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भारतीय भाषाओं में हो इंटरनेट तो जल्द डिजिटल होगा इंडिया

20 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल नहीं करने वाले लोग भी डिजिटल हो सकते हैं, यदि उन्हें उनकी भाषा में इंटरनेट उपलब्ध कराया जाए। 'इंटरनेट इन इंडिक 2017' नाम से हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 22 Mar 2018, 6:22 pm
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

20 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल नहीं करने वाले लोग भी डिजिटल हो सकते हैं, यदि उन्हें उनकी भाषा में इंटरनेट उपलब्ध कराया जाए। 'इंटरनेट इन इंडिक 2017' नाम से हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इंटरनेट ऐंड मोबाइल असोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) और कंतार आईएमआरबी की तरफ से संयुक्त रूप से यह रिपोर्ट जारी की गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में करीब 40 करोड़ 80 लाख इंटरनेट यूजर्स में से 33 करोड़ 50 लाख यूजर्स नॉन यूनीक यूजर्स हैं। इसमें से 19 करोड़ 30 लाख शहरी इलाकों से हैं और 14 करोड़ 10 लाख ग्रामीण हैं। नॉन यूनीक टर्म यहां इस तथ्य को दर्शाता है कि ये यूजर सिर्फ इंडिक (भारतीय भाषाओं) में इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल का बेहद छोटा हिस्सा ही इंडिक में होता है।

रिपोर्ट में शामिल की गई जानकारियों से पता चला है कि ग्रामीण भारत में इंडिक कंटेट (76%) अधिक है, जबकि शहरी इलाकों में 66 प्रतिशत लोग इंडिक में इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत लोगों में इंडिक कंटेट अधिक प्रचलित है।

रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि शहरी इलाकों में इंडिक का इस्तेमाल मनोरंजन के क्षेत्र, जैसे म्यूजिक/विडियो स्ट्रीमिंग और न्यूज में कड़ाई से प्रतिबंधित है। रिपोर्ट में एक सर्वे का भी जिक्र किया गया है कि देश के 23 प्रतिशत इंटरनेट इस्तेमाल न करने वाले लोगों को यदि इंडिक में इंटरनेट मिले तो वे भी डिजिटल इंडिया की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं। अन्य देशों की बात करें तो चीन ने स्थानीय भाषा में इंटरनेट का इस्तेमाल कराया, इस कारण चीन में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है।

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