी दोनों पक्षों ने एलएसी पर शांति और स्थायित्व बनाए रखने पर सहमति जताई।

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जयशंकर ने वैश्विक मंचों पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत अब वैश्विक एजेंडा तय करता है और इसके परिणामों को भी प्रभावित करता है। उन्होंने इसके लिए रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण दिया। इसका मूल लक्ष्य पसंद-नापसंद की आजादी का दायरा बढ़ाना। उन्होंने कहा, 'कई बार यह मुद्दों से दूरी बरतकर तो कभी अपनी राय जोरदार तरीके से रखकर किया जाता है।'

जयशंकर ने उग्रवाद, सीमा पार आतंकवाद और युद्धों के लिहाज से राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक पीड़ित भाव में जीने की आदत ने भारत को आतंकवाद को सामान्य समझने को मजबूर कर दिया। जयशंकर ने उदाहरण देकर कहा कि उड़ी के बाद बालाकोट स्ट्राइक ने सीमा पार आतंकवाद पर भारत का नजरिया बदल दिया।

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जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए दुनिया के पास अवसरों का भंडार है, लेकिन उनके साथ नई-नई चुनौतियां और जिम्मेदारियां भी हैं। उन्होंने कहा, 'भारत का महत्व है क्योंकि इन चीजों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता है। भारत दोनों ही मोर्चों पर बहुत महत्वपूर्ण है। भारत का भौगोलिक विस्तार और इसकी आबादी का अपना लाभ तो है लेकिन यह अपने आप में परिणाम देने वाले नहीं हैं, इनका सही से दोहन करने की जरूरत है।'
लेखक के बारे में
नवीन कुमार पाण्डेय
नवीन कुमार पाण्डेय सितंबर 2014 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े हैं। इनकी पत्रकारीय जीवन की शुरुआत तो दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर में नामांकन के साथ ही शुरू हो गई थी, लेकिन पेशेवर पत्रकार का तमगा M3M मीडिया ग्रुप ने दिया। वहां हमार टीवी में नौकरी करने के बाद पटना चले गए और आर्यन टीवी की शुरुआती टीम में शामिल रहे। पटना से रांची का रुख हुआ। वहां झारखंड के सबसे प्रभावी न्यूज चैनल न्यूज 11 में काम किया। फिर रांची से प्रकाशित एक नए अखबार खबर मंत्र का हिस्सा रहे। वहां से दोबारा न्यूज 11 और फिर दिल्ली आगमन हुआ। अभी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन के साथ इनकी यात्रा जारी है।... और पढ़ें

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