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कोविड : मामले बढ़ने पर स्कूलों ने उपाय किए, विशेषज्ञ विद्यालयों को बंद करने के पक्ष में नहीं

नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) दिल्ली में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के कारण एक बार फिर स्कूली विद्यार्थियों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसके चलते शिक्षण संस्थान बीमार बच्चों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन कर रहे हैं और रिकॉर्ड किए हुए लेक्चर छात्रों को भेज रहे हैं। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल बंद नहीं किए जाने चाहिए और इसके बजाय कोविड-19 उचित व्यवहार पर फिर से अमल करने पर जोर देना चाहिए, जिसका फिलहाल बुजुर्ग और युवा पालन नहीं कर रहे हैं। कोविड-19 मामलों में वृद्धि के कारण स्कूल प्रबंधन कई कदम उठा रहे हैं,

भाषा 9 Aug 2022, 9:07 pm
नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) दिल्ली में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के कारण एक बार फिर स्कूली विद्यार्थियों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसके चलते शिक्षण संस्थान बीमार बच्चों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन कर रहे हैं और रिकॉर्ड किए हुए लेक्चर छात्रों को भेज रहे हैं।

वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल बंद नहीं किए जाने चाहिए और इसके बजाय कोविड-19 उचित व्यवहार पर फिर से अमल करने पर जोर देना चाहिए, जिसका फिलहाल बुजुर्ग और युवा पालन नहीं कर रहे हैं।

कोविड-19 मामलों में वृद्धि के कारण स्कूल प्रबंधन कई कदम उठा रहे हैं, जिनमें बीमार छात्रों को रिकॉर्ड किए हुए लेक्चर भेजना, पृथकवास में रह रहे छात्रों को ऑनलाइन कक्षाओं की अनुमति देना और स्टडी टूर को स्थगित करना शामिल है।

एमआरजी स्कूल, रोहिणी की प्रधानाचार्य अंशु मित्तल ने कहा, ''हम सभी जानते हैं कि कोविड -19 अभी खत्म नहीं हुआ है। हम हर छात्र के स्वास्थ्य को महत्व दे रहे हैं। बीमार विद्यार्थियों को पृथक करके उन्हें घर पहुंचाया जा रहा है ताकि उन्हें पर्याप्त आराम मिल सके। अन्य छात्र बिना किसी चिंता के पढ़ाई कर सकते हैं।''

उन्होंने कहा, “हम बीमार विद्यार्थियों को रिकॉर्डे किए हुए लेक्चर भी भेज रहे हैं ताकि वे पढ़ाई में पीछे न रहें। स्वास्थ्य केंद्रित कार्यशालाओं के माध्यम से छात्रों को साफ-सफाई के बारे में उचित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हमेशा की तरह उचित शारीरिक दूरी के नियम का पालन किया जा रहा है।''

रोहिणी में श्री राम वंडर इयर्स की प्रमुख शुभी सोनी ने कहा कि कोविड-19 मामलों में अचानक वृद्धि चिंताजनक है, लेकिन स्कूलों को बंद करना कोई विकल्प नहीं है क्योंकि विद्यार्थियों की दिनचर्या और पढ़ाई की समयसीमा की आदत को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसा करने से लॉकडाउन के बाद उन्होंने पढ़ाई में जो प्रगति की है, वह प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने कहा, ''छात्रों के स्वास्थ्य से भी समझौता नहीं किया जाना चाहिए, यही कारण है कि हम बीमार छात्रों के प्रति आवश्यक सावधानी बरत रहे हैं। हम उन्हें वर्कशीट भी भेज रहे हैं ताकि उनकी पढ़ाई को नुकसान न हो और वे घर पर रहकर आराम से पढ़ाई कर सकें।''

सोनी ने कहा, “ कुछ समय के लिए स्कूल के स्टडी टूर पर रोक लगा दी गई है। बाहर के खाने की अनुमति नहीं है, और हम बच्चों के लिए स्वच्छ भोजन की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। छात्रों को घर का बना खाना लाने और साथियों के साथ भोजन साझा करने से बचने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।”

दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के 1,382 नए मामले सामने आए हैं और छह रोगियों की मौत हुई है जबकि संक्रमण दर 17.85 प्रतिशत रही है, जो 21 जनवरी के बाद से सबसे अधिक है। 21 जनवरी को संक्रमण दर 18.04 प्रतिशत थी।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली में कोविड के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि ज्यादातर नए मामले हल्की प्रकृति के हैं और सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है।

सर गंगाराम अस्पताल में बाल गहन देखभाल विभाग के निदेशक डॉ अनिल सचदेव के मुताबिक, कोरोना वायरस और मौसमी बीमारियों की वजह से बच्चों को ज्यादा खतरा है।

उन्होंने कहा, “ हमने देखा है कि बच्चों में कोविड के हल्के लक्षण हैं और पिछले महीने सिर्फ दो बच्चों की हालत गंभीर हुई थी लेकिन वे पहले से अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित थे।”

फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट में बाल चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ कृष्ण चुघ ने कहा कि अगर कोई संक्रमित बच्चा ऐसी हालत में स्कूल जाता है तो वह अपने सहपाठियों को भी संक्रमित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि फिलहाल स्कूलों को बंद करने की जरूरत नहीं है लेकिन माता-पिता और लोगों को लक्षणों तथा रोकथाम के बारे में जानकारी देने की जरूरत है।

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