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वर्क फ्रॉम होम में कर्मचारियों का निकल रहा कचूमर, औसतन 32 मिनट ज्यादा काम कर रहे हैं भारतीय : सर्वे

Surevey on WFH : सर्वे में पाया गया कि इजरायल में वर्क फ्रॉम होम के दौरान औसतन 47 मिनट ज्यादा काम करना पड़ रहा है जबकि भारतीयों को हर दिन औसतन 32 मिनट की ज्यादा ड्यूटी करनी पड़ रही है। घर से काम करने के कारण ऑफिस जाने में लगने वाला वक्त तो बच रहा है, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हो रहा जैसा कि लोगों ने सोच रखा था।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 29 Nov 2020, 11:08 am

हाइलाइट्स

  • वर्कप्लेस सॉप्टवेयर डिवेलपर ऐटलेशियन (Atlassian) ने 65 देशों में सर्वे किया
  • स्टडी में सामने आया कि महामारी के दौरान वर्क फ्रॉम होम का ड्यूटी आवर बढ़ गया है
  • इजरायल में औसतन 47 मिनट जबकि भारत में 32 मिनट की ज्यादा ड्यूटी करनी पड़ रही है
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नवभारतटाइम्स.कॉम WFH
सांकेतिक तस्वीर।
हिमांशी धवन, नई दिल्ली
कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में लागू लॉकडाउन के कारण आम चलन में आया वर्क फ्रॉम होम (WFH) कर्मचारियों का कचूमर निकल रहा है जबकि कंपनियों की बल्ले-बल्ले हो रही है। एक नई स्टडी में पता चला है कि कोविड-19 महामारी के दौरान कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम में ज्यादा देर तक ड्यूटी करनी पड़ रही है।
इजरायल में 47, भारत में 32 मिनट बढ़ा ड्यूटी आवर
यह स्टडी वर्कप्लेस सॉप्टवेयर डिवेलपर ऐटलेशियन (Atlassian) ने की है। उसने अपने सर्वे में 65 देशों को शामिल किया और पाया कि वर्क फ्रॉम होम कर रहे लोग वक्त से पहले लॉग इन कर रहे हैं और ड्यूटी आवर के बाद बहुत देर तक काम करते रहते हैं। सर्वे में पाया गया कि इजरायल में वर्क फ्रॉम होम के दौरान औसतन 47 मिनट ज्यादा काम करना पड़ रहा है जबकि भारतीयों को हर दिन औसतन 32 मिनट की ज्यादा ड्यूटी करनी पड़ रही है। सर्वे बताता है कि साल के शुरुआती महीनों के मुकाबले अप्रैल और मई महीने के ड्यूटी आवर की तुलना के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी कुछ इसी तरह की बात सामने आई है।

'कम्यूटिंग टाइम बचने का नहीं मिल रहा फायदा'
घर से काम करने के कारण ऑफिस जाने में लगने वाला वक्त तो बच रहा है, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हो रहा जैसा कि लोगों ने सोच रखा था। हैदराबाद के आईटी प्रफेशनल पुनीत श्रीवास्तव कहते हैं, 'पहले वर्क फ्रॉम होम सही मायने में घर से काम करना होता था, लेकिन अब तो हम डेस्क से बंध गए हैं क्योंकि हमसे हर वक्त मीटिंग के लिए उपलब्ध होने की उम्मीद की जाती है।' उन्होंने कहा कि पहले घर से काम करने के दौरान छोटी-मोटी अन्य जिम्मेदारियां भी निपटा लिया करता था, लेकिन अब यह संभव नहीं हो पा रहा है।

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ड्यूटी और पर्सनल आवर में अंतर खत्म!

सर्वे में यह भी कहा गया है कि ऑफिस से दूर रहकर काम करने वाले शाम और सुबह में ज्यादा तेजी से काम निपटा रहे हैं जबकि दोपहर बाद उनकी प्रॉडक्टिविटी घट जाती है। कहा जा सकता है कि एंप्लॉयीज WFH में थोड़ी सुस्ती दिखाते हैं, लेकिन यह भी सही है कि पहले दोपहर बाद थोड़ी देर के लिए काम से फुर्सत मिला करती थी और अब ऐसा नहीं है। स्पष्ट है कि ऑफिस के मुकाबले घर से काम करने का फायदा बिल्कुल नहीं रहा है। स्टडी कहती है, 'लोग कह रहे हैं कि काम का वक्त और अपना वक्त में अंतर कर पाना बहुत मुश्किल हो गया है। बिना ब्रेक के लंबे वक्त तक काम करना पड़ रहा है। आधे से ज्यादा लोग कहते हैं कि महामारी से पहले ऐसा नहीं था। 23% लोग कहते हैं कि वो ऑफ-आवर्स में पहले के मुकाबले ज्यादा काम कर रहे हैं।'

'खाना बनाने की भी फुर्सत नहीं'

पश्चिम दिल्ली की एक कंपनी में बड़े पद पर कार्यरत अधिकारी तो WFH को Work Full Hour (काम करते रहो) कहती हैं। वो हर दिन 12 घंटे के लिए लॉग इन रहती हैं और रात का खाना खाने के बाद डेली रिपोर्ट तैयार करती है। इस दौरान रोज रात के 2 बज जाते हैं। उन्होंने कहा, 'ऑफिस की तरह वर्क फ्रॉम में काम के बीच छुट्टी नहीं मिलती है। हमारे परिवार में सभी कामकाजी या फिर स्टूडेंट हैं। इस कारण से रेडीमेड चपाती और पैकेज्ड फूड पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है क्योंकि किसी के पास खाना बनाने का वक्त नहीं है।'

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