ऐपशहर

'स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप' में देरी पर नौसेना में बेचैनी

प्राइवेट कंपनियों के साथ रक्षा साजोसामान के निर्माण के लिए 'स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप' मॉडल की गाइडलाइंस में देरी पर सेनाओं में बेचैनी सामने आने लगी है। रक्षा तैयारियों के मद्देनजर वे दूसरे विकल्पों पर विचार करने के लिए तैयार हैं।

रमेश तिवारी | नवभारत टाइम्स 18 Apr 2017, 10:22 pm
रमेश तिवारी, नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम navy anxious over delay in strategic partnership
'स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप' में देरी पर नौसेना में बेचैनी

प्राइवेट कंपनियों के साथ रक्षा साजोसामान के निर्माण के लिए 'स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप' मॉडल की गाइडलाइंस में देरी पर सेनाओं में बेचैनी सामने आने लगी है। रक्षा तैयारियों के मद्देनजर वे दूसरे विकल्पों पर विचार करने के लिए तैयार हैं।

पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इस मॉडल की काफी पैरवी की थी और उनके समय में इसे जल्द लाने का दावा किया जा रहा था। उद्योग जगत को भी इसका काफी इंतजार है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इतना बड़ा फैसला विवादों को जन्म दे सकता है, इसलिए इसमें समय लगेगा।

मंगलवार को उद्योग संगठन फिक्की के एक कार्यक्रम में नौसेना के एक बड़े अधिकारी ने कहा कि यदि सरकार इस मॉडल के माध्यम से नहीं आती है, तो नौसेना अन्य तरीकों से पनडुब्बियों को खरीदने की कोशिश कर सकती है। उन्होंने कहा, हमें पनडुब्बियों की बहुत जरूरत है।

इस बीच नौसेना लगभग 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से 12 माइनस्वीपर जहाजों के निर्माण के लिए दक्षिण कोरियाई रक्षा कंपनी के साथ समझौता करने के लिए तैयार है। नौसेना के युद्धपोत उत्पादन और अधिग्रहण के नियंत्रक वाइस एडमिरल डी एम देशपांडे ने कहा कि परियोजना में गोवा शिपयार्ड और दक्षिण कोरियाई सहयोगी के बीच के मुद्दों को सुलझा लिया गया है और इस वर्ष के अंत तक यह सौदा हो जाना चाहिए।

नौसेना के मौजूदा 6 बेड़े सोवियत जमाने के हैं, जिन्हें 2018 के अंत तक हटा दिया जाएगा। रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने हाल ही में इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की थी और नेवी की गैप भरने के प्रयास करने के लिए कहा था। देशपांडे ने कहा कि लैंडिंग प्लैटफॉर्म डॉक्स (एलपीडी) की खरीद के लिए एक करार को इस वर्ष के अंत तक अंतिम रूप दिया जाएगा।

स्वदेशी विमान वाहक जहाज (आईएसी-II) परियोजना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि नौसेना इस प्रोजेक्ट पर धन के लिए अगले दो-तीन महीने में रक्षा मंत्रालय से संपर्क कर सकेगी, क्योंकि इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह दूसरा स्वदेशी विमान वाहक होगा। देशपांडे ने यह भी कहा कि नौसेना 57 विमान खरीदना चाहती है। नौसेना ने पिछले साल हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस के नौसेना संस्करण को खारिज कर दिया था।
लेखक के बारे में
रमेश तिवारी

अगला लेख

Indiaकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर