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कश्मीर में हड़ताल, जन जीवन प्रभावित

कश्मीर घाटी में अलगाववादियों की ओर से बुलाई हड़ताल की वजह से रविवार को जनजीवन प्रभावित हुआ। अलगाववादियों ने गुरुवार को कुपवाड़ा में सैन्य शिविर पर ...

नवभारतटाइम्स.कॉम 1 May 2017, 9:00 am

भाषा, श्रीनगर : कश्मीर घाटी में अलगाववादियों की ओर से बुलाई हड़ताल की वजह से रविवार को जनजीवन प्रभावित हुआ। अलगाववादियों ने गुरुवार को कुपवाड़ा में सैन्य शिविर पर आतंकियों के हमले के बाद सुरक्षाबलों की गोलीबारी में एक नागरिक की मौत का विरोध करने के लिए हड़ताल की अपील की है।

रविवार को अधिकांश दुकानें, अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान और ईंधन स्टेशन बंद रहे। सार्वजनिक परिवहन के वाहन कम संख्या में दिखे, लेकिन निजी कारें, कैब और ऑटो रिक्शा शहर के कई इलाकों में सामान्य तौर पर चल रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि साप्ताहिक बाजार खुले रहे। सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक की अगुवाई वाले हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दोनों धड़े और जेकेएलएफ प्रमुख मोहम्मद यासीन मलिक ने गुरुवार को प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों की गोलीबारी में मोहम्मद यूसुफ भट की मौत के खिलाफ शुक्रवार को घाटी व्यापी बंद की अपील की थी। प्रदर्शनकारी दो आतंकियों के शवों की मांग कर रहे थे जिन्हें पंजगाम में सेना के तोपखाना इकाई पर हमला करने पर जवाबी गोलीबारी में मार गिराया गया था। सुबह में हुए हमले में एक अधिकारी सहित तीन सैनिक मारे गए थे, जबकि सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों को मार गिराया था।

3 दशक में 40 हजार मौतें

जम्मू-कश्मीर में जारी अलगाववादी हिंसा के दौरान पिछले तीन दशक में 40 हजार से ज्यादा जानें जा चुकी हैं। 1990 से 9 अप्रैल 2017 तक की अवधि में मौत के शिकार हुए इन लोगों में स्थानीय नागरिक, सुरक्षाबल के जवान और आतंकवादी शामिल हैं। कश्मीर में हिंसा को लेकर एक आरटीआई के जवाब में गृह मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 27 सालों में अब तक राज्य में आतंकवादी गतिविधियों और आतंकवाद विरोधी अभियानों में 40961 लोग मारे गए हैं। जबकि 1990 से 31 मार्च 2017 तक की अवधि में घायल हुए सुरक्षाबल के जवानों की संख्या 13 हजार से अधिक हो गई है।

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