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Farmers Protest: कौन हैं वे दो संगठन जिन्होंने खत्म किया आंदोलन, उन 40 में कितना दबदबा

नए कृषि कानूनों के विरोध में पिछले दो महीने से दिल्ली से सटी सीमाओं पर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन चल रहा था। मगर 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च के दौरान जो कुछ हुआ वो शर्मनाक है। गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी दिल्ली की जो तस्वीर पूरे विश्व ने देखी वो शर्मिंदगी से भरी हुई थी। इसको देखते हुए दो बड़े किसान संगठनों ने आंदोलन से अपना नाम वापस ले लिया।

नवभारतटाइम्स.कॉम 27 Jan 2021, 7:57 pm
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और भारतीय किसान यूनियन (भानु) अब आंदोलन से अलग हो चुके हैं। किसान नेता वीएन सिंह और चिल्ला बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने धरना समाप्त करने की घोषणा की।
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Farmers Protest: कौन हैं वे दो संगठन जिन्होंने खत्म किया आंदोलन, उन 40 में कितना दबदबा


दिल्ली में हुड़दंग

दिल्ली में आंदोलन के नाम पर जो कुछ हुआ वो शर्मसार करने वाला है। इसके कारण आंदोलन भी अब टूटता जा रहा है। पिछले दो महीने से सीमा पर डटे किसान संगठनों के प्रमुख नेता अप इससे किनारा कर रहे हैं।

भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने आंदोलन से किया किनारा

भानु प्रताप सिंह ने प्रेस वार्ता करते हुए नोएडा चिल्ला बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान किया है। प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय किसान यूनियन भानु संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि भले ही वह केंद्र सरकार और नरेंद्र मोदी की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन दे रहे हैं। लेकिन वह देशहित के खिलाफ बिल्कुल नहीं सोच सकते।

वीएन सिंह ने भी आंदोलन से किया किनारा

वीएन सिंह ने यूपी गेट पर प्रेस कांफ्रेंस कर इस बात की जानकारी दी। किसान नेता वीएन सिंह गणतंत्र दिवस में जो कुछ भी हुआ उस घटना से बहुत आहत है। साथ ही उन्होंने कहा कि कल के गुनाहगारों को सख्त सजा मिले। किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीएम सिंह ने आगे कहा कि सरकार की भी गलती है जब कोई 11 बजे की जगह 8 बजे निकल रहा है तो सरकार क्या कर रही थी। जब सरकार को पता था कि लाल किले पर झंडा फहराने वाले को कुछ संगठनों ने करोड़ों रुपये देने की बात की थी।

आंदोलन के 2 प्रमुख संगठन हैं

वैसे तो किसान प्रोटेस्ट में 40 से ज्यादा संगठन अपना योगदान दे रहे हैं लेकिन भाकियू और भारतीय राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन दोनों बेहद अहम हैं। इन दोनों संगठनों के हजारों कार्यकर्ता इसमें मौजूद थे। मगर अब दोनों ने जब अपना-अपना नाम हटा लिया है तो किसान वहां से उठकर अपने घरों को लौटने लगे हैं।

लाल किले में फहरा दिया झंडा

गणतंत्र दिवस के दिन लालकिले में इस हरकत से सबसे ज्यादा लोगों को आहत कर दिया है। किसान नेताओं के आंदोलन से अलग होने के ऐलान के बाद धरना स्थल पर तंबू उखड़ने भी शुरू हो गए। मौके से आई तस्वीरों में किसान अपने टेंट और बिस्तर समेटने में लगे दिखाई दे रहे हैं। तकरीबन दो महीने से किसान यहां जमे हुए थे। प्रदर्शन की शुरुआत में उन्होंने ऐलान किया था कि वे 6 महीने के साजो-सामान के साथ प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने आए हैं।

वीएम सिंह (संयोजक AIKSCC) कौन हैं?

भारतीय राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के नेशनल प्रेसिडेंट वीएम सिंह उर्फ वीरेंद्र मोहन सिंह वर्तमान समय में ऑल इंडिया किसान संघर्ष समिति के संयोजक हैं। 61 साल के वी एम सिंह मेनका गांधी के दूर के रिश्तेदार बताए जाते हैं। इनका मूल निवास लखनऊ में है। दिसंबर 2015 में इन्होंने पॉलिटिकल पार्टी राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ पार्टी बनाई थी। इससे यह चुनाव भी लड़ चुके हैं। इसके अलावा 2007 और 2012 में एआईटीसी से टिकट लेकर भी चुनाव लड़े हैं।

कहां गायब हो गए थे किसान नेता?

कल ही घटना के बाद अब सवाल ये उठ रहा था कि आखिरकार किसानों के पैरोकार कहने वाले ये किसान नेता कहां चले गए। किसी भी नेता का बयान नहीं आ रहा था न ही कहीं नजर आ रहे थे। किसान नेता राकेश टिकैत का एक बयान आता है मगर उसके बाद वो भी गायब हो जाते हैं।

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