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देसी तेजस का वायुसेना में हुआ 'गृह प्रवेश', जानिए 10 बड़ी खूबियां

तेजस चीन और पाकिस्तान द्वारा मिलकर बनाए गए लड़ाकू विमान JF-17 थंडर की टक्कर का विमान है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि तेजस कम-से-कम छह मानकों पर JF-17 थंडर से बेहतर है। तेजस 460 मीटर चलने के बाद ही हवा में उड़ सकता है जबकि चीनी विमान को ऐसा करने के लिए 600 मीटर की दूरी तय करनी होती है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 1 Jul 2016, 11:22 am
बेंगलुरु
नवभारतटाइम्स.कॉम made in india tejas to be inducted in air force and know what are its specialities
देसी तेजस का वायुसेना में हुआ 'गृह प्रवेश', जानिए 10 बड़ी खूबियां

स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस का शुक्रवार को भारतीय वायुसेना में पूरे विधि विधान से 'गृह प्रवेश' हो गया। वायुसेना के बेड़े में शुरुआत में दो तेजस विमान शामिल किए गए हैं। बेंगलुरु में शुक्रवार सुबह शुभ मुहूर्त में तेजस की वायुसेना में एंट्री की गई। इस मौके पर सभी धर्मों की प्रार्थनाएं की गईं और एयरफोर्स के अधिकारियों ने नारियल भी फोड़ा। वायुसेना में शामिल होने के बाद सुबह 11:15 मिनट पर तेजस ने उड़ान भरी। भारतीय वायुसेना तेजस विमानों का स्क्वॉड्रन बनाएगी। इस विमान को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने बनाया है। पहले दो साल यह स्क्वॉड्रन बेंगलुरु में रहेगा। इसके बाद यह तमिलनाडु के सुलूर में चला जाएगा।

17 मई को तेजस में अपनी पहली उड़ान भरने वाले एयर चीफ मार्शल अरुप राहा ने विमान को बल में शामिल करने के लिए 'अच्छा' बताया था। वायुसेना ने कहा है कि इस वित्तीय वर्ष में कुल छह विमान और अगले वित्तीय वर्ष में करीब आठ विमान शामिल करने की योजना है। तेजस अगले साल वायुसेना की लड़ाकू योजनाओं में भी नजर आएगा और इसे अग्रिम अड्डों पर तैनात किया जाएगा। तेजस के सभी स्क्वॉड्रन में कुल 20 विमान शामिल किए जाएंगे, जिसमें चार विमान आरक्षित रहेंगे। जानिए, क्या है तेजस की खूबियां-




देसी तेजस के ये करतब देखे आपने?

1- तेजस यूं तो स्वदेशी विमान है, पर इसका इंजन अमेरिकन है, रेडार और हथियार प्रणाली इस्राइली हैं, इसकी इजेक्‍शन सीट ब्रिटिश है, साथ ही इसके कई अन्‍य कलपुर्जे भी आयातित हैं। इसकी निर्माता कंपनी का कहना है कि फ्रांस के रफाल और स्‍वीडन के ग्रिपन विमानों में भी विदेशी सिस्‍टम लगे हैं, क्‍योंकि कलपुर्जे बनाने में टाइम और पैसा बहुत ज्‍यादा लगता है।

2- तेजस चीन और पाकिस्तान द्वारा मिलकर बनाए गए लड़ाकू विमान JF-17 थंडर की टक्कर का विमान है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि तेजस कम-से-कम छह मानकों पर JF-17 थंडर से बेहतर है। दोनों विमानों के इंजन की क्षमता एक सी है। हालांकि, कुछ मामलों में तेजस, JF-17 थंडर से काफी आगे है। तेजस एक उड़ान में 2,300 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है, जबकि थंडर 2,037 किलोमीटर की दूरी। तेजस जहां 2,500 किलो तेल लेकर उड़ सकता है वहीं थंडर 2,300 किलो तेल लेकर। तेजस हवा में ही तेल भरवा सकता है, पर JF-17 ऐसा नहीं कर सकता। सबसे अहम बात यह है कि तेजस 460 मीटर चलने के बाद ही हवा में उड़ सकता है जबकि चीनी विमान को ऐसा करने के लिए 600 मीटर की दूरी तय करनी होती है।

3- तेजस 50 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है। इसके विंग्स 8.2 मीटर चौड़े हैं। इसकी लंबाई 13.2 मीटर और ऊंचाई 4.4 मीटर है। तेजस का वजन 6,560 किलोग्राम है।

4- तेजस क्षमता के मामले में कई मायनों में फ्रांस में निर्मित मिराज 2000 के जैसा है। इसका मल्‍टीरोल रेडार अल्‍टा 2032 इस्राइल में बना है। इसमें हवा से हवा में मार करने वाली डर्बी मिसाइलें और जमीन पर निशाना साधने के लिए आधुनिक लेजर डेजिग्‍नेटर और टारगेटिंग पॉड्स भी हैं।

5- तेजस ने ढाई हजार घंटे के सफर में 3000 से ज्‍यादा उड़ानें भरी हैं। इसका परीक्षण करने वाले सभी पायलट कलाबाजी में इसकी कुशलता और इसके फ्लाइट कंट्रोल सिस्‍टम से संतुष्‍ट हैं।

6- इसमें सेंसर से मिलने वाले डेटा को प्रोसेस करने वाले मिशन कंप्‍यूटर का हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर ओपन आर्किटेक्‍चर फ्रेमवर्क को ध्‍यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यानी इसे भविष्‍य में अपग्रेड भी किया जा सकता है।



7- विमान का ढांचा कार्बन फाइबर से बना है, जो धातु से कहीं ज्‍यादा हल्‍का और मजबूत होता है।

8- तेजस का रखरखाव काफी सस्ता पड़ेगा। भारतीय वायुसेना के सर्वश्रेष्‍ठ लड़ाकू विमान सुखोई 30 का रखरखाव काफी महंगा है।

9- सुखोई 30 के बेड़े में 60 फीसदी से भी कम विमान एक बार में मिशन के लिए मौजूद रहते हैं, बाकी दुरुस्त होते रहते हैं, यह चिंता का विषय है। एचएएल का कहना है कि तेजस 70 फीसदी से ज्‍यादा समय के लिए उपलब्‍ध होगा और 80 फीसदी के लिए भी प्रयास जारी हैं।

10- हालांकि, एक दशक से भी पहले की जरूरतों के हिसाब से बनाया गया विमान तेजस दुनिया के सर्वश्रेष्‍ठ लड़ाकू विमानों में शुमार नहीं है। हां, यह भारतीय वायुसेना को मिग 21 का विकल्‍प उपलब्‍ध कराएगा। भारतीय वायुसेना का मकसद भी यही है।

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