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विधि आयोग ने आरोपी की इलेक्ट्रॉनिक टैगिंग की सिफारिश की

नयी दिल्ली, 24 मई :भाषा: विधि आयोग ने गंभीर अपराध के आरोपियों की इलेक्ट्रॉनिक टैगिंग की आज सिफारिश की। उसने कहा कि यह भीड़भाड़ वाली जेलों में दबाव को कम करने में मदद करेगा। साथ ही यह कानून की गिरफ्त से बचने की कोशिश कर रहे लोगों पर अंकुश लगाएगा।

भाषा 24 May 2017, 6:50 pm
नयी दिल्ली, 24 मई :: विधि आयोग ने गंभीर अपराध के आरोपियों की इलेक्ट्रॉनिक टैगिंग की आज सिफारिश की। उसने कहा कि यह भीड़भाड़ वाली जेलों में दबाव को कम करने में मदद करेगा। साथ ही यह कानून की गिरफ्त से बचने की कोशिश कर रहे लोगों पर अंकुश लगाएगा। आयोग ने हालांकि चेतावनी दी कि कानून में बदलाव के बाद इस व्यवस्था का बेहद सावधानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इलेक्ट्रॉनिक टैगिंग में प्रतिवादी का आसानी से पता लगाना सुनिश्चित करके फरार होने की दर को कम किया जा सकता है और सरकारी खर्चे पर हिरासत में रखे गए प्रतिवादियों की संख्या को कम करके सरकारी खर्च को घटाया जा सकता है। जमानत से संबंधित प्रावधानों पर विधि मंत्रालय को सौंपी गई की अपनी रिपोर्ट में आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक टैगिंग या इलेक्ट्रॉनिक निगरानी वाली जमानत को परिभाषित करने के लिए न्यूजीलैंड के एक कानून को उद्धृत किया। यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसे जमानत के प्रतिबंधक स्वरूप के नाम से जाना जाता है। इसमें कहा गया है, ईएम जमानत पर रह रहे व्यक्ति को हमेशा एक विशिष्ट आवास में रहना होगा, जब तक कि उसे स्वीकृत उद्देश्य के लिए कहीं जाने की अनुमति नहीं दी गई हो। इसके अनुपालन की निगरानी इलेक्ट्रॉनिक निगरानी वाली बेड़ी से की जाएगी जिसे चौबीसो घंटे अवश्य पहनना होगा। ईएम जमानत न्यूजीलैंड में प्रतिवादियों और 12 से 17 साल के युवकों को उपलब्ध है जो अन्यथा अदालत में सुनवाई की प्रतीक्षा करने के दौरान हिरासत में बने रहते।

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