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सोनिया को डांटना भी आता है! CWC की बैठक में बोलीं- मैं हूं न, अलग अंदाज में दिखीं कांग्रेस प्रेसिडेंट

सोनिया गांधी ने शनिवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में जी23 के नेताओं को निशाने पर लिया। नसीहत दी कि उनसे मीडिया के जरिये बात न की जाए। साथ ही हक के साथ कहा कि वो अध्‍यक्ष पद पर हैं।

Curated byअमित शुक्‍ला | नवभारतटाइम्स.कॉम 16 Oct 2021, 6:06 pm

हाइलाइट्स

  • जी23 के नेताओं को इशारों में लगाई फटकार
  • कहा, मैंने हमेशा खुलेपन की सराहना की है
  • मीडिया के जरिये मुझसे बात करने की जरूरत नहीं

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नई दिल्‍ली
कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में शनिवार को पार्टी अध्‍यक्ष सोनिया गांधी के कई चेहरे देखने को मिले। उन्‍होंने समझाने-बुझाने का काम किया तो सख्‍त तेवर भी दिखाए। पार्टी में निर्णय कौन लेता है? इस पर कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं (जी23) के सवालों के जवाब में गांधी ने पलटवार किया। बोलीं, 'मैं ही पार्टी की पूर्णकालिक और स्थायी अध्यक्ष हूं।' उन्‍होंने धुड़की देते हुए कहा कि मीडिया के जरिये मुझसे बात करने की जरूरत नहीं है। जो कहना है खुलकर कहें।
कपिल सिब्बल के नेतृत्व में जी23 नेताओं ने पार्टी की निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। यह आशंका जताई जा रही थी कि पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सभी निर्णय ले रहे हैं। सोनिया गांधी ने शनिवार को इसका जवाब दिया।

अपने भाषण में उन्होंने मीडिया से बात करने के लिए कांग्रेस नेताओं की खिंचाई की। कहा, 'मैंने हमेशा खुलेपन की सराहना की है। मीडिया के माध्यम से मुझसे बात करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसलिए हम सभी एक स्वतंत्र और ईमानदार चर्चा करें। लेकिन इस कमरे की चार दीवारों के बाहर जो कहा जाए वह सीडब्ल्यूसी का सामूहिक निर्णय हो।’

निशाने पर थे जी23 के नेता
कांग्रेस अध्यक्ष ने सिब्बल समेत ‘जी 23’ समूह के कुछ नेताओं को निशाने पर लिया और इशारों में नसीहत दी। पिछले साल अगस्त के पहले हफ्ते में कांग्रेस के 23 सीनियर नेताओं ने पार्टी की कार्यशैली, संस्कृति और हाइकमान को लेकर सवाल उठाते हुए एक चिठ्ठी लिखी थी। इन नेताओं में गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा, मनीष तिवारी, भूपेंद्र हुड्डा, पृथ्‍वीराज चव्हाण, शशि थरूर सरीखे दिग्‍गज नेता शामिल थे। सियासी गलियारे में इन्‍हें ही जी-23 कहा जाता है

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कांग्रेस अध्यक्ष ने जोर देकर कहा, ‘अगर आप मुझे बोलने की इजाजत दें तो मैं पूर्णकालिक और सक्रिय अध्यक्ष हूं। पिछले दो वर्षों में कई साथियों और खासकर युवा नेताओं ने नेतृत्व करने की जिम्मेदारी उठाई है और पार्टी की नीतियों को लोगों तक लेकर गए हैं।’

उन्होंने जी23 नेताओं को नसीहत देते हुए कहा, ‘मैंने सदा स्पष्टवादिता की सराहना की है। मुझसे मीडिया के जरिये बात करने की जरूरत नहीं है। इसलिए हम सभी यहां खुली और ईमानदार चर्चा करते हैं। लेकिन इस चार दीवारी से बाहर जो बात जाएं वो सीडब्ल्यूसी का सामूहिक फैसला होना चाहिए।’

कुछ मुद्दों पर भी की चर्चा
सोनिया ने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में यह भी बताया कि अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 30 जून तक पूरी की जानी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण ही इसे टालना पड़ा। अब इसकी रूपरेखा पेश की जाएगी।

सोनिया गांधी ने किसान आंदोलन, लखीमपुर खीरी हिंसा, महंगाई, विदेश नीति और चीन की आक्रामकता के मुद्दों को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस अध्यक्ष ने आगामी विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘हमारे सामने कई चुनौतियां आएंगी, लेकिन अगर हम एकजुट रहते हैं और अनुशासित रहते हैं और सिर्फ पार्टी के हित पर ध्यान केंद्रित करते हैं तो मुझे पूरा विश्वास है कि हम अच्छा करेंगे।'

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सोनिया गांधी ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए तैयारियां आरंभ हो चुकी हैं। उन्होंने संगठानात्मक चुनाव का हवाला देते हुए कहा, ‘पूरा संगठन चाहता है कि कांग्रेस फिर से मजबूत हो। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि एकजुटता हो और पार्टी के हित को सर्वोच्च रखा जाए। इन सबसे ऊपर आत्मनियंत्रण और अनुशासन की जरूरत है।’

क्‍यों पड़ी बैठक की जरूरत?
कांग्रेस के ‘जी 23’ समूह के नेताओं की ओर से पार्टी के भीतर संवाद की मांग किए जाने और हाल के महीनों में कई नेताओं के पार्टी छोड़ने की पृष्ठभूमि में सीडब्ल्यूसी की बैठक हुई है। पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल ने सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाने की मांग की थी।

आजाद ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि पार्टी से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए कांग्रेस कार्य समिति की तत्काल बैठक बुलाई जाए। सिब्बल ने भी पार्टी की पंजाब इकाई में मचे घमासान के बीच पिछले दिनों पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे। कहा था कि कांग्रेस कार्य समिति की बैठक बुलाकर इस स्थिति पर चर्चा होनी चाहिए। साथ ही संगठनात्मक चुनाव कराए जाने चाहिए। सिब्बल ने कहा था, ‘पार्टी में स्थायी अध्यक्ष नहीं है, लेकिन फैसले हो रहे हैं। फैसले कौन कर रहा है, पता है, पता भी नहीं है।’
लेखक के बारे में
अमित शुक्‍ला
पत्रकारिता और जनसंचार में पीएचडी की। टाइम्‍स इंटरनेट में रहते हुए नवभारतटाइम्‍स डॉट कॉम से पहले इकनॉमिकटाइम्‍स डॉट कॉम में सेवाएं दीं। पत्रकारिता में 15 साल से ज्‍यादा का अनुभव। फिलहाल नवभारत टाइम्स डॉट कॉम में असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर के रूप में कार्यरत। टीवी टुडे नेटवर्क, दैनिक जागरण, डीएलए जैसे मीडिया संस्‍थानों के अलावा शैक्षणिक संस्थानों के साथ भी काम किया। इनमें शिमला यूनिवर्सिटी- एजीयू, टेक वन स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय (नोएडा) शामिल हैं। लिंग्विस्‍ट के तौर पर भी पहचान बनाई। मार्वल कॉमिक्स ग्रुप, सौम्या ट्रांसलेटर्स, ब्रह्मम नेट सॉल्यूशन, सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी और लिंगुअल कंसल्टेंसी सर्विसेज समेत कई अन्य भाषा समाधान प्रदान करने वाले संगठनों के साथ फ्रीलांस काम किया। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। देश-विदेश के साथ बिजनस खबरों में खास दिलचस्‍पी।... और पढ़ें

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