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इंडियन आर्मी के स्नाइपर्स बनेंगे और ज्यादा घातक, ट्रेनिंग कोर्स में बड़ा बदलाव

लाइन ऑफ कंट्रोल (LAC) पर तेजी से हालात बदल रहे हैं। पाकिस्तान और चीन दोनों ने खतरा पैदा किया है। उन्‍होंने अपनी-अपनी स्नाइपिंग कैपेबिलटी भी बढ़ाई है। इसे देखते हुए भारत ने स्‍नाइपर ट्रेनिंग कोर्स में बदलाव किया है।

Authored byपूनम पाण्डे | Edited byअमित शुक्‍ला | नवभारतटाइम्स.कॉम 28 Nov 2021, 11:01 pm

हाइलाइट्स

  • कोर्स को दो हिस्सों में बांटा गया, बेसिक और अडवांस
  • अब दी जाएगी साको टीआरजी स्नाइपर राइफल में ट्रेनिंग
  • दुनियाभर में स्पेशल फोर्स कर रही हैं इसी स्नाइपर राइफल का इस्तेमाल

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नई दिल्ली
इंडियन आर्मी के स्नाइपर्स (दूर से निशाना लगाने वाले सैनिक) अब और ज्यादा घातक बनेंगे। आर्मी ने स्नाइपर ट्रेनिंग कोर्स में बड़ा बदलाव किया है। साथ ही स्नाइपर ट्रेनिंग कोर्स में अब उस स्नाइपर राइफल पर भी ट्रेनिंग दी जाएगी जिसे दुनियाभर की स्पेशल फोर्स इस्तेमाल कर रही हैं। इंडियन आर्मी अब दुनिया की सबसे भरोसेमंद माने जानी वाली स्नाइपर राइफल साको टीआरजी में ट्रेनिंग देगी। कुछ वक्त पहले ही आर्मी ने इन्हें खरीदा है। ये स्नाइपर राइफल आर्मी के स्पेशल फोर्स के कमांडो भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
बेसिक के साथ अडवांस कोर्स भी
इंडियन आर्मी के एक अधिकारी ने कहा कि लाइन ऑफ कंट्रोल (LAC) पर लगातार ऑपरेशनल डायनामिक्स बदल रहे हैं। पाकिस्तान और चीन ने भी अपनी स्नाइपिंग कैपेबिलटी बढ़ाई है। पाकिस्तान ने अलग-अलग कैलिबर के राइफल सिस्टम को शामिल कर अपने स्नाइपर ट्रेनिंग प्रोग्राम को सुधारा है। वहीं, चीन ने भी स्नाइपिंग कैपेबलिटी अपग्रेड की है।

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चीनी ने अपनी सेना पीएलए की जरूरत को पूरी करने के लिए QBU-88 डोमेस्टिक स्नाइपर राइफल सिस्टम बनाया है। इंडियन आर्मी वक्त-वक्त पर स्नाइपर ट्रेनिंग कोर्स को मॉडिफाई करती रहती है। अब तय किया गया है कि स्नाइपर कोर्स दो तरह का होगा, एक बेसिक और एक अडवांस। दोनों कोर्स का वक्त भी बढ़ाया गया है।

बेसिक कोर्स करने के बाद कुछ चुने हुए स्नाइपर्स को अडवांस कोर्स कराया जाएगा, जिससे भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए आर्मी की स्नाइपिंग कैपेबिलिटी बढ़ेगी। मऊ के इंफ्रेंट्री स्कूल में स्नाइपर्स की ट्रेनिंग होती है। यहां अब इंस्ट्रक्टर्स (ट्रेनिंग देने वाले अधिकारी) की संख्या भी बढ़ाई गई है।

डेडली स्नाइपर राइफल में ट्रेनिंग
आर्मी अधिकारी के मुताबिक, स्नाइपर ट्रेनिंग के अडवांस कोर्स में स्नाइपर टीम को साको टीआरजी ( .338 Sako TRG 42) स्नाइपर राइफल में भी ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका वजन बिना बुलेट के करीब 5 किलो है और इसकी इफेक्टिव रेंज 1500 मीटर है। फिनलैंड की इस स्नाइपर राइफल को दुनियाभर में सबसे भरोसेमंद माना जाता है।

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यही वजह है कि लगभग हर देश की स्पेशल फोर्स इनका इस्तेमाल कर रही है। अभी इंफ्रेंट्री स्कूल में रशियन ड्रेगनॉव (Dragunov) स्नाइपर राइफल पर ट्रेनिंग दी जा रही है। आर्मी के अधिकारी के मुताबिक, हाल ही में खरीदी गई साको टीआरडी स्नाइपर राइफल पर ट्रेनिंग से स्नाइपिंग कैपेबिलिटी बढ़ेगी।

साल में 100 स्नाइपर टीम को ट्रेनिंग
स्नाइपर की ट्रेनिंग के लिए यूनिट और रेजिमेंटल सेंटर से सैनिकों का चयन किया जाता है। इंडियन आर्मी में एक इंफ्रेंट्री बटालियन में 10 स्नाइपर टीम अधिकृत हैं। पहले स्नाइपर कोर्स में स्पॉटर की ट्रेनिंग पर ज्यादा फोकस नहीं था, लेकिन कुछ साल पहले इसमें बदलाव किया गया और जोड़े में (स्नाइपर और स्पॉटर) ट्रेनिंग देना शुरू किया गया। अब स्नाइपर और स्पॉटर दोनों को एक साथ ट्रेंड किया जा रहा है। इंफ्रेंट्री स्कूल में साल में पांच कोर्स होते हैं जिसमें 100 स्नाइपर डिटैचमेंट को ट्रेनिंग मिलती है।
लेखक के बारे में
पूनम पाण्डे
पूनम पाण्डे नवभारत टाइम्स में असिस्टेंट एडिटर हैं। वह बीजेपी, आरएसएस और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले कवर करती हैं।... और पढ़ें

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