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अब 'सॉफ्ट हिंदुत्व' को भी तरजीह देगा विपक्ष!

यूपी में जहां बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई है तो ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी से मुकाबले के लिए विपक्षी दलों को अपनी रणनीति में बदलाव लाना होगा...

नरेंद्र नाथ | नवभारत टाइम्स 13 Mar 2017, 2:20 am
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम oppostion needs to change its strategy says political analysts
अब 'सॉफ्ट हिंदुत्व' को भी तरजीह देगा विपक्ष!

यूपी में जहां बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई है तो ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी से मुकाबले के लिए विपक्षी दलों को अपनी रणनीति में बदलाव लाना होगा? जानकारों के अनुसार, अगर मोदी की अगुवाई वाली नई बीजेपी से मुकाबला करना है तो विपक्ष को पारंपरिक राजनीति को छोड़कर बदली परिस्थिति में काउंटर की नई रणनीति बनानी होगी।

राष्ट्रवाद मुद्दे को लेकर बैकफुट पर विपक्ष
जेएनयू में भारत विरोधी नारे से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक, विपक्ष बीजेपी की राष्ट्रवादी राजनीति के सामने कमजोर साबित हुई और मोदी की अगुवाई में बीजेपी विपक्षी नेताओं को धारणा की लड़ाई में हराने में कामयाब रही। जेएनयू प्रकरण में राहुल गांधी के कैंपस जाने और सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर उठाए गए सवाल से कांग्रेस को नुकसान हुआ। बीजेपी इसे जनता के बीच पार्टी के खिलाफ ले जाने में सफल रही। ऐसे में विपक्ष को किन मुद्दों पर बोलना है और किन मुद्दों को दरकिनार करना है, इसे भी समझना होगा।

'सॉफ्ट हिंदुत्व' का भी मिश्रण है जरूरी
2014 के बाद जब कांग्रेस ने अपनी करारी हार के बाद ए. के. एंटनी के नेतृत्व में इसकी समीक्षा की तो पाया गया कि हिंदुओं में बड़ा तबका ऐसा महसूस कर रहा है कि अधिकतर गैरबीजेपी दल बहुत हद तक उनके हितों को अनदेखा करता है और पूरा फोकस अल्पसंख्यकों पर रखता है। रिपोर्ट में कहा गया कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया और हिंदुओं के बड़े तबके उनके साथ आए। उसे सुधारते हुए एंटनी कमिटी ने 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की ओर लौटने की सलाह दी थी, लेकिन छिटपुट मौकों पर छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस या दूसरी पार्टियां इस धारणा को बदलने में विफल रहीं। ऐसे में उत्तर प्रदेश का रिजल्ट बड़ा संकेत है। वोटों में अगर जातीय विश्लेषण पर नजर डालें तो हिंदुओं की एक-दो जाति को छोड़ दें तो बाकी सभी ने पूरी तरह बीजेपी के पक्ष में वोट दिया। जानकारों का कहना है कि अगर विपक्ष को मोदी से मुकाबला करना है तो अल्पसंख्यकों के साथ-साथ हिंदुत्व फैक्टर को भी शामिल कर चलना होगा।

बिहार में सफल हुआ था प्रयोग
बिहार में लालू प्रसाद और नीतीश कुमार ने विधानसभा चुनाव को धार्मिक ध्रुवीकरण से रोकने की पूरी कोशिश की थी। पूरे चुनाव अभियान के दौरान दोनों नेताओं ने ऐसे तमाम बयान से खुद को अलग किया और बीजेपी को आरक्षण के मुद्दे पर जातिगत राजनीति में घेरने की सफल कोशिश की। जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी और अखिलेश यादव ऐसा करने में विफल रहे। मायावती ने बार-बार मुस्लिम वोटों की बात बीच में लाकर काउंटर ध्रुवीकरण को स्पेस दिया।
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नरेंद्र नाथ
नरेन्द्र नाथ नवभारत टाइम्स में असिस्टेंट एडिटर हैं। वह राजनीति से जुड़ी खबरों को नजदीक से फॉलो करते हैं इस बारे में आपको हर घटनाक्रम से वाकिफ कराते रहेंगे। पीएमओ को भी कवर करते हैं और इससे भी जड़ी हर खबर पहुंचाने की कोशिश रहेगी। ... और पढ़ें

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