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ट्रेनों की स्पीड बढ़े या नहीं पर जेब से पैसा निकलने की रफ्तार बढ़ेगी

मेल और एक्सप्रेस की कैटिगरी वाली 48 ट्रेनों के सुपरफास्ट होने के बाद भले ही ये ट्रेनें पैसेंजरों को तय वक्त से देरी से पहुंचाएं पर इन ट्रेनों में सफर करने वालों को अब पहले के मुकाबले अधिक किराया चुकाना होगा। दिलचस्प यह है कि आने वाले दिनों में उत्तर भारत आने जाने वाली ट्रेनों पर कोहरे का असर होगा...

गुलशन राय खत्री | नवभारत टाइम्स 31 Oct 2017, 7:50 pm
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

मेल और एक्सप्रेस की कैटिगरी वाली 48 ट्रेनों के सुपरफास्ट होने के बाद भले ही ये ट्रेनें पैसेंजरों को तय वक्त पर पहुंचाएं या न पहुंचाएं, लेकिन इन ट्रेनों में सफर करने वालों को अब पहले के मुकाबले अधिक किराया चुकाना होगा। दिलचस्प यह है कि आने वाले दिनों में उत्तर भारत आने जाने वाली ट्रेनों पर कोहरे का असर होगा। इस दौरान कोहरे की वजह से भले ही ट्रेन 10 घंटे से ज्यादा लेट होगी लेकिन यात्रियों को अधिक किराया देना होगा, क्योंकि ट्रेन की कैटिगरी बदलकर सुपरफास्ट की गई है।

इंडियन रेलवे के सूत्रों के मुताबिक 48 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की कैटिगरी बदलकर सुपरफास्ट की गई है, यानी मोटे तौर पर उनकी रफ्तार में 5 से 10 किमी की बढ़ोतरी होगी। लेकिन इस कैटिगरी के बदलने के बावजूद इस बात की कोई गारंटी नहीं होगी कि ये ट्रेनें अपने तय वक्त पर ही यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाएंगी। हालांकि इस बात की गारंटी जरूर होगी कि उन्हें पहले के मुकाबले अधिक किराया देना होगा।

रेलवे बोर्ड के सूत्रों का कहना है कि इन ट्रेनों की कैटिगरी मेल और एक्सप्रेस से सुपरफास्ट होते ही उनमें सफर करने वालों को अब सुपरफास्ट का अतिरिक्त चार्ज देना होगा यानी किराए में यह चार्ज जुड़ जाएगा। इन ट्रेनों में सफर करने वाले हर क्लास के यात्री को अतिरिक्त चार्ज देना होगा। मसलन, यात्री स्लीपर क्लास में सफर करते हुए अब तक जो किराया अदा करता था, उसमें उसे अब 30 रुपये अतिरिक्त जोड़कर देने होंगे। इसी तरह से सेकेंड और थर्ड एसी में सफर करने वाले को 45 रुपये और फर्स्ट क्लास के यात्री को 75 रुपये सुपरफास्ट चार्ज के रूप में देने होंगे।

रेलवे के सूत्रों का कहना है कि इन 48 ट्रेनों को शामिल कर लें तो सुपरफास्ट ट्रेनों की संख्या 1072 हो गई है। इसी तरह से सुपरफास्ट, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या लगभग साढ़े तीन हजार हो गई है। रेलवे के नियमों के मुताबिक अगर कोई ट्रेन 15 मिनट तक लेट होती है तो भी उसे टाइम पर ही माना जाता है।

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