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Ladakh Clash: भारत-चीन हर हफ्ते कर रहे बैठक, चीन ने नहीं बताया कितने हताहत

India China Ladakh Clash: 15 जून की रात लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley) में कितने चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के कितने सैनिक मारे गए, इसे लेकर चीन ने अभी तक चुप्पी साध रखी है। भारत के साथ बातचीत के दौरान वह हिंसा का जिम्मा भारत पर डाल रहा है लेकिन अपने सैनिकों के हताहत होने का खुलासा नहीं कर रहा है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 28 Jun 2020, 7:07 pm

हाइलाइट्स

  • भारत के साथ हर हफ्ते हो रही है चीन की बातचीत
  • पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के समाधान पर चर्चा
  • इस दौरान अपने सैनिकों पर चीन ने साधी है चुप्पी
  • गलवान में कितने हताहत, अभी तक नहीं बताया
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नई दिल्ली
पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley, Ladakh Clash) में हिंसा के बाद एक बार फिर भारत और चीन के बीच बातचीत (India China) का दौर जारी है। दोनों देश अब हर हफ्ते परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (Working Mechanism for Consultation and Coordination, WMCC) की मीटिंग में पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की पूर्वी लद्दाख सेक्टर में जारी आक्रामकता पर चर्चा करेंगे और यहां तनाव कम करने के तरीके ढूंढेंगे। पिछले हफ्ते हुई ऐसी ही एक बैठक के दौरान जब भारत ने 15 जून की रात हिंसा में शहीद अपने सैनिकों पर चर्चा की तो चीन ने अपने नुकसान का जिक्र नहीं किया और PLA के कितने सैनिक हताहत हुए हैं, इसे लेकर चुप्पी कायम रखी है।
पिछले हफ्ते भी हुई थी बैठक
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 'इस बात पर सहमति बनी है कि WMCC की बैठक में हर हफ्ते पूर्वी लद्दाख में चीनी आक्रामकता पर चर्चा होगी। भारतीय पक्ष में विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और सुरक्षाबलों के प्रतिनिधि होंगे।' पिछले हफ्ते भी WMCC ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की बैठक कर पूर्वी लद्दाख में मुद्दों और इसे सुलझाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा की थी।

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हताहतों पर चीन ने साधी चुप्पी
बातचीत के दौरान गलवान घाटी में 15 जून को हुई हिंसा में चीनी सेना के कितने जवान मारे गए, इसे लेकर चीनी पक्ष ने चुप्पी साध रखी थी। भारत ने अपने यहां शहीद जवानों की संख्या सार्वजनिक की है लेकिन चीन ने इसे अभी छिपा रखा है। सूत्रों के मुताबिक चीन में 43 सैनिक हताहत हुए हैं। इनमें से कितने मृत हैं और कितने घायल, इसे लेकर पुष्ट जानकारी नहीं है। इन सैनिकों को हेलिकॉप्टर के जरिए घाटी से निकाला गया था।

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1959 के नक्शे को उठा रहा चीन
सूत्रों का कहना है कि चीनी पक्ष ने भारतीय सेना पर हिंसा का आरोप लगाया है जो पेइचिंग में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी किया गया था। चीनी पक्ष 1959 के नक्शे को उठा रहा है लेकिन इसे भारत खारिज कर चुका है। इस मैप पर 1962 में भी चर्चा हुई थी लेकिन भारत ने इसे तब भी खारिज कर दिया था। इसके बाद 1962 की जंग छिड़ गई थी।

नेपाल का सहारा लेकर भारत पर हमला
चीनी पक्ष का कहना है कि उन्होंने सीमा मुद्दे पर बात करने के लिए और इसे सुलझाने के लिए पहले ही प्रस्ताव दिया था और भारत को उसका जवाब देना चाहिए। हालांकि, यह प्रस्ताव क्या था, इसे लेकर जानकारी नहीं है। बातचीत के दौरान भारत ने चीन के उन आरोपों का भी खंडन किया है जिसमें उसने नेपाल विवाद का सहारा लेकर भारत पर सीमा के विस्तार का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि नेपाल के साथ सीमा विवाद ने तब बड़ा रूप ले लिया जब सीमा ने नया नक्शा जारी कर भारतीय क्षेत्रों पर अपना दावा ठोंक दिया।

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