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समलैंगिक विवाह पर हाई कोर्ट में बोली केंद्र सरकार- यह किसी का मौलिक अधिकार नहीं, सिर्फ महिला और पुरुष की शादी को मान्यता

सेम सेक्स मैरिज को मान्यता देने की मांग वाली याचिका के जवाब में केंद्र सरकार ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि यह भारतीय संस्कृति और नैतिकता के खिलाफ है। केंद्र ने कहा कि सेम सेक्स मैरिज किसी का मूल अधिकार नहीं हो सकता। केवल महिला और पुरुष की शादी को ही कानूनी मान्यता है।

आईएएनएस 25 Feb 2021, 6:41 pm

हाइलाइट्स

  • दिल्ली हाई कोर्ट में बोली केंद्र सरकार- सेम सेक्स मैरिज को नहीं दी जा सकती कानूनी मान्यता
  • केंद्र ने कहा- समलैंगिक विवाह मूल अधिकार नहीं, सिर्फ महिला-पुरुष की शादी को मान्यता
  • केंद्र ने कहा कि सेम सेक्स के दो लोगों के पार्टनर के तौर पर एक साथ रहने की तुलना भारतीय परिवार से नहीं की जा सकती

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नवभारतटाइम्स.कॉम delhi-high-court
नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट से कहा कि समलैंगिक विवाह के लिए मान्यता पाना किसी का मौलिक अधिकार नहीं है। सरकार ने यह बात समलैंगिक जोड़ों की तरफ से अपनी पसंद के साथी से विवाह करने को मौलिक अधिकार के दायरे में लाने की मांग वाली एक याचिका के जबाव में कही।
केंद्र ने हलफनामे में कहा है, ‘आईपीसी की धारा 377 को वैध करने के बावजूद याचिकाकर्ता देश के कानूनों के तहत समलैंगिक विवाह को मौलिक अधिकार की तरह लागू कराने का दावा नहीं कर सकते। अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों का विस्तार कर इसमें समलैंगिक विवाहों के मौलिक अधिकार को शामिल नहीं किया जा सकता।’

सेम सेक्स मैरिज को मिले मान्यता, दिल्ली हाईकोर्ट में एक और याचिका दायर
इसमें आगे कहा गया है, ‘भारत में शादी केवल दो व्यक्तियों के मिलन का विषय नहीं है, बल्कि एक बायोलॉजिकल पुरुष और एक बायोलॉजिकल महिला के बीच एक अहम बंधन है।’ केंद्र ने आगे कहा कि पार्टनर के रूप में एक साथ रहना और समान-लिंग के लोगों के साथ यौन संबंध बनाने की तुलना पति, पत्नी और बच्चों वाले भारतीय परिवार से नहीं की जा सकती। ऐसे में देश की संसद की ओर से बनाए गए कानूनों में कोई हस्तक्षेप करना निजी कानूनों के नाजुक संतुलन के लिए भयावह साबित होगा।

केंद्र ने यह भी कहा कि भारत में शादी को एक संस्कार के रूप में माना जाता है और यह सदियों पुराने रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक नैतिकता और सामाजिक मूल्यों को लिए हुए है। ऐसे में समलैंगिक व्यक्तियों का विवाह इन सब चीजों का भी उल्लंघन करेगा। लिहाजा, इस याचिका को खारिज कर दिया जाना चाहिए।

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