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दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस एस. मुरलीधर का पंजाब ऐंड हरियाणा हाई कोर्ट में तबादला

दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस एम. मुरलीधर का पंजाब ऐंड हरियाणा हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट कलीजियम ने 12 फरवरी को हुई अपनी बैठक में उनके तबादले की सिफारिश की थी।

नवभारतटाइम्स.कॉम 27 Feb 2020, 1:30 am

हाइलाइट्स

  • दिल्ली में हुई हिंसा पर बुधवार को सुनवाई करने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस एस. मुरलीधर का तबादला
  • राष्ट्रपति कोविंद ने सीजेआई बोबडे की सलाह पर जस्टिस मुरलीधर का पंजाब ऐंड हरियाणा हाई कोर्ट में किया तबादला
  • जस्टिस मुरलीधर वरिष्ठता में दिल्ली हाई कोर्ट में नंबर 3 पर थे, पंजाब ऐंड हरियाणा हाई कोर्ट में नंबर 2 पर होंगे
  • जस्टिस मुरलीधर 29 मई 2006 को दिल्ली हाई कोर्ट में जज बने थे, कई अहम फैसलों का हिस्सा रहे
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नई दिल्ली
दिल्ली में बीते दिनों हुई हिंसा पर बुधवार को सुनवाई के दौरान पुलिस को फटकार लगाने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस एस. मुरलीधर का ट्रांसफर हो गया है। उन्हें पंजाब ऐंड हरियाणा हाई कोर्ट में ट्रांसफर किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के कलीजियम ने 12 फरवरी को हुई अपनी बैठक में उनके तबादले की सिफारिश का फैसला किया था।
केंद्रीय कानून मंत्रालय की तरफ से जारी गजट नोटिफिकेशन में कहा गया है कि सीजेआई एस. ए. बोबडे की सलाह पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस एस. मुरलीधर को पंजाब ऐंड हरियाणा हाई कोर्ट में ट्रांसफर किया है। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने जस्टिस मुरलीधर को पंजाब ऐंड हरियाणा हाई कोर्ट में बतौर जज पद संभालने का निर्देश दिया है।


मई 2006 में बने थे दिल्ली हाई कोर्ट में जज
जस्टिस मुरलीधर 29 मई 2006 को दिल्ली हाई कोर्ट के जज बने थे और यहां कई अहम फैसलों को सुनाने वाली बेंच का हिस्सा रहे। वह उस बेंच का भी हिस्सा थे जिसने आईपीसी की धारा 377 को गैरआपराधिक घोषित किया था। वह दिल्ली हाई कोर्ट में वरिष्ठता में तीसरे नंबर पर थे जबकि पंजाब ऐंड हरियाणा हाई कोर्ट में वह वरिष्ठता में चीफ जस्टिस रवि शंकर झा के बाद दूसरे नंबर पर होंगे।

12 फरवरी को कलीजियम ने ट्रांसफर की सिफारिश की थी

बता दें कि सीजेआई की अगुआई वाले सुप्रीम कोर्ट के कलीजियम ने 12 फरवरी को हुई अपनी बैठक में जस्टिस मुरलीधर को पंजाब ऐंड हरियाणा हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने की सिफारिश करने का फैसला लिया था। कलीजियम के इस फैसले का दिल्ली हाई कोर्ट बार असोसिएशन ने विरोध किया था। बुधवार को जस्टिस मुरलीधर और जस्टिस तलवंत सिंह की डिविजन बेंच ने नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर लॉ इन्फोर्समेंट एजेंसियों की तरफ से ऐक्शन लेने में देरी पर चिंता जताई थी। इस हिंसा में अबतक 27 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि करीब 200 लोग जख्मी हैं।

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